राजस्थान के भरतपुर जिले में क्रशर प्लांट के विवाद के बीच अपनी जान गंवाने वाले पूर्व विधायक और भाजपा नेता अतर सिंह भड़ाना का सोमवार शाम को उनके पैतृक गांव पाली में अंतिम संस्कार कर दिया गया। शाम करीब 5 बजे हुए इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोगों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और नेता शामिल हुए। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने भी पाली पहुंचकर दिवंगत नेता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को ढांढस बंधाया।
केंद्रीय मंत्री और परिजनों की मौजूदगी
अंतिम संस्कार के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अतर सिंह भड़ाना के अचानक चले जाने से न केवल उनके समाज को बल्कि पूरे क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वीभत्स घटनाक्रम में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, कानून उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, पिता के निधन की दुखद सूचना मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में तैनात महिला डीसी किरण भड़ाना सोमवार सुबह ही फरीदाबाद के लिए रवाना हो गईं। उनका पूरा परिवार फरीदाबाद में ही रहता है। पिता के चले जाने से दुखी किरण भड़ाना इस कठिन समय में अपनी बहन को संभालती हुई नजर आईं, जिससे वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
घटना का पूरा घटनाक्रम और हमला
यह पूरी घटना रविवार शाम की है जब राजस्थान के भरतपुर जिले के भौंड़ा गांव में बने क्रेशर प्लांट पर अतर सिंह भड़ाना पर अचानक हमला बोल दिया गया। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, इस हमले में करीब 70 से 80 लोगों की भीड़ ने लाठी-डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया, जिससे अतर सिंह भड़ाना और उनके सहयोगी गगन शर्मा बुरी तरह घायल हो गए। आनन-फानन में दोनों घायलों को पहले वैर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत जयपुर के एसएमएस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। जयपुर पहुंचते ही इलाज के दौरान रात करीब 11:30 बजे अतर सिंह भड़ाना ने दम तोड़ दिया।
चार साल पुराना जमीन और रास्ता विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस क्रेशर प्लांट को लेकर पिछले लगभग चार साल से स्थानीय ग्रामीणों और प्लांट संचालक पक्ष के बीच लगातार रंजिश और विवाद चल रहा था। ग्रामीणों का यह मुख्य आरोप था कि इस प्लांट द्वारा चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, अवैध खनन हो रहा है और रास्ते को लेकर लगातार समस्याएं पैदा की जा रही हैं। इसके अलावा, मृतक अतर सिंह भड़ाना की पत्नी कमलेश ने पहले ही प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि इस पूरे विवाद और खतरे के संबंध में पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार लिखित सूचना दी गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासनिक लापरवाही और अदालती आदेश
खनन विभाग की सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, असामाजिक तत्वों ने सोची-समझी साजिश के तहत दिसंबर 2024 में भड़ाना की खदान के मुख्य रास्ते को खोदकर पूरी तरह बंद कर दिया था। हैरानी की बात यह है कि राजस्थान हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन इस खदान के रास्ते को समय पर खुलवाने में पूरी तरह नाकाम साबित रहा। अदालत के निर्देश के बाद जिला कलेक्टर ने एक विशेष कमेटी का गठन किया, जिसने 30 जनवरी 2026 को चारागाह भूमि का वर्गीकरण बदलकर उसे एक सार्वजनिक रास्ता घोषित कर दिया था। इस रास्ते के बदले भड़ाना की पत्नी और खदान की मालकिन कमलेश ने ग्राम सीता में अपनी 5250 वर्ग मीटर निजी जमीन चारागाह के विकास के लिए सरकार को सौंप दी। इसके बाद 4 मार्च को जिला कलेक्टर ने तहसीलदार वैर को इस आदेश की पालना कराने के सख्त निर्देश जारी किए, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई और अंततः भड़ाना पर यह जानलेवा हमला हो गया। यहां तक कि खुफिया विभाग यानी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में भी पहले ही यह अंदेशा जताया जा चुका था कि इस रास्ते के विवाद के चलते इलाके की कानून व्यवस्था गंभीर रूप से बिगड़ सकती है।
पुलिस जांच और तैनाती
इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही पूरे इलाके और गांव में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। इस मामले में दोनों ही पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर हमले और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे मामले में फायरिंग के आरोपों समेत सभी पहलुओं की गहराई से जांच-पड़ताल कर रही है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
मूल रूप से फरीदाबाद के पाली गांव के रहने वाले अतर सिंह भड़ाना ने राजनीति में कदम रखते हुए भरतपुर के बयाना विधानसभा क्षेत्र से विधायक का पद संभाला था। उनके परिवार में उनके चार बच्चे हैं, जिनमें तीन बेटियां और एक बेटा शामिल हैं। उनके बच्चों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है, जिनमें दो बेटियां डॉक्टर हैं, तीसरी बेटी किरण भड़ाना आईएएस अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं, और उनका बेटा देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में वकालत करता है।


















