यूपी के सहारनपुर जिले को मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है और गर्मियों में यहां के बागों से निकलने वाला आम सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों की मेज तक अपनी मिठास पहुंचाता है. यहां की मिट्टी में तैयार होने वाली आधा दर्जन किस्में ऐसी हैं जिनका स्वाद चखते ही लोग दीवाने हो जाते हैं, और इन्हीं आमों के दम पर सहारनपुर की पहचान देश की सीमाओं से बाहर तक बनी है.
लंगड़ा, दशहरी और चौसा की तिकड़ी
सहारनपुर की सबसे बड़ी पहचान तीन आमों से जुड़ी है, लंगड़ा, दशहरी और चौसा. ये तीनों आम सिर्फ देश के बाजारों तक सीमित नहीं रहते बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट होते हैं और वहां के लोगों की जुबान पर मिठास घोलते हैं. दशहरी आम की यहां कई उपजातियां उगाई जाती हैं, जिनमें नागिन दशहरी नाम की वैरायटी खासतौर पर अपनी अलग पहचान रखती है.
बनारस के नाम वाला सहारनपुर का आम
दिलचस्प बात यह है कि सहारनपुर के एक बेहद फेमस आम का नाम बनारस पर है, लेकिन असल में यह सहारनपुर की पैदावार है. बनारसी लंगड़ा आम की पहचान शहद जैसी मिठास, रेशे रहित गूदे और पकने के बाद भी छिलके के हरे बने रहने से होती है. इसकी खुशबू और स्वाद इतने अलग हैं कि उत्तर प्रदेश में यह सबसे लोकप्रिय आमों में गिना जाता है. किसानों के लिए यह आम कमाई का बड़ा जरिया है क्योंकि बाजार में इसका दाम बाकी आमों से तीन गुना तक ज्यादा मिलता है.
चौसा, सीजन का आखिरी और सबसे भारी आम
सीजन में सबसे देर से पकने वाला आम चौसा है और यह अपनी बेमिसाल मिठास, मलाईदार गूदे और गजब की खुशबू के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. आकार में यह बाकी आमों से बड़ा और वजन में भारी होता है, और गर्मी खत्म होते होते जाकर पकता है. इसकी क्वालिटी इतनी शानदार मानी जाती है कि यह विदेशों तक निर्यात किया जाता है. यही वजह है कि देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसी बड़ी हस्तियों को उपहार में भेजे जाने वाले आमों में चौसा को खास तवज्जो मिलती है.
दशहरी, जो सबसे पहले आता है बाजार में
दशहरी आम अपनी तीखी मिठास, रस से भरे गूदे और अलग खुशबू के लिए मशहूर है. उत्तर प्रदेश की प्रमुख मैंगो बेल्ट होने के चलते सहारनपुर में उगने वाले दशहरी का गूदा लगभग रेशे रहित और बेहद मुलायम होता है, वहीं इसका छिलका इतना पतला होता है कि आसानी से खाया जा सकता है. सीजन में सबसे पहले बाजार में उतरने वाला यही आम है. लोग इसे कच्चा खाना जितना पसंद करते हैं, उतना ही इसका अचार डालना भी.
रसगुल्ला आम, नाम ही बताता है मिठास
सहारनपुर का रसगुल्ला आम अपनी बेइंतहा मिठास, भरपूर रस वाले गूदे और लाजवाब खुशबू के लिए पहचाना जाता है. यह इतना मीठा होता है कि खाते ही मुंह में रसगुल्ले जैसा स्वाद घुल जाता है, और इसी वजह से इसका नाम रसगुल्ला आम पड़ा. यह किस्म ज्यादातर सहारनपुर क्षेत्र में ही मिलती है, जहां हर किसान इसके पेड़ जरूर लगाता है. यह आम गुच्छों में लगता है और वीआईपी लोगों की पसंदीदा सूची में भी शामिल रहता है.
गुलाब जामुन आम, पकते-पकते बदलता है तीन रंग
सहारनपुर का गुलाब जामुन आम अपनी मिठास, अनोखे रंग और खुशबू के लिए अलग पहचान रखता है. पकने के दौरान यह तीन बार रंग बदलता है, शुरुआत में हरा रहता है, फिर पकने के साथ लाल हो जाता है और आखिर में पूरी तरह पकने पर चमकीले पीले रंग में बदल जाता है. पेड़ों पर यह आमतौर पर भारी गुच्छों में लगता है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगता है. अपनी इस खासियत के चलते बाजार में यह आम सामान्य किस्मों से लगभग दोगुने दाम पर बिकता है और इसकी मांग सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं है बल्कि विदेशों तक इसका निर्यात होता है.
वीवीआईपी टेबल तक पहुंचती है मिठास
सहारनपुर के इन सभी आमों की खासियत यही है कि हर किस्म अपने अलग स्वाद के लिए जानी जाती है. आम के सीजन में यहां के आम देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और यहां तक कि अन्य मंत्रियों को भी उपहार स्वरूप भेजे जाते हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सहारनपुर के आम को उसके नाम और स्वाद से पहचानते हैं, यही वजह है कि सहारनपुर सिर्फ एक जिला नहीं बल्कि आम के शौकीनों के लिए एक ठिकाना बन चुका है.













