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करनाल में सफाई कर्मचारियों का अनोखा विरोध, सामूहिक रूप से मुंडवाए सिरहरियाणा
4 सित॰ 2026, 3:20 pm (19 मिनट पहले)· 3

करनाल में सफाई कर्मचारियों का अनोखा विरोध, सामूहिक रूप से मुंडवाए सिर

हरियाणा के करनाल जिले में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल 30वें दिन भी जारी रही। सरकार की चेतावनी के बावजूद कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से सिर मुंडवाकर अनोखा विरोध जताया और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।

हरियाणा के करनाल जिले में सफाई और अग्निशमन कर्मियों का चल रहा विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को अपने तीसवें दिन में प्रवेश कर गया, जहां आंदोलनकारियों ने अपने गुस्से को जाहिर करने का एक बिल्कुल नया और अनूठा तरीका अपनाया। नगर निगम कार्यालय के बाहर लगातार धरने पर डटे इन कर्मियों ने सरकार के खिलाफ अपना कड़ा रोष जताते हुए सामूहिक रूप से अपने सिर मुंडवाए। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान करीब दस कर्मचारियों ने अपने बाल मुंडवाए और सरकार को यह साफ संदेश देने की कोशिश की कि वे अपनी जायज मांगों की अनदेखी को अब और सहन नहीं करेंगे। इस अनूठे प्रदर्शन के बाद कर्मचारी नेताओं ने पूरे प्रदेशभर में इस दिन को मुंडन दिवस के रूप में मनाने का बड़ा ऐलान किया। धरना स्थल का माहौल पूरी तरह सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा और प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि वे इस बार अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

समझौते के बावजूद मांगों पर अमल न होने का गंभीर आरोप

सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा इकाई के प्रधान राजकुमार ने सरकार पर गंभीर वादाखिलाफी का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पिछली 13 मई को प्रशासन और कर्मचारियों के बीच एक औपचारिक समझौता हुआ था। उस समय सरकार ने उनकी मांगों को पूरी तरह जायज ठहराते हुए इस मसले के समाधान के वास्ते तीस दिन का समय मांगा था। आंदोलनरत कर्मचारियों को पूरी उम्मीद थी कि इस तयशुदा अवधि के भीतर उनकी मांगों को लेकर कोई ठोस और सकारात्मक फैसला ले लिया जाएगा, लेकिन उनका आरोप है कि शासन या प्रशासन ने इस दिशा में कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाया। राजकुमार ने तीखे शब्दों में कहा कि सरकार की नीयत और उसकी नीतियां दोनों ही पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और वह कर्मचारियों को नियमित करने जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिल्कुल भी गंभीर नजर नहीं आ रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक प्रदेश के मुख्यमंत्री स्तर से उनकी मांगों के समर्थन में कोई भी लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका यह धरना और हड़ताल अनिश्चितकाल तक यूं ही जारी रहेगी।

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कचरे के बड़े ढेर और शहर में गंभीर बीमारी फैलने का खतरा

लगभग एक महीने से लगातार चल रही इस लंबी हड़ताल के कारण करनाल शहर की पूरी सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और जगह-जगह कचरे के अंबार लग गए हैं। शहर के मुख्य बाजारों, व्यस्त सड़कों और तमाम आवासीय बस्तियों में कचरा जमा होने की वजह से आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि हाल ही में हुई बारिश के बाद सड़कों पर जमा हुआ कचरा और पॉलिथीन बहकर नालियों तथा सीवरों में जा फंसे हैं, जिससे हालात पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गए हैं। उनका दावा है कि इस जलभराव और गंदगी के चलते शहर में जलजनित संक्रमण और खतरनाक बीमारियां फैलने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। कर्मचारियों ने प्रशासन से अपील की है कि वे इस विकट स्थिति का जल्द से जल्द कोई स्थायी समाधान निकालें ताकि शहर की व्यवस्था को फिर से सामान्य बनाया जा सके।

