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लगातार छह बार असफलता का सामना करने के बाद अंबाला के राहुल ऐसे बने लेफ्टिनेंटहरियाणा
10 सित॰ 2026, 4:20 pm (55 मिनट पहले)· 2

लगातार छह बार असफलता का सामना करने के बाद अंबाला के राहुल ऐसे बने लेफ्टिनेंट

अंबाला के रहने वाले राहुल धाकड़ ने सातवें प्रयास में एसएसबी परीक्षा पास कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया है। चेन्नई में एक साल का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब वह अपने घर लौटे, तो क्षेत्रवासियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया।

अंबाला शहर के राहुल धाकड़ ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति के इरादे मजबूत हों और लक्ष्य को पाने की जिद हो, तो रास्ते की हर बाधा दूर हो जाती है। बचपन से ही भारतीय सेना का हिस्सा बनकर देश सेवा का संकल्प लेने वाले राहुल ने कई बार नाकामी मिलने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और लगातार कोशिश करते रहे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और सातवें प्रयास में उन्होंने एसएसबी परीक्षा में सफलता हासिल कर लेफ्टिनेंट का पद प्राप्त किया।

चेन्नई में प्रशिक्षण के बाद घर वापसी

चेन्नई स्थित अकादमी में एक साल का कड़ा प्रशिक्षण पूरा करने के बाद राहुल जब पहली बार अपने पैतृक निवास अंबाला पहुंचे, तो परिजनों और पड़ोसियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। घर से एक साल तक दूर रहने के बाद जब वह वापस लौटे, तो पूरे मोहल्ले ने ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की मालाओं के साथ उनका ऐतिहासिक स्वागत किया। इस दौरान राहुल के चेहरे पर अपनी मंजिल को पाने की संतुष्टि साफ झलक रही थी, वहीं उनके माता-पिता की आंखें बेटे की इस बड़ी कामयाबी पर गर्व से नम हो गईं।

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असफलताओं से सीखकर तय किया सफर

राहुल की यह सफलता की कहानी इसलिए भी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्हें एक या दो बार नहीं बल्कि छह बार लगातार असफलताओं का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि, हर असफलता के बाद उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया और दोगुनी ऊर्जा के साथ अपनी पढ़ाई व तैयारी को आगे बढ़ाया। दिल्ली से बीकॉम की डिग्री हासिल करने के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की राह पकड़ ली थी और अपनी मंजिल पाने तक प्रयास जारी रखे।

परिवार में जश्न का माहौल

राहुल के पिता पंकज ने बताया कि वे वर्तमान में अपना छोटा सा व्यवसाय चलाते हैं, जबकि पहले नौकरी करते थे। उन्होंने गर्व से साझा किया कि जब राहुल महज दसवीं कक्षा में था, तभी से उसने सेना में जाकर देश सेवा करने की इच्छा जता दी थी। पिता ने क्षेत्र के युवाओं से अपील की है कि राहुल के संघर्ष से सीख लेनी चाहिए कि राह में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, लेकिन व्यक्ति का हौसला कभी डगमगाना नहीं चाहिए। आज राहुल की इस उपलब्धि से पूरा अंबाला गौरवान्वित महसूस कर रहा है और हर तरफ उनकी सफलता की चर्चा हो रही है।

सवाल-जवाब

राहुल धाकड़ मूल रूप से किस स्थान के रहने वाले हैं?
राहुल धाकड़ हरियाणा के अंबाला शहर के रहने वाले हैं।
राहुल ने भारतीय सेना में कौन सा पद हासिल किया है?
उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है।
लेफ्टिनेंट बनने के लिए राहुल को कितने प्रयास करने पड़े?
राहुल को एसएसबी परीक्षा पास करने और लेफ्टिनेंट बनने के लिए कुल सात प्रयास करने पड़े।
राहुल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई कहां से पूरी की थी?
उन्होंने दिल्ली से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की थी।
राहुल ने अपनी सैन्य ट्रेनिंग कहां पूरी की है?
उन्होंने चेन्नई स्थित अकादमी में एक साल की ट्रेनिंग पूरी की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·40 मिनट पहले

अंबाला के राहुल धाकड़ का सातवें प्रयास में लेफ्टिनेंट बनना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि लगातार असफलताएं भी दृढ़ संकल्प को नहीं डिगा सकतीं। छह बार की असफलताओं के बाद अपनी कमजोरियों का विश्लेषण कर रणनीति बदलना ही इस सफलता की असली कुंजी रही। इस तरह की प्रेरणादायक यात्राएं युवाओं को असफलता से घबराने के बजाय अपनी तैयारी में निरंतरता बनाए रखने का बड़ा संदेश देती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·39 मिनट पहले

राहुल की यह सफलता ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के युवा सैन्य सेवाओं में करियर को लेकर खासे गंभीर हैं। छह असफलताओं के बाद भी अपनी रणनीति में सुधार करना यह सिखाता है कि केवल मेहनत नहीं, बल्कि आत्म-विश्लेषण और दिशा में बदलाव भी सफलता की अनिवार्य शर्त है। यह कहानी उन अनगिनत युवाओं के लिए एक व्यावहारिक ब्लूप्रिंट है जो बार-बार की नाकामी से हताश होकर मैदान छोड़ देते हैं।

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