राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल फरीदाबाद के भीतर अपना मकान बनाना अब आम खरीदारों के लिए आसान नहीं रह गया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में जमीनों और मकानों की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं। जिन क्षेत्रों में कुछ समय पहले तक सामान्य बजट में प्लॉट उपलब्ध हो जाते थे, वहां अब खरीदारों को अपनी जेब अधिक ढीली करनी पड़ रही है। बुनियादी ढांचे का विकास, नए निर्माण कार्य और नागरिक सुविधाओं के विस्तार ने शहर के कई पॉकेट में अचल संपत्ति की मांग को बढ़ा दिया है। इनमें से सेक्टर 85 एक ऐसा प्रमुख इलाका बनकर उभरा है, जहां गृह खरीदारों की हलचल सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
कनेक्टिविटी बनी प्रॉपर्टी बाजार की सबसे बड़ी ताकत
फरीदाबाद के तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी बाजार में इसकी भौगोलिक स्थिति सबसे अहम भूमिका निभा रही है। दिल्ली और नोएडा से सीधी तथा सुगम पहुंच के कारण कामकाजी पेशेवरों के लिए यह शहर पहली पसंद बनता जा रहा है। नए एक्सप्रेसवे के चालू होने और चौड़ी सड़कों के निर्माण से पड़ोसी शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया है। दिल्ली या नोएडा में नौकरी और कारोबार करने वाले लोगों के लिए रोजाना आना-जाना अब अधिक सुविधाजनक हो गया है।
रियल एस्टेट बाजार की स्थिति पर बात करते हुए संपत्ति सलाहकार विजय मलिक ने बताया, "फरीदाबाद की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है, जिससे दिल्ली और नोएडा का सफर आसान हो गया है।" इस परिवहन सुविधा के कारण उन लोगों का ध्यान फरीदाबाद की ओर अधिक आकर्षित हो रहा है जो दिल्ली एनसीआर में बेहतर आवासीय ठिकाना खोज रहे हैं।
सेक्टर 85 में खाली प्लॉटों की कमी, फ्लैट्स का बढ़ा चलन
मांग के मामले में सेक्टर 85 एक मुख्य केंद्र बनकर सामने आया है। हालांकि इस इलाके में खाली प्लॉट खरीदने का विकल्प लगभग समाप्त हो चुका है। जमीन की सीमित उपलब्धता के कारण इस सेक्टर में आवासीय इकाइयों और बहुमंजिला इमारतों का निर्माण ही मुख्य रूप से हो रहा है। खरीदार अपनी आवश्यकता और बजट के अनुसार 1बीएचके, 2बीएचके या 3बीएचके फ्लैट का चयन कर सकते हैं।
परिवार के साथ रहने की योजना बना रहे लोगों के बीच इस सेक्टर को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। यहां लगातार जारी नई आवासीय परियोजनाओं ने विभिन्न आय वर्ग के खरीदारों को आकर्षित किया है। सेक्टर में निर्मित आवासीय क्षेत्र सुव्यवस्थित हैं और यहां बुनियादी संरचना का ध्यान रखा गया है।
लक्जरी से लेकर किफायती वर्ग तक के विकल्प उपलब्ध
कीमतों के लिहाज से सेक्टर 85 में विविधता देखने को मिलती है। लगभग 250 वर्ग गज क्षेत्र में बने 3बीएचके फ्लैट की कीमत इस समय करीब 2 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गई है। यद्यपि यह राशि पहली नजर में काफी अधिक प्रतीत होती है, लेकिन बड़े आकार के प्रीमियम फ्लैट तलाशने वाले खरीदार इस बजट में निवेश करने को तैयार हैं। किसी भी फ्लैट का अंतिम मूल्य उसके कुल क्षेत्रफल, लोकेशन और बिल्डर प्रोजेक्ट की सुविधाओं पर निर्भर करता है।
उच्च आय वर्ग के अलावा मध्यम वर्ग के लिए भी इस सेक्टर में विकल्प मौजूद हैं। किफायती आवास योजना के तहत यहां 60 लाख से 65 लाख रुपये के बजट में भी फ्लैट मिल जाते हैं। जो खरीदार करोड़ों रुपये खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं, उनके लिए यह श्रेणी एक व्यावहारिक समाधान प्रदान करती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी परियोजना में निर्णय लेने से पहले फ्लैट के कवर्ड एरिया, फ्लोर, प्रोजेक्ट के स्वीकृत नक्शे और दी जा रही सुविधाओं का पूरी तरह से भौतिक सत्यापन कर लेना चाहिए।
स्वास्थ्य, शिक्षा और मेट्रो की नजदीकी से बढ़ी अहमियत
आवासीय प्राथमिकताओं में केवल मकान की कीमत ही एकमात्र कारक नहीं होती, बल्कि आसपास की सुविधाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सेक्टर 85 के निवासियों के लिए अमृता हॉस्पिटल का निकट होना एक बड़ा फायदा है। आपातकालीन चिकित्सा जरूरतों के लिए यह आधुनिक अस्पताल बेहद कम दूरी पर स्थित है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों वाले परिवारों को काफी राहत मिलती है।
सार्वजनिक परिवहन की बात करें तो इस सेक्टर से बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन की दूरी लगभग 7 से 8 किलोमीटर है। मेट्रो नेटवर्क से जुड़ाव के कारण दिल्ली और बल्लभगढ़ के अन्य हिस्सों तक पहुंचना आसान रहता है। इसके अलावा दैनिक जरूरतों के सामान के लिए स्थानीय बाजार और बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रतिष्ठित स्कूल आसपास के क्षेत्र में ही उपलब्ध हैं। बुनियादी ढांचे के निरंतर विस्तार को देखते हुए आने वाले समय में इस इलाके के आवासीय मूल्य में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।





