कड़ी चेतावनी को ठुकराते हुए आंदोलन को और तेज करने का संकल्प

दूसरी तरफ, सरकार की ओर से हड़ताली कर्मचारियों को आगामी 5 सितंबर तक अनिवार्य रूप से काम पर लौटने की सख्त चेतावनी दिए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपने कदम पीछे खींचने से साफ इंकार कर दिया है। अग्निशमन विभाग के जिला प्रधान संदीप त्यागी ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि तमाम कर्मचारी किसी भी तरह के निलंबन या फिर विभागीय कार्रवाई की धमकियों से बिल्कुल भी डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार के पास कर्मचारियों की सभी मांगों को स्वीकार करने का सीधा रास्ता खुला हुआ है। यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन और अधिक लंबा खींचेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस हड़ताल के कारण शहर में जो अव्यवस्था पैदा हुई है, उसका समाधान तलाशने की पूरी जिम्मेदारी भी आखिरकार सरकार की ही है।

मुख्यमंत्री स्तर से लिखित आदेश मिलने तक पीछे न हटने का दृढ़ संकल्प

करनाल में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों का यह पूरा विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद निर्णायक मोड़ पर आ पहुंचा है। एक तरफ जहां सरकार ने इस मामले में अपना सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी भी किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार दिखाई नहीं दे रहे हैं। अपने सिर मुंडवाने जैसी अनूठी पहल के जरिए कर्मचारियों ने सरकार पर अपना मानसिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने का पूरा प्रयास किया है। कर्मचारियों का यह रुख बिल्कुल अटल है कि जब तक उनकी मांगों के पक्ष में सूबे के मुखिया यानी मुख्यमंत्री स्तर से कोई लिखित आदेश बाहर नहीं आता, तब तक उनका यह धरना और हड़ताल यूं ही लगातार चलती रहेगी। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पिछले तीस दिनों से लगातार चले आ रहे इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार और कर्मचारी संगठन मिलकर आखिर क्या नया रास्ता निकालते हैं।

सवाल-जवाब

करनाल में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन कितने दिनों से चल रहा है?
करनाल में सफाई और अग्निशमन कर्मचारियों का यह आंदोलन 30वें दिन भी जारी रहा।
कर्मचारियों ने विरोध जताने के लिए क्या नया तरीका अपनाया?
कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ अपना रोष जताने के लिए सामूहिक रूप से अपने सिर मुंडवाए।
सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा इकाई के प्रधान कौन हैं?
सफाई कर्मचारी संघ हरियाणा इकाई के प्रधान राजकुमार हैं।
सरकार और कर्मचारियों के बीच पिछला समझौता कब हुआ था?
सरकार और कर्मचारियों के बीच 13 मई को समझौता हुआ था जिसमें 30 दिन का समय लिया गया था।
कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए सरकार ने क्या अल्टीमेटम दिया था?
सरकार ने हड़ताली कर्मचारियों को 5 सितंबर तक काम पर लौटने की चेतावनी दी थी।
अग्निशमन विभाग के जिला प्रधान कौन हैं?
अग्निशमन विभाग के जिला प्रधान संदीप त्यागी हैं।
कर्मचारियों की मुख्य मांग क्या है?
कर्मचारी मुख्यमंत्री स्तर से अपनी मांगों को लेकर लिखित आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·2 मिनट पहले

हरियाणा के करनाल में सफाई कर्मियों की यह हड़ताल अब सिर्फ स्थानीय निकाय का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह शासन और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। 30 दिनों से ठप पड़ी सफाई व्यवस्था और बारिश के बीच कचरे के ढेरों से शहर में स्वास्थ्य आपातकाल का स्पष्ट खतरा मंडराने लगा है। मई में हुए समझौते के बाद भी तीस दिन की समयसीमा बीत जाने पर लिखित आदेश न आना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। यदि मुख्यमंत्री स्तर से जल्द कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह आंदोलन पूरे राज्य के शहरी स्थानीय निकायों के लिए एक व्यापक राजनीतिक संकट का रूप ले सकता है, जिससे निपटने के लिए सरकार को तत्काल नीतिगत कदम उठाने होंगे।

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