घर पर बनी इडली या मेदु वड़ा अक्सर होटल जैसा स्वाद और टेक्सचर नहीं दे पाते, और इसकी वजह रेसिपी नहीं बल्कि बैटर तैयार करने का तरीका होती है। ज्यादातर लोग उड़द दाल पीसते समय सिर्फ सादा पानी डालते हैं और इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते कि मिक्सी चलने के दौरान जार के अंदर बैटर कितना गर्म हो रहा है। यही एक छोटी सी लापरवाही इडली की नरमी और वड़े की कुरकुराहट पर सीधा असर डालती है। हाल ही में एक साउथ इंडियन महिला ने सोशल मीडिया पर एक आसान ट्रिक शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि उड़द दाल पीसते समय सादे पानी की जगह बर्फ या बर्फ वाला ठंडा पानी इस्तेमाल करने से बैटर का पूरा टेक्सचर बदल जाता है। इससे इडली पहले से ज्यादा सॉफ्ट, वड़ा ज्यादा क्रिस्पी और बैटर कहीं ज्यादा हल्का बनता है। आइए समझते हैं कि इस ट्रिक के पीछे विज्ञान क्या है और इसे अपनाने से रसोई में क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।
मिक्सी की गर्मी से बिगड़ता है दाल का टेक्सचर
मिक्सी के ब्लेड बेहद तेज रफ्तार से घूमते हैं और लगातार चलने की वजह से जार धीरे-धीरे गर्म होने लगता है। यह गर्मी सीधे बैटर तक पहुंच जाती है, जिससे उड़द दाल का नैचुरल टेक्सचर बिगड़ने लगता है। जब पीसते समय थोड़ी-थोड़ी बर्फ डाली जाती है, तो जार का तापमान नियंत्रण में रहता है। इससे बैटर पूरी प्रक्रिया के दौरान ठंडा बना रहता है और उसकी फ्लफी बनावट बरकरार रहती है। यानी असली दिक्कत दाल में नहीं, बल्कि पीसने के दौरान बनने वाली अतिरिक्त गर्मी में छिपी होती है, और बर्फ इसी गर्मी को काबू में रखने का काम करती है।
बर्फ से मिलता है बेहतर खमीर, बैटर में नहीं आता ज्यादा खट्टापन
बहुत से लोगों को लगता है कि बैटर जितना गर्म होगा, वह उतनी जल्दी तैयार हो जाएगा, लेकिन जरूरत से ज्यादा गर्मी बैटर के लिए फायदेमंद नहीं मानी जाती। अगर पीसते समय बैटर ज्यादा गर्म हो जाए, तो उसका संतुलन बिगड़ सकता है और आगे चलकर बैटर में जरूरत से ज्यादा खट्टापन भी आ सकता है। इसके उलट, ठंडे तापमान पर तैयार किया गया बैटर आराम से और सही रफ्तार से खमीर पकड़ता है, जिससे इडली और वड़ा दोनों का स्वाद पहले से बेहतर हो जाता है। सॉफ्ट इडली का सबसे बड़ा राज हल्का और हवादार बैटर ही होता है, और जब उड़द दाल ठंडे माहौल में पीसी जाती है, तो उसमें ज्यादा हवा समा पाती है। यही वजह है कि तैयार बैटर फूला हुआ नजर आता है और इससे बनी इडली स्पंज जैसी नरम बनती है, जो खाने में भी काफी हल्की लगती है।
वड़े बनते हैं बाहर से कुरकुरे, अंदर से मुलायम
मेदु वड़ा बनाने के लिए गाढ़ा और फ्लफी बैटर होना सबसे जरूरी माना जाता है। अगर पीसते समय बैटर ज्यादा गर्म होकर पतला हो जाए, तो वड़े तलते समय ज्यादा तेल सोख लेते हैं, जिससे न सिर्फ वे ऑयली हो जाते हैं बल्कि उनका टेक्सचर भी खराब हो जाता है। वहीं, बर्फ डालकर तैयार किया गया बैटर अपनी सही गाढ़ाई पूरी प्रक्रिया के दौरान बनाए रखता है। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि वड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से मुलायम बनते हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी अच्छे होटल में परोसे जाते हैं।
बैटर का रंग भी रहता है साफ और सफेद
कई बार दाल पीसने के बाद उसका रंग हल्का पीला या मटमैला दिखाई देने लगता है। इसकी एक बड़ी वजह पीसने के दौरान पैदा होने वाली गर्मी भी हो सकती है। बर्फ डालने से बैटर पूरे समय ठंडा बना रहता है, जिससे उसका रंग पहले से ज्यादा साफ और सफेद नजर आता है। यही वजह है कि इससे बनी इडली देखने में भी ज्यादा आकर्षक लगती है। ठंडे पानी या बर्फ के साथ पीसी गई उड़द दाल ज्यादा हवा अपने अंदर रोक पाती है, जिससे बैटर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा हल्का और फूला हुआ बनता है। कई अनुभवी लोग बैटर की जांच के लिए उसकी एक बूंद पानी में डालकर देखते हैं, और अगर वह बूंद पानी में ऊपर तैरने लगे, तो इसे इस बात का संकेत माना जाता है कि बैटर अच्छी तरह तैयार हो चुका है।
ट्रिक अपनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी घर पर यह तरीका अपनाना चाहते हैं, तो बर्फ बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ न डालें। जरूरत के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा करके इस्तेमाल करें, ताकि बैटर की गाढ़ाई सही बनी रहे और वह न तो बहुत पतला हो और न ही बहुत सख्त। इसके अलावा दाल को पीसने से पहले अच्छी तरह भिगोना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि सही भिगोई हुई दाल ही अच्छी तरह पिस पाती है। साथ ही, पीसने के बाद बैटर को सही समय तक ढककर रखना भी जरूरी है, जिससे उसमें अच्छा खमीर उठ सके। इन छोटी-छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखकर कोई भी घर पर ही रेस्टोरेंट जैसी सॉफ्ट इडली और स्वादिष्ट मेदु वड़ा आसानी से बना सकता है।













