बाजार से केला खरीदते समय ज्यादातर लोग सिर्फ उसका रंग देखकर फैसला ले लेते हैं, लेकिन यह तरीका हमेशा सही साबित नहीं होता। अगर आप महज 30 सेकंड में केले की चार आसान बातें परख लें, तो हर बार घर लेकर आ सकते हैं ऐसा फल जो असली मायने में मीठा, ताजा और प्राकृतिक तरीके से पका हो।
रंग से करें पहचान की शुरुआत
सबसे पहले केले के रंग पर ध्यान दें। प्राकृतिक तरीके से पका केला हल्के या गहरे पीले रंग का दिखता है। इसके छिलके पर अगर छोटे-छोटे भूरे धब्बे नजर आएं तो घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि ऐसे केले आमतौर पर ज्यादा मीठे और स्वादिष्ट माने जाते हैं। हां, अगर केले का ऊपरी हिस्सा यानी डंठल हरा दिख रहा है जबकि बाकी फल पीला है, तो समझ लीजिए कि केला अभी पूरी तरह नहीं पका है।
छिलके की हालत परखना न भूलें
केला उठाते वक्त उसके छिलके की स्थिति भी ध्यान से देखें। अगर छिलका कहीं से फटा हुआ है, उस पर बड़े काले निशान बने हैं या फल दबा हुआ महसूस हो रहा है, तो ऐसा केला उठाने से बचें। इसके उलट, जिस केले का छिलका साफ, चिकना और हल्का सख्त हो, वह लंबे समय तक ताजा बना रहता है।
खुशबू सुनाएगी असली कहानी
एक और आसान तरीका है केले को सूंघकर परखना। अच्छी तरह पका केला हल्की मीठी खुशबू छोड़ता है। वहीं अगर किसी केले से अजीब या खट्टी गंध आ रही हो, तो उसे बिल्कुल न खरीदें। साथ ही हाथ में लेने पर केला बहुत ज्यादा नरम भी महसूस नहीं होना चाहिए, क्योंकि इतना मुलायम फल जल्दी खराब होने लगता है।
सिर्फ चमक देखकर फैसला न लें
दरअसल सिर्फ चमकीला पीला रंग देखकर केला खरीद लेना सही तरीका नहीं है। रंग के साथ-साथ फल की बनावट, डंठल की स्थिति, छिलके की सेहत और उसकी खुशबू पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है। इन छोटी-छोटी बातों को अपनाकर हर बार मीठा, ताजा और प्राकृतिक रूप से पका केला घर लाया जा सकता है।
जरूरत के हिसाब से चुनें सही केला
अगर उसी दिन केला खाने का इरादा है तो पूरी तरह पीला फल खरीदना बेहतर रहेगा। वहीं अगर दो-तीन दिन बाद खाने की योजना है तो हल्का हरा केला लेना समझदारी है, क्योंकि वह घर पर धीरे-धीरे प्राकृतिक तरीके से खुद पक जाएगा। अगली बार बाजार जाएं तो इन आसान तरीकों को जरूर आजमाएं।











