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लाल कार्ड, ट्रंप का फोन कॉल और फीफा में भूचाल, अमेरिका-बेल्जियम मैच से पहले मचा बवालफुटबॉल
6 जुल॰ 2026, 11:21 pm (22 दिन पहले)· 3

लाल कार्ड, ट्रंप का फोन कॉल और फीफा में भूचाल, अमेरिका-बेल्जियम मैच से पहले मचा बवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन पर बात करने के बाद स्ट्राइकर फोलारिन बेलोगुन का एक मैच का प्रतिबंध हटा दिया गया, जिससे बेल्जियम, यूएफा और नॉर्वे के कोच ने फीफा के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई।

फुटबॉल वर्ल्ड कप के नॉकआउट राउंड में एक फोन कॉल ने सारा माहौल गरमा दिया है। अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बेलोगुन को मिले लाल कार्ड के बावजूद फीफा ने उन्हें सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मैच खेलने की मंजूरी दे दी, और इसके पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी दखलंदाजी सामने आई है।

लाल कार्ड से शुरू हुआ पूरा विवाद

मामले की जड़ पिछले बुधवार के राउंड ऑफ 32 मुकाबले में है, जहां रेफरी ने बोस्निया-हर्जेगोविना के एक खिलाड़ी पर गलत टैकल के लिए फोलारिन बेलोगुन को लाल कार्ड दिखाया था। फीफा के सामान्य नियमों के मुताबिक नॉकआउट मैच में सीधा लाल कार्ड मिलने पर अगले मैच में खिलाड़ी पर अपने आप एक मैच का प्रतिबंध लग जाता है, यानी बेलोगुन को अमेरिका के अगले मुकाबले में बाहर बैठना चाहिए था। लेकिन फीफा ने यह प्रतिबंध लागू ही नहीं किया, और बेलोगुन को सोमवार के मैच के लिए हरी झंडी मिल गई। यही फैसला टूर्नामेंट का सबसे बड़ा विवाद बन गया।

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ट्रंप बोले, मैंने सिर्फ समीक्षा के लिए कहा था

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले से पल्ला नहीं झाड़ा। सोमवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने माना कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से सीधे इस मुद्दे पर बात की थी, हालांकि उनका कहना था कि उन्होंने किसी खास नतीजे के लिए दबाव नहीं डाला। ट्रंप ने कहा, 'मैंने बस समीक्षा करने के लिए कहा था। मुझे नहीं लगा कि यह फाउल था।' उन्होंने रेफरी के फैसले को 'बेहद खराब' बताया और कहा कि इस पर दोबारा नजर डालनी चाहिए थी। उनका कहना था कि उन्होंने बस एक खराब फैसले पर दोबारा गौर करने को कहा, नतीजा तय करने की कोशिश नहीं की। लेकिन एक अमेरिकी राष्ट्रपति का नॉकआउट मैच से चंद घंटे पहले फुटबॉल संस्था के मुखिया से सीधे बात करना खुद में एक बड़ा सवाल बन गया।

बेल्जियम और यूएफा ने कहा, फीफा ने सीमा लांघी

बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी और खुद को 'बहुत चिंतित' बताया। महासंघ के बयान में साफ नाराजगी झलकी कि बेलोगुन से जुड़े फैसले के खिलाफ अपील के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने में फीफा ने नीयत नहीं दिखाई। इससे पहले ही यूरोपीय फुटबॉल संस्था यूएफा फीफा पर हमलावर हो चुकी थी, उसने इस फैसले को 'समझ से परे और अनुचित' करार दिया और कहा कि लाल कार्ड के बाद अनिवार्य एक मैच के प्रतिबंध को नजरअंदाज करके फीफा ने अपनी सीमा पार कर दी है। यानी दोनों फुटबॉल संस्थाओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि फीफा ने ऐन मौके पर अपने ही नियमों से मुंह मोड़ लिया, वह भी तब जब कुछ ही घंटों बाद अमेरिका और बेल्जियम के बीच सिएटल में क्वार्टर फाइनल की जगह के लिए मुकाबला होना था।

नॉर्वे के कोच बोले, यह फैसला वर्ल्ड कप को नुकसान पहुंचाएगा

इस विवाद पर नाराजगी सिर्फ बेल्जियम और यूएफा तक सीमित नहीं रही। नॉर्वे के कोच स्टेल सोलबक्केन ने रविवार को ब्राजील जैसी मजबूत टीम को हराकर अपनी टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचाने के बाद इस पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, 'यह बहुत, बहुत, बहुत, बहुत, बहुत बुरा फैसला है जो वर्ल्ड कप को नुकसान पहुंचाएगा।' यूएफा ने भी इसी चिंता को और सख्त भाषा में दोहराया और कहा, 'जब नियम लागू करने वाले खुद उनकी निश्चितता की गारंटी नहीं देते, तो खेल की ईमानदारी खतरे में पड़ जाती है और प्रतियोगिता की विश्वसनीयता कम हो जाती है।' खेल जगत की दो अलग-अलग आवाजों से आई इस आलोचना ने इसे वर्ल्ड कप के 96 साल के इतिहास के सबसे गंभीर भरोसे के संकट के तौर पर पेश कर दिया।

