दही खाने का सही वक्त कौन सा है, जानिए सुबह या दोपहर में खाने के फायदेयूएस ओपन फाइनल में हार के बाद आर्यना सबालेंका ने तोड़ा रैकेट, कैमरामैन पर फूटा गुस्साराकेश कुमार का खास गार्डनिंग फॉर्मूला, 90% रेत में पौधे लगाएंगे तो कभी नहीं सड़ेंगी जड़ेंदौसा के बांदीकुई जंक्शन पर दर्दनाक हादसा, प्लेटफॉर्म पर गिरा लोहे का एंगल, हरियाणा के यात्री की मौतमिर्जापुर द मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया गदर, 9 दिनों में दुनिया भर में कमाए 245 करोड़ से ज्यादाझुंझुनूं में रोडवेज बस पर फ्लाइंग टीम का छापा, सादुलपुर-जयपुर रूट पर बिना टिकट मिले सात यात्री और कंडक्टर पर एफआईआरजोधपुर में बाबा की बीज पर उमड़ी आस्था की भारी भीड़, 108 ज्योतों के साथ हुई महाआरतीमुंबई-गोवा हाइवे पर उमड़ी भारी भीड़, गणेशोत्सव के मौके पर लगा लंबा जामशाहजहांपुर में हाईवोल्टेज तार की चपेट में आया मिट्टी से भरा डंपर, चालक ने कूदकर बचाई जानगणेश चतुर्थी पर ऐसे पहनें धोती स्टाइल साड़ी, 6 गज की आम साड़ी से मिलेगा परफेक्ट महाराष्ट्रीयन लुक
रक्षाबंधन पर आसानी से तैयार करें बाजार जैसी जालीदार मिठाई, बिना विशेष सांचे के घोल से लेकर तलने का आसान तरीकाखानपान
27 अग॰ 2026, 5:09 pm (17 दिन पहले)· 2

रक्षाबंधन पर आसानी से तैयार करें बाजार जैसी जालीदार मिठाई, बिना विशेष सांचे के घोल से लेकर तलने का आसान तरीका

रक्षाबंधन और सावन के पावन अवसर पर घर में बिना किसी खास मोल्ड के बाजार जैसा जालीदार और कुरकुरा घेवर तैयार किया जा सकता है। स्टील की छोटी कटोरी, सही तापमान और पतले बैटर की मदद से हलवाई जैसा स्वाद पाना बेहद आसान है।

सावन के पवित्र महीने और रक्षाबंधन के त्योहार पर घरों में पारंपरिक मिठाइयों की सोंधी महक घुलने लगती है। उत्तर भारत और राजस्थान की प्रसिद्ध मिठाई घेवर इस उत्सव का मुख्य आकर्षण होती है। आमतौर पर लोग इसे बाजार से खरीदना पसंद करते हैं, लेकिन घर पर शुद्ध सामग्री से बना कुरकुरा घेवर त्योहार की खुशी को दोगुना कर देता है। घेवर के ऊपर जब गाढ़ी मलाईदार रबड़ी, कटे हुए बादाम, पिस्ता और इलायची की सजावट की जाती है, तो इसका स्वाद अद्वितीय हो जाता है। अक्सर लोग सोचते हैं कि इसे बनाने के लिए खास सांचे की जरूरत होती है, लेकिन साधारण घरेलू बर्तनों से भी हलवाई जैसा जालीदार घेवर आसानी से तैयार किया जा सकता है।

सांचे के बिना बर्तनों का चयन और आवश्यक सामग्री

घेवर बनाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सही सामग्री और बर्तन एकत्र करना आवश्यक है। इसके लिए मैदा, शुद्ध देसी घी, एकदम ठंडा पानी, नींबू का रस, और तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में तेल या घी की आवश्यकता होती है। मिठास और सजावट के लिए हल्की या एक तार की चाशनी, ठंडी रबड़ी, कटे हुए बादाम, पिस्ता और छोटी इलायची तैयार रखी जाती है। सांचे के विकल्प के तौर पर किसी गहरी गोल कड़ाही का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, घर में मौजूद कोई छोटा गहरा स्टील का बर्तन या छोटी कटोरी का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो गर्म तेल में सुरक्षित रूप से रखा जा सके।

