ठंड के मौसम में सुबह की चाय के साथ अगर घर पर तैयार किया गया कोई गरमागरम और पौष्टिक पारंपरिक व्यंजन मिल जाए, तो पूरे दिन की ऊर्जा बनी रहती है। सर्दियों के इस विशेष समय में गोंद और सूखे मेवों से सजे लड्डू भारतीय घरों की एक बेहद पुरानी और भरोसेमंद पसंद रहे हैं। बाजार की मिलावटी और अधिक मीठी मिठाइयों पर निर्भर रहने के बजाय इन्हें रसोई में खुद बनाना न केवल काफी आसान है, बल्कि इसमें अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार सामग्री की मात्रा भी तय की जा सकती है। तलते समय खाने वाला गोंद अच्छी तरह फूलकर बिल्कुल कुरकुरा हो जाता है, जो इन लड्डुओं को एक अनोखा स्वाद और कुरकुरापन देता है।
जब इस फूले हुए गोंद के साथ बादाम, काजू, अखरोट और अन्य पसंदीदा मेवों का मेल किया जाता है, तो स्वाद के साथ-साथ इसका टेक्सचर भी काफी निखर जाता है। अगर आप भी इस सर्दी में अपने परिवार के लिए स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट लड्डू बनाने की सोच रहे हैं, तो इस बेहद व्यवस्थित विधि की मदद से बिना किसी झंझट के इन्हें तैयार कर सकते हैं।
लड्डू तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री
स्वाद और सेहत से भरपूर इन लड्डुओं को बनाने के लिए घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली कुछ चुनिंदा चीजों की जरूरत होती है
- लगभग तीन-चौथाई कप बारीक पिसी हुई चीनी
- सूखे मेवों में आधा कप बादाम, एक-चौथाई कप काजू और एक-चौथाई कप अखरोट
- स्वाद और बेहतरीन खुशबू के लिए आधा चम्मच इलायची पाउडर
- स्वादानुसार थोड़ी सी किशमिश
- धीमी आंच पर भूनने के लिए गेहूं का आटा और तलने व बांधने के लिए पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी
- तलने के लिए अच्छी गुणवत्ता का खाने वाला गोंद
यहां सामग्री का चयन करते समय एक बेहद जरूरी सावधानी बरतना अनिवार्य है। लड्डू बनाने के लिए हमेशा खाने वाले सामान्य गोंद का ही प्रयोग करना चाहिए। गोंद कतीरा पूरी तरह से एक अलग प्रकृति और तासीर वाली सामग्री होती है, इसलिए इन दोनों को कभी भी एक-दूसरे के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
गोंद और मेवों को भूनने का सही तरीका
लड्डू बनाने की शुरुआत कड़ाही में घी गर्म करने से होती है। ध्यान रखें कि घी बहुत अधिक तेज गर्म न हो, क्योंकि ज्यादा गर्म घी में गोंद डालते ही वह बाहर से जल जाएगा और अंदर से कच्चा रह जाएगा। कड़ाही में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गोंद डालें और उसे धीमी से मध्यम आंच पर ही धीरे-धीरे तलें। जैसे ही गोंद अच्छी तरह फूलकर हल्का और कुरकुरा हो जाए, उसे घी से बाहर निकाल लें। जब तला हुआ गोंद ठंडा हो जाए, तो उसे हाथ से मसलकर या बेलन के दबाव से हल्का दरदरा कूट लें। इसे पूरी तरह बारीक पाउडर बनाने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि इसके छोटे-छोटे कुरकुरे दाने खाते समय मुंह में बहुत बढ़िया स्वाद देते हैं।
इसके बाद उसी कड़ाही में जरूरत के मुताबिक थोड़ा और घी डालें और कटे हुए बादाम, काजू तथा अखरोट को हल्का सा भून लें। मेवों को बहुत ज्यादा गहरा भूरा करने की आवश्यकता नहीं होती है। जैसे ही इनमें से सौंधी खुशबू आने लगे, इन्हें कड़ाही से निकालकर अलग बर्तन में रख लें।
आटे की भुनाई और मिश्रण तैयार करना
मेवे भूनने के बाद कड़ाही में बचा हुआ घी डालें और उसमें गेहूं का आटा डालकर धीमी आंच पर भूनना शुरू करें। इस पड़ाव पर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न करें, क्योंकि तेज आंच पर आटा जल सकता है। आटे को चम्मच से लगातार चलाते रहें ताकि वह तले पर चिपके नहीं। जब आटे का रंग हल्का सुनहरा हो जाए और रसोई में उसकी सोंधी महक फैलने लगे, तो गैस बंद कर दें। भुने हुए आटे को कुछ समय के लिए सामान्य तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ दें। अगर आटा बहुत ज्यादा गर्म रहेगा और उसी दौरान उसमें चीनी मिला दी जाएगी, तो चीनी पिघल सकती है जिससे मिश्रण का स्वाद और बनावट दोनों ही बिगड़ सकते हैं।
सामग्री मिलाना और लड्डू बांधने की विधि
जब भुना हुआ आटा हल्का गुनगुना रह जाए, तब इसमें पहले से दरदरा कूटा हुआ गोंद, भुने हुए मेवे, पिसी हुई इलायची का पाउडर और पिसी हुई चीनी डालें। इसके साथ ही इसमें किशमिश भी मिला दें। अब इन सभी सामग्रियों को अपने दोनों हाथों या फिर एक बड़े चम्मच की सहायता से बहुत अच्छी तरह एकसार मिला लें।
मिश्रण तैयार होने के बाद थोड़ा-थोड़ा हिस्सा हाथ में लें और दोनों हथेलियों के बीच दबाते हुए गोल आकार के लड्डू बांध लें। यदि बांधते समय मिश्रण सूखा महसूस हो रहा हो और लड्डू ठीक से नहीं बन पा रहे हों, तो उसमें थोड़ा सा गुनगुना घी ऊपर से मिलाया जा सकता है। याद रखें कि घी एक साथ ज्यादा डालने के बजाय चम्मच से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ही मिलाएं ताकि लड्डू ज्यादा गीले न हों।
तैयार लड्डुओं को तुरंत डिब्बे में बंद न करें, बल्कि उन्हें पूरी तरह से ठंडा होने दें। जब वे पूरी तरह ठंडे और सख्त हो जाएं, तब उन्हें एक साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें। इन लड्डुओं को तैयार करते समय और रखने के बाद किसी भी तरह की नमी से बचाना बेहद जरूरी है, क्योंकि सीलन लगने से इनकी बनावट और ताजगी जल्दी खराब हो सकती है।
अपनी पसंद के अनुसार करें बदलाव
इस पारंपरिक रेसिपी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें मेवों का चुनाव पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है। यदि आप चाहें तो इसमें मखाना, पिस्ता या फिर कुछ स्वास्थ्यवर्धक बीज भी शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा जो लोग कम मीठा पसंद करते हैं, वे पिसी हुई चीनी की मात्रा को अपने स्वादानुसार घटा सकते हैं। ठंड के असर से बचने और खास खुशबू व स्वाद पाने के लिए कई घरों में इस मिश्रण में थोड़ी सी सोंठ भी मिलाई जाती है।

















