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कम शक्कर में तैयार करें छतरपुर का प्रसिद्ध मलाई लड्डू, 20 साल पुराने कारीगर बब्बी चौरसिया ने बताया पारंपरिक तरीकाखानपान
28 अग॰ 2026, 8:30 am (63 दिन पहले)· 2

कम शक्कर में तैयार करें छतरपुर का प्रसिद्ध मलाई लड्डू, 20 साल पुराने कारीगर बब्बी चौरसिया ने बताया पारंपरिक तरीका

छतरपुर के 20 साल पुराने मिठाई कारीगर बब्बी चौरसिया ने मलाई लड्डू बनाने की पारंपरिक रेसिपी शेयर की है। 1 किलो दूध में महज 50 ग्राम शक्कर मिलाकर घर पर ही शुद्ध और स्वादिष्ट लड्डू बनाए जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पारंपरिक मिठाइयों की अपनी एक खास पहचान है, जिसमें मलाई लड्डू को सबसे ऊपर स्थान दिया जाता है। दशकों से चले आ रहे इस पारंपरिक व्यंजन को क्षेत्र की सबसे शुद्ध मिठाई माना जाता है क्योंकि इसे बिना किसी बाहरी मिलावट के केवल शुद्ध दूध के मावा से तैयार किया जाता है। त्योहारों का सीजन हो या आम दिन, स्थानीय लोगों के बीच इस मिठाई की मांग हमेशा बनी रहती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस स्वादिष्ट और सेहतमंद मिठाई को बाजार से खरीदने के बजाय घर पर भी बेहद आसानी से बनाया जा सकता है।

छतरपुर की सबसे पुरानी और शुद्ध मिठाई की परंपरा

छतरपुर जिले में मलाई लड्डू बनाने का इतिहास काफी पुराना है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पुराने समय में जब बाजार में आधुनिक मिठाइयों के ढेरों विकल्प उपलब्ध नहीं थे, तब मलाई लड्डू ही हर खास मौके की पहली पसंद हुआ करता था। मलाई का लड्डू हो या फिर मलाई बर्फी, दोनों को ही स्वच्छता और शुद्धता के मामले में अव्वल माना जाता है। आज भी जब घर में कोई मांगलिक कार्य या त्योहार होता है, तो छतरपुर के हर घर में यह मिठाई बड़े चाव से बनाई और परोसी जाती है।

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20 साल के अनुभवी कारीगर बब्बी चौरसिया का अनुभव

पिछले 20 वर्षों से मलाई लड्डू बनाने का काम कर रहे स्थानीय कारीगर बब्बी चौरसिया का कहना है कि इसे बनाना बहुत मुश्किल काम नहीं है। यदि सही प्रक्रिया और सटीक माप का ध्यान रखा जाए, तो इसे कोई भी अपने किचन में आसानी से तैयार कर सकता है। बब्बी चौरसिया बताते हैं कि इस लड्डू का स्वाद अन्य पारंपरिक मिठाइयों की तुलना में बिल्कुल अलग और अनोखा होता है। दूध का प्राकृतिक गाढ़ापन और इलायची की सुगंध मिलकर इसे ऐसा स्वाद देती है कि एक बार खाने के बाद हर कोई इसे बार-बार खाना चाहता है।

सही अनुपात ही है स्वाद की असली कुंजी

मलाई लड्डू तैयार करते समय सबसे ज्यादा ध्यान सामग्री के सही संतुलन और अनुपात पर देना होता है। बब्बी चौरसिया के अनुसार, इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शक्कर का इस्तेमाल बहुत ही कम मात्रा में किया जाता है। आमतौर पर मिठाइयों में अत्यधिक चीनी मिलाई जाती है, लेकिन मलाई लड्डू में 1 किलो शुद्ध दूध के साथ केवल 50 ग्राम शक्कर ही मिलाई जाती है। शक्कर की यह नियंत्रित मात्रा दूध के प्राकृतिक मिठास को दबने नहीं देती और लड्डू को अत्यधिक मीठा होने से बचाती है। इसी वजह से यह खाने में बेहद हल्का और स्वादिष्ट लगता है।

मलाई लड्डू बनाने की step-by-step पारंपरिक विधि

घर पर मलाई लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले एक लोहे की कढ़ाई ली जाती है। लोहे की कढ़ाई में दूध डालकर उसे तेज आंच पर उबाला जाता है। दूध को गर्म करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना पड़ता है कि वह नीचे पेंदे में जलने न पाए। इसके लिए दूध को लगातार चलाते रहना आवश्यक है।

दूध को तब तक औंटाया या पकाया जाता है जब तक वह गाढ़ा होकर रबड़ी जैसा न हो जाए। पकाने के इसी चरण के दौरान इसमें 50 ग्राम पिसी शक्कर और बारीक पिसी हुई इलायची मिला दी जाती है। यदि आप चाहें तो स्वाद और पोषण बढ़ाने के लिए इसमें बारीक कटे हुए ड्राई-फ्रूट्स भी शामिल कर सकते हैं। जब मिश्रण पूरी तरह गाढ़ा होकर रबड़ी की रंगत ले ले, तब कढ़ाई को आंच से नीचे उतार लिया जाता है।

फेंटने की तकनीक और आधुनिक विकल्प

कढ़ाई को आंच से उतारने के बाद मिश्रण को ठंडा होने के साथ-साथ अच्छी तरह फेंटना सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सही तरीके से फेंटने पर ही मावा में सही कसावट आती है, जिससे लड्डू आसानी से गोल आकार में बंध पाते हैं। यदि फेंटने में लापरवाही की जाए तो लड्डू का आकार सही नहीं बन पाता।

हालांकि पारंपरिक तरीका शुद्ध दूध को औंटाकर मावा बनाने का ही है, लेकिन समय की बचत के लिए बाजार से तैयार मावा या फिर कद्दूकस किया हुआ पनीर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर भी, यदि आप छतरपुर का असली और पारंपरिक स्वाद पाना चाहते हैं, तो लोहे की कढ़ाई में दूध को धीमी और तेज आंच पर पकाकर बनाई गई पारंपरिक विधि ही सबसे उत्तम मानी जाती है।

सवाल-जवाब

छतरपुर का मलाई लड्डू क्यों खास माना जाता है?
मलाई लड्डू को सबसे शुद्ध मिठाई माना जाता है क्योंकि इसे बिना किसी मिलावट के केवल शुद्ध दूध के मावा से तैयार किया जाता है।
1 किलो दूध में कितनी शक्कर मिलाने की सलाह दी गई है?
20 साल पुराने कारीगर बब्बी चौरसिया के अनुसार 1 किलो दूध में केवल 50 ग्राम शक्कर ही मिलानी चाहिए।
दूध को किस बर्तन और आंच पर पकाया जाता है?
मलाई लड्डू बनाने के लिए लोहे की कढ़ाई में तेज आंच पर दूध को लगातार चलाते हुए रबड़ी की तरह गाढ़ा होने तक पकाया जाता है।
क्या मलाई लड्डू बनाने के लिए बाजार के मावे का इस्तेमाल किया जा सकता है?
हां, समय बचाने के लिए बाजार से मावा या पनीर का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन पारंपरिक स्वाद के लिए शुद्ध दूध को औंटाना ही सबसे बेहतर तरीका है।
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