ये भी पढ़ें

परफेक्ट जालीदार बैटर बनाने की विस्तृत विधि

घेवर की सफलता उसके घोल यानी बैटर पर निर्भर करती है। बैटर तैयार करने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में देसी घी लें और उसमें थोड़ा बर्फ जैसा ठंडा पानी डालकर अच्छी तरह फेंटें। जब घी और पानी मिलकर सफेद और मलाईदार हो जाएं, तब उसमें थोड़ा-थोड़ा करके मैदा मिलाएं। मैदे को लगातार फेंटते रहें ताकि घोल में गुठलियां न बनें। इसके बाद घोल में धीरे-धीरे ठंडा पानी डालते हुए बेहद पतला और चिकना मिश्रण तैयार करें। अंत में इसमें नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाएं। ध्यान रखें कि घेवर का घोल सामान्य पकौड़ों के बैटर से काफी ज्यादा पतला होना चाहिए। यही पतलापन तेल में जाने पर घोल को फैलने देता है और उसमें सुंदर जाली का निर्माण करता है।

कड़ाही में बिना मोल्ड के घेवर तलने की तकनीक

तलने के लिए गहरी कड़ाही में तेल या घी डालकर अच्छी तरह गर्म करें। कड़ाही के ठीक बीचोंबीच साफ और गर्म तेल सहने योग्य छोटी स्टील की कटोरी या गोल बर्तन रखें। तेल का तापमान संतुलित करने के बाद, तैयार बैटर को किसी बर्तन या कछुल की मदद से कटोरी के केंद्र में बहुत पतली धार बनाकर डालें। बैटर डालते समय हाथ को थोड़ा ऊपर रखें, जिससे धार ऊंचाई से गिरे और मिश्रण तेल में फैलकर जालीदार परत बना सके। जब पहली परत हल्की सिक जाए और सेट हो जाए, तब उसके ऊपर बैटर की दूसरी पतली धार डालें। इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराकर कई पतली परतें बनाएं। बीच का छेद बनाए रखने के लिए किसी पतली स्टील की चम्मच या सींक का सहारा लें। घेवर को मध्यम आंच पर तब तक तलें जब तक वह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए। सिकने के बाद इसे सावधानी से बाहर निकालें और अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसके बाद घेवर पर हल्की या एक तार की चाशनी डालें और ऊपर से ठंडी रबड़ी, पिस्ता, बादाम तथा इलायची डालकर परोसें।

तापमान नियंत्रण और जरूरी सावधानियां

घेवर बनाते समय तेल के तापमान का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। घोल जितना पतला होगा, घेवर में उतनी ही बेहतर और बारीक जाली बनेगी। यदि तेल अत्यधिक गर्म होगा तो बैटर की परत डालते ही सिकुड़ जाएगी और जाली सही नहीं बनेगी। इसके विपरीत, यदि तेल कम गर्म होगा तो घेवर कुरकुरा बनने के बजाय बहुत अधिक तेल सोख लेगा। इसलिए आंच को हमेशा मध्यम से मध्यम-तेज के बीच बनाए रखें और बैटर को हमेशा थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ही डालें। इन बातों का पालन करके आप बिना किसी विशेष मोल्ड के भी घर पर बाजार जैसा स्वादिष्ट और क्रिस्पी घेवर बना सकते हैं।

सवाल-जवाब

घेवर बनाने के लिए सांचे की जगह क्या इस्तेमाल किया जा सकता है?
सांचे के विकल्प के रूप में घर में मौजूद किसी गहरी गोल कड़ाही में छोटी स्टील की कटोरी या गहरा गोल बर्तन रखा जा सकता है।
घेवर में जालीदार बनावट कैसे आती है?
घेवर का घोल सामान्य पकौड़े के बैटर से काफी पतला रखने और उसे ऊंचाई से पतली धार में गर्म तेल में डालने से जालीदार बनावट बनती है।
घेवर का बैटर बनाते समय किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
इसके लिए मैदा, देसी घी, बर्फ जैसा ठंडा पानी और नींबू के रस की कुछ बूंदों की आवश्यकता होती है।
घेवर तलते समय आंच कैसी रखनी चाहिए?
घेवर तलते समय आंच को हमेशा मध्यम से मध्यम-तेज के बीच रखना चाहिए ताकि वह सिकुड़े बिना कुरकुरा बने।
घेवर पर मिठास और सजावट के लिए क्या लगाया जाता है?
घेवर तलने के बाद उस पर एक तार की चाशनी लगाई जाती है और ऊपर से ठंडी रबड़ी, बादाम, पिस्ता और इलायची डाली जाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR