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तुरकौलिया की मुरकी मिठाई: अंग्रेजी अफसरों की पसंद से लेकर नीतीश कुमार के स्टॉल तक का सफरखानपान
17 जून 2026, 5:56 pm (134 दिन पहले)· 3

तुरकौलिया की मुरकी मिठाई: अंग्रेजी अफसरों की पसंद से लेकर नीतीश कुमार के स्टॉल तक का सफर

पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया चौक की मुरकी मिठाई बिना तेल के सिर्फ चीनी के पाग में बनती है। अंग्रेजों के दौर में शुरू हुई यह मिठाई आज करीब 500 रुपये प्रति किलो बिकती है और देश-विदेश तक भेजी जाती है।

बिहार में मिठाइयों की कोई कमी नहीं, मगर पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया की मुरकी मिठाई की बात ही अलग है। यह वह मिठाई है जिसका नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है, और जिसे एक बार चखने वाला बार-बार इसकी तरफ खिंचा चला आता है। अपने अनोखे स्वाद और बनाने की खास विधि के दम पर यह आज पूरे बिहार में पहचानी जाती है।

कहां मिलती है यह खास मिठाई

मुरकी मिठाई की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह हर जगह नहीं मिलती। इसका असली ठिकाना मुख्य रूप से तुरकौलिया चौक ही है। यही वह जगह है जहां से इस मिठाई की पहचान बनी और जहां पहुंचकर लोग इसका स्वाद लेते हैं।

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अंग्रेजों के जमाने से जुड़ी कहानी

इस मिठाई का नाता सीधे अंग्रेजों के दौर से जुड़ता है। मुरकी मिठाई बनाने की शुरुआत स्वर्गीय गोपाल चौधरी ने की थी। उनके पुत्र उमेश पटेल, जिन्हें लोग भुआल के नाम से भी जानते हैं, बताते हैं कि अंग्रेज अफसरों को यह मिठाई इतनी भाती थी कि वे इसे अक्सर तुरकौलिया कोठी में मंगवाया करते थे। यानी इसकी लोकप्रियता आज की नहीं, बल्कि सौ साल से भी पुरानी है।

खुरमा से निकला मुरकी का विचार

उमेश पटेल के मुताबिक, मुरकी मिठाई बनाने का ख्याल असल में खुरमा मिठाई से आया था। इसे छेना का खुरमा भी कहा जाता है, फर्क बस इतना है कि इसका आकार खुरमा के मुकाबले बड़ा होता है। इस मिठाई की सबसे बड़ी खूबी इसके बनने के तरीके में छिपी है। इसे केवल चीनी के पाग में तैयार किया जाता है और इसमें किसी भी तरह के तेल का इस्तेमाल नहीं होता। यही वजह है कि इसका स्वाद बाकी मिठाइयों से अलग ठहरता है।

कीमत और बढ़ती मांग

आज मुरकी मिठाई की कीमत करीब 500 रुपये प्रति किलो है। दाम बढ़ने के बावजूद इसकी मांग में कोई कमी नहीं आई है। यह सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों और विदेश तक भेजी जाती है। जो लोग एक बार इसका स्वाद चख लेते हैं, वे इसे दोबारा खरीदने जरूर लौटते हैं।

नीतीश कुमार के कार्यक्रम तक पहुंची पहचान

इस मिठाई की शोहरत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुरकी मिठाई का विशेष स्टॉल लगवाया था। उमेश पटेल यह बात गर्व के साथ बताते हैं। यही कारण है कि चंपारण की यह मिठाई आज अपनी एक अलग पहचान बना चुकी है और लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

सवाल-जवाब

मुरकी मिठाई कहां मिलती है?
यह मिठाई मुख्य रूप से पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया चौक पर ही मिलती है।
मुरकी मिठाई बनाने में क्या खास बात है?
इसे केवल चीनी के पाग में तैयार किया जाता है और इसमें किसी भी प्रकार के तेल का इस्तेमाल नहीं होता।
मुरकी मिठाई की कीमत कितनी है?
आज इसकी कीमत करीब 500 रुपये प्रति किलो है।
इस मिठाई की शुरुआत किसने की थी?
मुरकी मिठाई बनाने की शुरुआत स्वर्गीय गोपाल चौधरी ने की थी, और अब इसे उनके पुत्र उमेश पटेल आगे बढ़ा रहे हैं।
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