अक्टूबर का महीना शुरू होते ही स्थानीय फल और सब्जी मंडियों में ताजा आंवला बड़ी मात्रा में उपलब्ध होने लगता है। भारतीय रसोई में आंवले का इस्तेमाल सदियों से कई रूपों में होता आया है, जिसमें तीखी चटनी, अचार और कच्चे फल का सीधा सेवन शामिल है। पोषक तत्वों से भरपूर होने की वजह से इसे सुपरफूड का दर्जा दिया जाता है। इसमें मौजूद प्रचुर मात्रा में विटामिन सी शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बदलते मौसम में होने वाले सामान्य संक्रमणों से बचाव करने में भी मदद करता है। यदि आप कच्चे आंवले के तीखे और कसैले स्वाद से बचना चाहते हैं, तो इसका मीठा मुरब्बा बनाकर पूरे साल के लिए सुरक्षित रखना एक बेहतरीन विकल्प है।
आवश्यक सामग्री का सही अनुपात
स्वाद और सेहत से भरपूर मुरब्बा बनाने के लिए सामग्री का सटीक नाप बेहद जरूरी है। इसके लिए एक किलोग्राम बड़े और पूरी तरह बेदाग ताजा आंवले चुनें। मिठास के लिए बराबर मात्रा यानी एक किलोग्राम चीनी की आवश्यकता होगी। आंवले के प्राकृतिक कसैलेपन को पूरी तरह दूर करने के लिए एक छोटा चम्मच फिटकरी या खाने वाला चूना प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा खुशबू और जायके को बढ़ाने के लिए पांच से छह कुटी हुई हरी इलायची, आधा छोटा चम्मच कुटी काली मिर्च पाउडर, आधा छोटा चम्मच काला नमक और आठ से दस रेशे शुद्ध केसर की जरूरत होगी।
मुरब्बा तैयार करने की चरणबद्ध विधि
मुरब्बा बनाने की शुरुआत आंवलों की उचित तैयारी से होती है। सबसे पहले आंवलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर किसी सूखे कपड़े से पोंछ लें। इसके बाद कांटे वाले चम्मच की सहायता से प्रत्येक आंवले में चारों तरफ गहरे छेद करें, ताकि बाद में चाशनी अंदर तक समा सके। एक बड़े बर्तन में पर्याप्त पानी लेकर उसमें एक चम्मच चूना या फिटकरी अच्छी तरह घोल लें। तैयार आंवलों को इस पानी में डालकर रात भर अथवा कम से कम आठ से दस घंटे के लिए भिगो दें। अगली सुबह आंवलों को इस घोल से बाहर निकालें और बहते साफ पानी से दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें ताकि फिटकरी या चूने का कोई अंश न रहे।
इसके बाद एक गहरे बर्तन में पानी उबालें और उसमें धुले हुए आंवलों को मध्यम आंच पर आठ से दस मिनट तक पकाएं। इस दौरान ध्यान रखें कि आंवले केवल मुलायम होने चाहिए, वे इतने ज्यादा न उबलें कि फटने या टूटने लगें। आंवले पक जाने पर छलनी की मदद से गर्म पानी अलग कर दें और फलों को पंखे की हवा में थोड़ा सूखने दें।
चाशनी पकाने और सुरक्षित रखने का तरीका
अगले चरण में एक भारी तले वाली कढ़ाई में एक किलोग्राम चीनी और एक कप पानी डालकर धीमी आंच पर चढ़ाएं। जब चीनी पूरी तरह पिघल जाए, तो उबले और सूखे हुए आंवलों को चाशनी में डाल दें। अब धीमी आंच पर आंवलों को चाशनी के साथ तब तक पकने दें जब तक कि चाशनी एक तार की गाढ़ी अवस्था में न पहुंच जाए। जैसे-जैसे आंवले चाशनी को सोखेंगे, उनका रंग बदलकर शहद जैसा खूबसूरत और सुनहरा हो जाएगा। चाशनी पूरी तरह गाढ़ी होने पर गैस बंद करने से ठीक पहले उसमें कुटी हुई हरी इलायची, काली मिर्च, काला नमक और केसर के धागे अच्छी तरह मिला दें। पूरी तरह ठंडा हो जाने के बाद इस मुरब्बे को कांच के साफ और सूखे जार में भरकर महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।



















