भारतीय खानपान में अचार का स्थान हमेशा से बेहद खास रहा है। अमूमन भारतीय घरों में आम, नींबू और हरी मिर्च के खट्टे-तीखे अचार ही ज्यादा देखे जाते हैं, लेकिन दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में मांसाहारी अचार, विशेषकर मछली के अचार का एक अलग ही स्वाद और पारंपरिक चलन है। तटीय इलाकों में रहने वाली बुजुर्ग महिलाएं पीढ़ियों से इस पारंपरिक व्यंजन को तैयार करती आ रही हैं। घर की बुजुर्ग महिलाएं दोपहर के भोजन के साथ इसके दो टुकड़े खाना नियमित रूप से पसंद करती हैं। यह चटपटा अचार उबले हुए सादे चावल और गरमागरम पराठों के साथ खाने पर भोजन का स्वाद दोगुना कर देता है।
मछली का अचार बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
इस पारंपरिक रेसिपी को तैयार करने के लिए मुख्य रूप से 500 ग्राम बिना कांटे वाली मछली की जरूरत होती है। मसालों और तड़के के लिए 1 चम्मच हल्दी पाउडर, 3 से 4 चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 2 बड़े चम्मच ताजा अदरक-लहसुन का पेस्ट, 1 चम्मच साबुत सरसों के दाने, आधा चम्मच मेथी दाना और 10 से 12 ताजी करी पत्तियां चाहिए। इसके अलावा खटास और संरक्षण के लिए 3 से 4 बड़े चम्मच सिरका या ताजा नींबू का रस, स्वादानुसार नमक और तलने व मसाला पकाने के लिए 1 कप सरसों का तेल, तिल का तेल अथवा मूंगफली का तेल आवश्यक होता है।
मछली की तैयारी और सुखाने की प्रक्रिया
मछली का अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहे, इसके लिए सबसे अहम चरण उसकी नमी को पूरी तरह खत्म करना है। सबसे पहले बिना कांटे वाली मछली के टुकड़ों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद मछली के इन टुकड़ों में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और थोड़ा सा नमक अच्छी तरह मिला लें। अब इन टुकड़ों को एक चौड़े बर्तन में फैलाकर 3 से 4 घंटे के लिए तेज धूप में सूखने के लिए रख दें। धूप में रखने से मछली के भीतर मौजूद अतिरिक्त पानी पूरी तरह सूख जाता है, जिससे अचार में फफूंद लगने का खतरा खत्म हो जाता है।
तलने और मसाला तैयार करने की विधि
धूप में सुखाने के बाद एक कड़ाही में 1 कप तेल गरम करें। जब तेल मध्यम गरम हो जाए, तब मछली के टुकड़ों को उसमें डालें और मध्यम आंच पर तब तक डीप फ्राई करें जब तक कि वे पूरी तरह सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं। अच्छी तरह तलने के बाद इन्हें तेल से निकालकर एक अलग प्लेट में रख लें। अब कड़ाही के उसी बचे हुए तेल में 1 चम्मच सरसों के दाने, आधा चम्मच मेथी दाना और 10-12 करी पत्ते डालें। जब ये चटकने लगें, तब इसमें 2 बड़े चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट मिलाएं और तब तक भूनें जब तक कि उसका कच्चापन खत्म न हो जाए।
मसाला पकाना और सुरक्षित भंडारण
अदरक-लहसुन भुन जाने के बाद आंच को एकदम धीमा कर दें। अब इसमें 3 से 4 चम्मच लाल मिर्च पाउडर, बची हुई हल्दी और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसके तुरंत बाद पहले से तले हुए मछली के कुरकुरे टुकड़े इस मसाले में डालें और धीमी आंच पर लगभग 2 मिनट तक चलाते हुए पकाएं ताकि सभी मसाले मछली पर लिपट जाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और पूरे मिश्रण को कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें। जब मिश्रण पूरी तरह ठंडा हो जाए, तभी इसमें 3 से 4 बड़े चम्मच सिरका या नींबू का रस मिलाएं। अंत में इस तैयार अचार को अच्छी तरह मिलाकर एक साफ और सूखे कांच के जार में भर लें। यह अचार 2 से 3 दिन में अच्छी तरह मसालों को सोखकर खाने लायक हो जाता है और उचित रखरखाव से कई महीनों तक बिल्कुल खराब नहीं होता।
























