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वर्ल्ड कप पर साइबर हमले का साया: ईरान समर्थक हैकर ग्रुप ने FBI के ड्रोन हैक करने का दावा ठोका, टीमों की बसों तक पहुंचने की धमकीफुटबॉल
13 जून 2026, 4:16 am (46 दिन पहले)· 0

वर्ल्ड कप पर साइबर हमले का साया: ईरान समर्थक हैकर ग्रुप ने FBI के ड्रोन हैक करने का दावा ठोका, टीमों की बसों तक पहुंचने की धमकी

ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप ‘Handala’ ने FBI के FPV ड्रोन सिस्टम पर कब्जे का दावा करते हुए FIFA World Cup 2026 की टीमों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे टूर्नामेंट की सुरक्षा को लेकर हड़कंप मच गया है।

दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट की शुरुआत के साथ ही उस पर एक अलग किस्म का खतरा मंडराने लगा है — गोलियों या बमों का नहीं, बल्कि कीबोर्ड और ड्रोन का। अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में गुरुवार, 11 जून से इतिहास का सबसे विशाल FIFA World Cup 2026 शुरू हुआ है, और ठीक इसी मौके पर ईरान से जुड़े एक हैकर ग्रुप ने ऐसा दावा कर दिया है जिसने आयोजकों और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

FBI के जासूसी ड्रोन पर कब्जे का दावा

जिहादी नेटवर्क और साइबर समूहों पर निगरानी रखने वाली संस्था ‘SITE Intelligence Group’ की रिपोर्ट के अनुसार, फिलिस्तीन समर्थक और ईरान से ताल्लुक रखने वाले हैकर ग्रुप ‘Handala’ ने एक डरावना बयान सार्वजनिक किया है। ग्रुप का कहना है कि उसने आतंकवाद-निरोधी कार्रवाइयों के लिए तैनात किए गए FBI के अत्याधुनिक ‘फर्स्ट-पर्सन व्यू’ (FPV) ड्रोन के पूरे तंत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया है।

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हैकर्स का दावा है कि बीते कई महीनों से वे अमेरिकी एजेंसी की संवेदनशील जानकारी — तस्वीरें, डेटा और संदिग्धों की सूची तक — पर हाथ साफ करते आ रहे हैं। उनके मुताबिक इन ड्रोन में चेहरा पहचानने वाली फेशियल रिकग्निशन तकनीक और नंबर प्लेट स्कैन करने जैसी बेहद उन्नत खूबियां मौजूद हैं, जिन्हें अमेरिका ने आतंकवाद से लड़ने के मकसद से लगाया था।

‘ड्रोन कभी भी तुम्हारी बस में उतर सकते हैं’

धमकी का सबसे चिंताजनक पहलू सीधे खिलाड़ियों की ओर इशारा करता है। जिस दिन अमेरिकी पुरुष राष्ट्रीय टीम (USMNT) पराग्वे के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करने जा रही थी, उसी दिन ‘Handala’ ने खुली चेतावनी दी कि टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही कुछ टीमें उसे बिल्कुल नापसंद हैं। ग्रुप के शब्दों में — सुरक्षा को और मजबूत कर लो, यह मत भूलो कि FPV ड्रोन हर जगह मौजूद हैं और कभी भी कोई ड्रोन सीधे तुम्हारी टीम की बस के भीतर पहुंच सकता है।

कितना सच, कितना दिखावा?

हालांकि इस पूरे दावे पर सवाल भी उठे हैं। ‘SITE Intelligence’ ने खुद बताया है कि हैकर्स की ओर से जारी किए गए कुछ वीडियो और फुटेज असली नहीं हैं — ये दरअसल अमेरिकी पुलिस के पुराने वीडियो हैं जिन्हें भ्रामक तरीके से पेश किया गया। बावजूद इसके, धमकी की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और किसी भी जोखिम को हल्के में लेने को तैयार नहीं हैं।

काश पटेल का ईमेल फोड़ चुका है यह ग्रुप

‘Handala’ को कोई आम हैकर गिरोह मानने की भूल नहीं की जा सकती। यह वही समूह है जिसने मार्च 2026 में FBI डायरेक्टर Kash Patel का निजी ईमेल अकाउंट तक सेंध लगाकर उनकी व्यक्तिगत तस्वीरें और 2010 से 2019 के बीच के कई गोपनीय दस्तावेज ऑनलाइन उजागर कर दिए थे।

इसी खतरे को भांपते हुए अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) ने इस ग्रुप के सदस्यों की पहचान बताने वाले के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये के इनाम का ऐलान कर रखा है। अमेरिकी न्याय विभाग पहले ही आगाह कर चुका था कि फरवरी 2026 में तेहरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद ईरान समर्थित साइबर हमलावर अमेरिका को बड़ी चोट पहुंचाने की ताक में हैं — और अब वर्ल्ड कप को ही हथियार बनाया जा रहा है।

मैदान के बाहर भी बवाल थमने का नाम नहीं

इस आयोजन की शुरुआत ही विवादों और सुरक्षा चूक की चर्चाओं के साथ हुई। एक ओर कई देशों के प्रशंसकों और पत्रकारों को अमेरिकी वीजा हासिल करने में भारी परेशानी झेलनी पड़ी। अफ्रीका के नंबर वन माने जाने वाले अंपायर Omar Artan को तो आतंकवादियों से कथित संबंध के झूठे आरोप में मियामी एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया।

दूसरी ओर, गुरुवार को मैक्सिको सिटी में खेले गए उद्घाटन मुकाबले के दौरान स्टेडियम के बाहर मजदूरों और लापता नागरिकों के अधिकारों को लेकर हिंसा भड़क उठी, जिसे काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

जंग के बीच ईरानी टीम की मुश्किलें

अमेरिका के साथ चल रहे टकराव का सीधा असर ईरान की फुटबॉल टीम पर भी पड़ा है। टीम को अपना ट्रेनिंग कैंप एरिजोना से समेटकर मैक्सिको के तिजुआना ले जाना पड़ा। गुरुवार को जब ईरानी टीम मीडिया के सामने आई तो 26 में से सिर्फ 12 खिलाड़ी ही नजर आए और स्टार स्ट्राइकर Mehdi Taremi भी गैरमौजूद रहे।

ईरान के राजदूत ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरानी टीम को सिर्फ मैच वाले दिन ही अमेरिका में प्रवेश मिलेगा और मुकाबला खत्म होते ही उसे तुरंत देश छोड़ना होगा। साफ है कि फुटबॉल का यह मैदान अब केवल खेल का नहीं, बल्कि भू-राजनीति और साइबर जंग का अखाड़ा बन चुका है।

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