नवरात्रि के पावन पर्व पर उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए खानपान का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक होता है। लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है, इसलिए फलाहार में ऐसे व्यंजनों को शामिल करने की सलाह दी जाती है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करें। इस दौरान सिंघाड़े के आटे की बर्फी एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प साबित होती है। दूध, देसी घी, चीनी और सूखे मेवों के मेल से तैयार होने वाली यह पारंपरिक मिठाई न केवल उपवास के नियमों के अनुकूल है, बल्कि इसे घर की रसोई में बेहद सरलता से बनाया जा सकता है।
आवश्यक सामग्री का सही अनुपात
अजमेर की रहने वाली गृहिणी हिना के अनुसार इस स्वादिष्ट बर्फी को बनाने के लिए सामग्री का सटीक अनुपात बेहद महत्वपूर्ण है। इस फलाहारी मिठाई को बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है
- 2 कप सिंघाड़े का आटा
- 3 कप दूध
- 3 बड़े चम्मच शुद्ध देसी घी
- 2 कप चीनी (स्वादानुसार कम या ज्यादा की जा सकती है)
- आधा छोटी चम्मच पिसी हुई हरी इलायची का पाउडर
- बारीक कटे हुए बादाम और पिस्ता (अपनी पसंद के अनुसार अन्य सूखे मेवे भी ले सकते हैं)
यदि आप पारिवारिक आयोजनों या अधिक लोगों के लिए यह बर्फी तैयार करना चाहते हैं, तो इसी अनुपात को ध्यान में रखते हुए सभी सामग्रियों की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
आटे की भुनाई और दूध की तैयारी
बर्फी बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहला कदम दूध को तैयार करना है। एक अलग बर्तन में 3 कप दूध डालकर उसे अच्छी तरह उबाल लें। जब दूध पूरी तरह उबल जाए, तो आंच बंद करके इसे एक तरफ रख दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जब भुने हुए आटे में दूध मिलाया जाए, तब दूध का गर्म होना अनिवार्य है। ठंडा दूध मिलाने से मिश्रण की बनावट प्रभावित हो सकती है।
इसके बाद एक भारी तले वाली कड़ाही में 3 बड़े चम्मच देसी घी डालकर मध्यम आंच पर पिघलाएं। घी गर्म हो जाने पर आंच को धीमा करें और कड़ाही में 2 कप सिंघाड़े का आटा डालें। इस आटे को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए लगभग 10 से 15 मिनट तक भूनें। आटा अच्छी तरह भुनने पर उसमें से सौंधी खुशबू आने लगती है और उसका रंग हल्का सुनहरा हो जाता है। लगातार चलाना इसलिए जरूरी है ताकि आटा तले में चिपके नहीं और एकसमान पके।
मिश्रण पकाने और गुठलियां रोकने का तरीका
जब सिंघाड़े का आटा भुन जाए, तब इसमें पहले से गर्म करके रखा गया दूध धीरे-धीरे डालें। दूध डालते समय दूसरे हाथ से करछी को लगातार चलाते रहें। ऐसा करना बेहद जरूरी है ताकि आटे और दूध के संपर्क में आते ही कोई गांठ या गुठली न बने। जब आटा और दूध पूरी तरह मिलकर एकसार हो जाएं, तब मिश्रण में 2 कप चीनी मिलाएं।
चीनी डालने के बाद मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक पकाते रहें जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए और पूरा मिश्रण गाढ़ा होकर कड़ाही के किनारों को छोड़ने न लगे। इस दौरान यदि आवश्यकता महसूस हो, तो चिकनाहट और चमक बढ़ाने के लिए थोड़ा सा अतिरिक्त घी भी डाला जा सकता है। अंत में खुशबू और स्वाद के लिए आधा छोटी चम्मच इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और आंच बंद कर दें।
थाली में जमाना और परोसना
बर्फी को आकार देने के लिए एक बड़ी थाली या ट्रे की सतह पर हल्का सा घी लगाकर उसे चिकना कर लें। अब कड़ाही से तैयार गर्म मिश्रण को थाली में पलटें और चम्मच या कटोरी के पिछले हिस्से की मदद से एकसमान मोटाई में फैला दें। इसके बाद ऊपर से बारीक कटे हुए बादाम और पिस्ता छिड़कें और उन्हें हल्के हाथों से दबा दें ताकि मेवे मिश्रण में अच्छी तरह चिपक जाएं।
थाली को कमरे के सामान्य तापमान पर कुछ देर ठंडा होने दें। इसके बाद बर्फी को पूरी तरह सेट करने के लिए 1 से 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें। जब मिश्रण अच्छी तरह जम जाए, तब चाकू की मदद से इसे मनपसंद चौकोर या डायमंड आकार के टुकड़ों में काट लें। यह स्वादिष्ट और ऊर्जावान बर्फी व्रत के दौरान फलाहार के रूप में परोसने के लिए पूरी तरह तैयार है।





















