रोज सुबह दूध उबालने के बावजूद कई घरों में मलाई की परत इतनी पतली रहती है कि हफ्ते-भर जमा करने के बाद भी घी या मक्खन बनाने लायक मात्रा नहीं जुट पाती. इसकी असली वजह दूध चुनने के तरीके, उबालने की तकनीक और ठंडा करने के दौरान बरती गई एक छोटी-सी गलती में छिपी होती है. रसोई में थोड़ा तरीका बदलते ही कटोरी भर गाढ़ी मलाई जमाना मुश्किल नहीं रह जाता.
दूध का सही चुनाव सबसे पहली शर्त
जिन घरों में मलाई पतली जमती है, वहां अक्सर टोंड या पैकेट वाला हल्का दूध इस्तेमाल हो रहा होता है. टोंड और डबल टोंड दूध में फैट की मात्रा शुरू से ही बहुत कम रखी जाती है, इसलिए चाहे जितनी देर उबाल लें, उस पर मोटी परत जमने की गुंजाइश कम ही रहती है. अगर मकसद सिर्फ चाय-नाश्ते के लिए दूध पीना नहीं बल्कि घर पर घी और मक्खन तैयार करना है, तो शुरुआत में ही फुल क्रीम दूध खरीदना जरूरी हो जाता है. फुल क्रीम दूध में फैट की मात्रा स्वाभाविक रूप से ज्यादा होती है, यही फैट बाद में ठंडा होने पर ऊपर तैरकर मोटी मलाई की शक्ल लेता है.
धीमी आंच पर उबालना असली राज
दूध को एक बड़े और गहरे बर्तन में निकालकर धीमी आंच पर रखें और इसे 10 से 15 मिनट तक लगातार उबलने दें. जल्दबाजी में तेज आंच पर उबालकर तुरंत गैस बंद कर देना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है, क्योंकि इससे मलाई को गाढ़ा होने का पूरा वक्त ही नहीं मिल पाता. धीमी आंच पर लंबे समय तक पकने से दूध का प्राकृतिक टेक्सचर खुद-ब-खुद गाढ़ा होने लगता है, और यही गाढ़ापन आगे चलकर मोटी मलाई की नींव बनता है. उबालते समय बर्तन के ऊपर आड़ा लकड़ी का बड़ा चम्मच रख देने से दूध उफनकर बाहर नहीं गिरता, जिससे न गैस गंदी होती है और न ही दूध बर्बाद होता है.
ठंडा करते वक्त प्लेट की जगह जाली का इस्तेमाल करें
दूध उबालने के बाद गैस तो बंद कर दें, लेकिन बर्तन को कभी प्लेट से पूरी तरह बंद न करें. इसकी जगह ऊपर एक जाली या छननी रख दें. दरअसल मलाई तभी मोटी जमती है जब गर्म दूध सीधे ठंडी हवा के संपर्क में आता है, इससे दूध की सतह पर मौजूद फैट तेजी से ऊपर आकर एक घनी परत बना लेता है. अगर बर्तन को प्लेट से ढक दिया जाए, तो अंदर बनने वाली भाप ठंडी होकर पानी की बूंदों के रूप में वापस दूध पर टपकती है, जिससे मलाई की परत पतली और कमजोर रह जाती है. दूध जब कमरे के तापमान तक पूरी तरह ठंडा हो जाए, तभी बर्तन को सावधानी से उठाकर फ्रिज में रखें. फ्रिज में रखने के करीब दो से तीन घंटे के भीतर ही दूध की सतह पर एक मोटी और घनी मलाई की परत साफ नजर आने लगती है. इस मलाई को चम्मच से धीरे-धीरे उतारकर किसी एयरटाइट डिब्बे या लंचबॉक्स में भरें और उसे फ्रिज में ही सुरक्षित रखें.
मलाई को स्टोर करते समय बरतें ये सावधानी
जमा की गई मलाई को हमेशा एयरटाइट डिब्बे में ही रखें, क्योंकि खुले बर्तन में रखी मलाई फ्रिज की महक सोख सकती है और उसका स्वाद बदल सकता है. साथ ही हर बार ताजा जमी मलाई को उसी डिब्बे में डालने से पहले यह देख लें कि डिब्बा पूरी तरह सूखा हो, ताकि मलाई जल्दी खराब न हो और उसकी शुद्धता बनी रहे.
तीन दिन में जमेगी कटोरी भर मलाई
जिन्हें घी बनाने के लिए हफ्तों इंतजार करना मंजूर नहीं, वे इसी पूरी प्रक्रिया, यानी उबालना, ठंडा करना और मलाई उतारना, को एक दिन में दो से तीन बार भी दोहरा सकते हैं. लगातार तीन बार यह चक्र दोहराने पर नतीजे कहीं बेहतर मिलते हैं और सिर्फ दो से तीन दिन के भीतर ही कटोरी भर से ज्यादा मलाई जमा हो जाती है. रोज की यह छोटी सी मेहनत आगे चलकर बड़ा फायदा देती है, क्योंकि जब यही गाढ़ी मलाई घी या मक्खन बनाने के काम आती है, तो सामान्य तरीके से निकाली गई मलाई के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा घी हाथ लगता है.
कटोरी भर मलाई से पावभर घी कैसे निकालें
फ्रिज में जमा हो चुकी मलाई से भरपूर घी निकालने के लिए एक आखिरी तरकीब अपनानी पड़ती है. घी बनाने से एक से दो दिन पहले मलाई में थोड़ा सा दही या जामन मिला दें और उसे कमरे के तापमान पर रख दें, ताकि मलाई अच्छी तरह खट्टी हो जाए. इसके बाद इस खट्टी मलाई को अच्छी तरह फेंटकर उसमें से मक्खन अलग किया जाता है, और फिर उस मक्खन को धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसी पारंपरिक तरीके से पकाने पर कटोरी भर मलाई से पावभर, यानी करीब 250 ग्राम या उससे भी ज्यादा शुद्ध और दानेदार घी आसानी से तैयार हो जाता है.



















