गुजरात के अहमदाबाद शहर से वैवाहिक रिश्ते में विश्वासघात और वित्तीय धोखाधड़ी की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। इसनपुर क्षेत्र के एक परिवार ने अपनी पुत्रवधू पर विदेश में नौकरी और निवेश के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप लगाया है। बेटे और बहू के सुनहरे भविष्य की खातिर पिता ने अपना मकान तक बैंक में गिरवी रख दिया था। सेवानिवृत्ति के लिए संजोई गई जमापूंजी भी दांव पर लगा दी गई थी। अब पूरी रकम गंवाने के बाद पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंचा है। पुलिस ने आरोपी महिला और उसके एक साथी के विरुद्ध धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
प्रेम विवाह से शुरू हुआ था रिश्ता
पीड़ित परिवार के अनुसार, ध्रुवित पारेख का विवाह मई 2023 में पायल नाम की युवती के साथ संपन्न हुआ था। दोनों पूर्व से एक-दूसरे से भलीभांति परिचित थे और दोनों के परिजनों की पूर्ण सहमति के उपरांत यह प्रेम विवाह कराया गया था। शादी के बाद पायल अपने पति ध्रुवित और ससुराल के अन्य सदस्यों के साथ संयुक्त परिवार में रहने लगी। वह एक निजी बैंक में कार्यरत थी, जिसके कारण परिवार को उसकी वित्तीय समझ और पेशेवर आचरण पर पूरा भरोसा था। शादी के शुरुआती महीने सामान्य रूप से बीते, जिससे ससुराल वालों के मन में किसी प्रकार का संदेह पैदा नहीं हुआ।
लंदन में नौकरी का झांसा और कर्ज का जाल
विवाह के लगभग नौ महीने बाद, फरवरी 2024 में घटनाक्रम में एक नया मोड़ आया। पायल ने ससुराल के सदस्यों को जानकारी दी कि उसे यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में एक प्रतिष्ठित नौकरी का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। उसने पूरे परिवार को यह विश्वास दिलाया कि यदि वह पहले वहां जाकर स्थापित हो जाएगी, तो कुछ ही समय पश्चात ध्रुवित भी वीजा प्राप्त कर उसके पास लंदन जा सकेगा। इस योजना से पूरे परिवार को अपने बच्चों का भविष्य संवरता हुआ नजर आया।
विदेश प्रवास और वीजा प्रक्रिया के औपचारिक खर्चों का हवाला देते हुए पायल ने ससुराल पक्ष को बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 25 लाख रुपये की कुल लागत आएगी। अपने बेटे और बहू के करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की चाह में ध्रुवित के पिता ने भारी वित्तीय जोखिम उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने आवासीय मकान को बंधक रखकर बैंक से 16.80 लाख रुपये का होम लोन स्वीकृत कराया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अपने जनरल प्रोविडेंट फंड यानी GPF खाते से 7 लाख रुपये की अग्रिम निकासी भी कर ली। इस प्रकार कुल 23.80 लाख रुपये की धनराशि का प्रबंध किया गया, जिसे ध्रुवित के माता-पिता के संयुक्त बैंक खाते में सुरक्षित रखा गया था।
वीजा में रुकावट और एफडी के नाम पर ट्रांसफर
प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में पायल को कागजी कार्रवाई शुरू करने के लिए 1.50 लाख रुपये नकद सौंपे गए थे। कुछ सप्ताह बीत जाने के बाद पायल ने परिवार को सूचित किया कि तकनीकी कारणों से लंदन का वीजा स्वीकृत नहीं हो पा रहा है और आवेदन प्रक्रिया अधर में लटक गई है। ससुराल वाले जब इस योजना को लेकर चिंतित हुए, तो पायल ने एकत्रित धन के सुरक्षित निवेश का एक नया सुझाव सामने रखा।
पायल ने दावा किया कि बैंकिंग क्षेत्र में ही कार्यरत उसका एक करीबी परिचित सम्मान सिंह भदौरिया भारी ब्याज दर पर फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD करवाने में सहायता कर सकता है। उसने ससुराल वालों को समझाया कि जब तक वीजा की अड़चनें दूर नहीं हो जातीं, तब तक इस रकम को एफडी में डालकर अच्छा ब्याज कमाया जा सकता है। परिवार उसकी बातों में आ गया। अलग-अलग किस्तों में सम्मान सिंह से संबंधित बैंक खाते में लगभग 13.09 लाख रुपये अंतरित कर दिए गए। इसके पश्चात पायल के विशेष अनुरोध पर ध्रुवित ने भी अपने खाते से 2.50 लाख रुपये अतिरिक्त ट्रांसफर कर दिए। इस प्रकार कुल मिलाकर 15.59 लाख रुपये की बड़ी रकम उस तीसरे व्यक्ति के खाते में पहुंचा दी गई।
संदेह का दायरा और अचानक पलायन
महीनों बीत जाने के बावजूद जब निवेश से जुड़े दस्तावेज या एफडी की रसीदें परिजनों को नहीं सौंपी गईं, तो उन्होंने अपनी रकम वापस मांगने का दबाव बनाया। पायल टालमटोल की रणनीति अपनाती रही। उसने अपने ससुर को एक सुरक्षा चेक तो सौंपा, लेकिन साथ ही सख्त हिदायत दी कि उसकी स्पष्ट अनुमति के बिना इस चेक को बैंक शाखा में प्रस्तुत न किया जाए। इसी दौरान खुद पायल के सगे भाई ने ध्रुवित से संपर्क किया और अपनी बहन के संदिग्ध आचरण को लेकर आगाह किया। उसने ध्रुवित को सचेत करते हुए तुरंत पैसों का वास्तविक हिसाब मांगने की सलाह दी।
परिवार के कड़े रुख को देखते हुए पायल ने एक महीने के भीतर सम्मान सिंह से समूची धनराशि वापस दिलवाने का औपचारिक आश्वासन दिया। किंतु तय समय बीत जाने पर भी एक भी रुपया नहीं लौटाया गया। इसके बाद सितंबर माह में पायल सामान्य दिनों की भांति कार्यालय जाने की बात कहकर घर से निकली। शाम तक जब वह घर वापस नहीं पहुंची, तो ध्रुवित ने उसके बैंक दफ्तर जाकर पूछताछ की। वहां कर्मचारियों ने खुलासा किया कि पायल सुबह दफ्तर तो आई थी, लेकिन थोड़ी ही देर बाद निजी काम का कहकर वहां से चली गई थी। इसके तुरंत बाद उसका मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आने लगा। घबराए परिजनों ने जब सम्मान सिंह से फोन पर संपर्क साधने का प्रयास किया, तो उसका फोन भी बंद मिला।
पुलिस में प्राथमिकी और कानूनी कार्रवाई
पायल और उसके सहयोगी के पूरी तरह भूमिगत हो जाने और संपर्क के सारे रास्ते बंद होने के बाद ध्रुवित ने पुलिस से संपर्क किया। इसनपुर पुलिस थाने में ध्रुवित की औपचारिक तहरीर के आधार पर पायल और सम्मान सिंह भदौरिया के विरुद्ध अमानत में खयानत और धोखाधड़ी की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों के बैंक खातों का ब्योरा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन के सभी साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच दल दोनों फरार अभियुक्तों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रहा है।





















