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आखिर 'ब्रेन हेल्थ' का सही मतलब क्या है? मार्केटिंग के दावों और विज्ञान का सचगाइड
23 जून 2026, 4:00 am (45 दिन पहले)· 5

आखिर 'ब्रेन हेल्थ' का सही मतलब क्या है? मार्केटिंग के दावों और विज्ञान का सच

बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट्स और ऐप्स 'ब्रेन हेल्थ' सुधारने का वादा करते हैं, लेकिन विज्ञान के नजरिए से इसका कोई एक तय अर्थ नहीं है। ट्रेंडकिया की रिपोर्ट में जानिए कि कैसे आप मार्केटिंग के जाल से बचकर अपनी दिमागी सेहत को समझ सकते हैं।

आजकल बाजार में ऐसे उत्पादों की भरमार है जो 'ब्रेन हेल्थ' यानी दिमागी सेहत बेहतर करने का दावा करते हैं। चाहे कोई मल्टीविटामिन हो, मेडिटेशन ऐप हो या कोई वियरेबल गैजेट, हर कोई 'कॉग्निटिव फंक्शन' तेज करने या फोकस सुधारने के वादे कर रहा है। ट्रेंडकिया के अनुसार, जब तक ये उत्पाद किसी बीमारी के इलाज का दावा नहीं करते, तब तक एफडीए (FDA) भी इनके लिए कोई सख्त परिभाषा तय नहीं करता। नतीजा यह है कि 'ब्रेन हेल्थ' शब्द का इस्तेमाल कंपनियां अपने फायदे के लिए कर रही हैं, जबकि उपभोक्ता उलझन में हैं।

'ब्रेन हेल्थ' की कोई एक परिभाषा नहीं

न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. रेमन वेलास्केज़ के मुताबिक, 'ब्रेन हेल्थ' वेलनेस और हेल्थकेयर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले शब्दों में से है, लेकिन इसे सबसे कम स्पष्टता के साथ परिभाषित किया गया है। इसका मतलब कभी याददाश्त, कभी तनाव सहने की क्षमता, तो कभी अच्छी नींद हो सकता है। असल में, दिमागी सेहत को किसी एक नंबर या बायोमार्कर में नहीं बांधा जा सकता। यह एक बहुआयामी अवधारणा है।

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दिमाग को मापने के तरीके

डॉ. वेलास्केज़ बताते हैं कि शोधकर्ता और डॉक्टर दिमागी सेहत को मापने के लिए इन पैमानों का उपयोग करते हैं:

  • कॉग्निटिव परफॉरमेंस टेस्ट: इसमें याददाश्त, ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता का मानकीकृत मूल्यांकन होता है।
  • नींद की गुणवत्ता: 'पॉलीसोनोग्राफी' के जरिए नींद के चरणों और विकारों को मापा जाता है।
  • मूड और तनाव: पीएचक्यू-9 (PHQ-9) या जीएडी-7 (GAD-7) जैसे वैज्ञानिक पैमानों का उपयोग किया जाता है।
  • न्यूरो-इमेजिंग: यह तकनीक दिमाग की शारीरिक संरचना को देखने के काम आती है।

क्या सप्लीमेंट्स और ऐप्स वाकई काम करते हैं?

सप्लीमेंट्स के बाजार में विज्ञापनों का बोलबाला है। ओमेगा-3 फैटी एसिड या 'लायंस मेन मशरूम' (Hericium erinaceus) जैसे तत्वों पर शोध जरूर हुए हैं, लेकिन इनके 'पिल' फॉर्म में होने से दिमागी क्षमता बढ़ने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल भी ऐसी 'प्रोपराइटरी ब्लेंड्स' को लेकर संदेह जताता है। इसी तरह, 'ल्यूमिनोसिटी' (Lumosity) और 'ब्रेनएचक्यू' (BrainHQ) जैसे ऐप्स को लेकर भी सावधानी जरूरी है। फेडरल ट्रेड कमीशन ने पहले भी 'ल्यूमिनोसिटी' के खिलाफ भ्रामक विज्ञापनों के लिए कार्रवाई की है, क्योंकि वे बिना सबूत के डिमेंशिया जैसी बीमारियों को रोकने का संकेत दे रहे थे।

स्मार्टवॉच और वियरेबल्स का रोल

स्मार्टवॉच में मिलने वाला 'स्लीप स्कोर' एक अनुमान होता है। यह उपयोगी जरूर है अगर यह आपको बेहतर नींद लेने के लिए प्रेरित करे, लेकिन इसे अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। वियरेबल तकनीक अभी भी शुरुआती दौर में है और बहुत परिपक्व नहीं है।

निष्कर्ष

ट्रेंडकिया का सुझाव है कि किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले खुद वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं। यह देखें कि उत्पाद क्या माप रहा है, शोध किस समूह पर हुआ है और क्या वह अध्ययन स्वतंत्र था या कंपनी द्वारा प्रायोजित। हकीकत यह है कि नियमित व्यायाम, अच्छी नींद, तनाव प्रबंधन और संतुलित आहार का दिमागी सेहत पर सबसे गहरा असर पड़ता है, जिसके लिए किसी विज्ञापन की जरूरत नहीं होती।

सवाल-जवाब

'ब्रेन हेल्थ' का सबसे सटीक अर्थ क्या है?
ब्रेन हेल्थ की कोई एक परिभाषा नहीं है। इसमें कॉग्निटिव परफॉरमेंस, नींद की गुणवत्ता, तनाव सहने की क्षमता और न्यूरोलॉजिकल फंक्शन जैसी कई चीजें शामिल होती हैं।
क्या ल्यूमिनोसिटी (Lumosity) जैसे ऐप्स वाकई काम करते हैं?
इन ऐप्स से ऐप के अंदर की विशिष्ट टास्क में सुधार हो सकता है, लेकिन वास्तविक जीवन में दिमागी प्रदर्शन या डिमेंशिया से बचाव के दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड के बारे में विज्ञान क्या कहता है?
ओमेगा-3 का सेवन याददाश्त और सीखने की क्षमता में मदद कर सकता है, लेकिन यह प्रभाव मुख्य रूप से वृद्ध लोगों में देखा गया है और पिल के रूप में इसके परिणामों को लेकर संदेह है।
क्या स्मार्टवॉच का स्लीप स्कोर सटीक होता है?
नहीं, स्मार्टवॉच द्वारा दिया गया स्लीप स्कोर एक अनुमान मात्र है। हर कंपनी का अपना ग्रेडिंग सिस्टम होता है, जिसे वैज्ञानिक रूप से अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
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