इन्फेंटिनो का दावा, फैसला राजनीति से नहीं न्यायिक निकाय से होगा

फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इस बात को खारिज किया कि इस पूरे मामले का फैसला राजनीतिक दबाव में हुआ। उन्होंने माना कि उन्होंने बेलोगुन के निलंबन को लेकर डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत जरूर की, लेकिन कहा कि उन्होंने उसी बातचीत में साफ कर दिया था कि आखिरी फैसला उनके हाथ में नहीं बल्कि फीफा के स्वतंत्र न्यायिक निकायों के पास है। इन्फेंटिनो ने 'एक्स' पर जारी बयान में कहा, 'हमारी बातचीत के दौरान मैंने समझाया कि फीफा के स्वतंत्र न्यायिक निकायों से जुड़ी एक कानूनी प्रक्रिया चल रही है और सक्षम निकाय सही समय पर इस मामले का फैसला करेंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'फीफा की प्रणाली इसी तरह काम करती है, और यह एक ऐसा सिद्धांत है जिसका मैं हमेशा पालन करूंगा।' यानी इन्फेंटिनो का इशारा साफ था कि ट्रंप की कॉल से मामले के आखिरी नतीजे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

बेलोगुन मैदान पर उतरेंगे, लेकिन लड़ाई अभी बाकी

फिलहाल जमीनी नतीजा अमेरिका के पक्ष में है। फीफा ने एक मैच का स्वत: प्रतिबंध हटा दिया, जिसके बाद फोलारिन बेलोगुन को सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में अमेरिका के लिए खेलने की इजाजत मिल गई, और इस मैच के विजेता को क्वार्टर फाइनल का टिकट मिलेगा। लेकिन बेल्जियम ने साफ कर दिया है कि वह इतनी आसानी से मामला नहीं छोड़ने वाला, उसने पुष्टि की है कि वह फीफा के इस फैसले को औपचारिक रूप से चुनौती दे रहा है, भले ही मैच अपने तय समय पर हो रहा हो। यानी वर्ल्ड कप इस समय एक अनोखी स्थिति से गुजर रहा है, जहां एक नॉकआउट मैच ऐसे अनुशासनात्मक फैसले की छाया में खेला जा रहा है जिसे कई फुटबॉल संस्थाओं, एक हेड कोच और खुद यूएफा ने खुलेआम अनुचित करार दिया है, जबकि बेलोगुन के मामले पर फीफा की न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।

सवाल-जवाब

फोलारिन बेलोगुन को लाल कार्ड क्यों मिला था?
पिछले बुधवार के राउंड ऑफ 32 मैच में बोस्निया-हर्जेगोविना के एक खिलाड़ी पर गलत टैकल करने के लिए रेफरी ने उन्हें लाल कार्ड दिखाया था।
फीफा ने बेलोगुन का एक मैच का प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया?
फीफा का कहना है कि मामला उसके स्वतंत्र न्यायिक निकायों के पास है और सक्षम निकाय सही समय पर फैसला लेंगे, इसलिए फिलहाल स्वत: प्रतिबंध लागू नहीं किया गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बात की और कहा कि उन्होंने रेफरी के फैसले की सिर्फ समीक्षा के लिए कहा था, उन्हें यह फाउल नहीं लगा था।
बेल्जियम ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने खुद को 'बहुत चिंतित' बताया और कहा कि वह फीफा के फैसले को औपचारिक रूप से चुनौती देगा।
यूएफा ने इस फैसले पर क्या कहा?
यूएफा ने इसे 'समझ से परे और अनुचित फैसला' बताया और कहा कि अनिवार्य एक मैच का प्रतिबंध नजरअंदाज कर फीफा ने अपनी सीमा पार कर दी है।
नॉर्वे के कोच ने इस विवाद पर क्या कहा?
स्टेल सोलबक्केन ने कहा कि यह बहुत बुरा फैसला है जो वर्ल्ड कप को नुकसान पहुंचाएगा।
अमेरिका-बेल्जियम मैच कब और कहां हो रहा है?
यह राउंड ऑफ 16 मुकाबला सोमवार को सिएटल में हो रहा है और इसका विजेता क्वार्टर फाइनल में पहुंचेगा।
क्या यह विवाद अभी सुलझ गया है?
नहीं, बेल्जियम ने फीफा के फैसले को चुनौती देने की पुष्टि की है, इसलिए यह मामला अभी जारी रह सकता है।
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