फरीदाबाद में किराए के मकानों में रहने वाले परिवारों और मकान मालिकों के बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो जाता है। कभी यह विवाद मासिक किराए में अचानक वृद्धि को लेकर होता है, तो कभी समय से पहले घर खाली कराने या एडवांस सिक्योरिटी मनी लौटाने पर बात उलझ जाती है। कई मामलों में तो किराएदार बिना सूचना दिए ही अपना सामान छोड़कर गायब हो जाते हैं। ऐसे तमाम उलझे हुए मामलों से निपटने के लिए दोनों पक्षों को कानूनी नियमों की पूरी समझ होनी बेहद आवश्यक है। क्या कोई मकान मालिक अपने किराएदार को रातोंरात घर से बाहर निकाल सकता है, किराया बढ़ाने के तय कायदे क्या हैं और यदि एडवांस पैसे वापस न मिलें तो क्या कदम उठाया जा सकता है, इन सभी बिंदुओं पर एडवोकेट वंदना सिंह ने महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी साझा की है।
स्थानीय बातचीत के दौरान एडवोकेट वंदना सिंह ने यह स्पष्ट किया कि फरीदाबाद जैसे शहर में रोजगार और शिक्षा के सिलसिले में भारी संख्या में लोग किराए के आशियानों में अपना जीवन बिताते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि मकान मालिक और किराएदार दोनों ही अपने कर्तव्यों और कानूनी अधिकारों से भली-भांति परिचित हों। कोई भी मकान मालिक कानूनन किसी भी किराएदार को अचानक और बिना किसी पूर्व प्रक्रिया के जबरन घर से बाहर नहीं फेंक सकता है। इस पूरी कार्रवाई के लिए एक निश्चित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसके तहत सबसे पहले कानूनी नोटिस जारी किया जाता है और उसके बाद ही आगे के कदम उठाए जाते हैं। आपसी मनमुटाव और कानूनी झंझटों से बचने का सबसे बेहतरीन उपाय यह है कि शुरुआत में ही एक पुख्ता रेंट एग्रीमेंट तैयार करवा लिया जाए।
रेंट एग्रीमेंट से जुड़े जरूरी प्रावधान
एडवोकेट वंदना सिंह का कहना है कि रेंट एग्रीमेंट के भीतर किराए से जुड़ी सभी शर्तों का उल्लेख बेहद स्पष्ट शब्दों में होना चाहिए। आमतौर पर यह अनुबंध पत्र ग्यारह महीने की अवधि के लिए बनाया जाता है। इसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि कमरे का मासिक किराया कितना तय हुआ है, कितने अंतराल के बाद किराया बढ़ाया जाएगा और उसकी प्रतिशत दर क्या होगी। इसके साथ ही किराएदार के जरूरी कानूनी दस्तावेज और आधिकारिक पहचान पत्र भी मकान मालिक को अपने पास सुरक्षित रख लेने चाहिए। यदि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न होता है, तो ये दस्तावेज दोनों पक्षों के पास मजबूत सबूत के तौर पर काम आते हैं और मामले को सुलझाने में मदद करते हैं।
किराए में मनमाने ढंग से वृद्धि करने के मुद्दे पर एडवोकेट वंदना सिंह बताती हैं कि बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के अचानक किराया बढ़ा देना बिल्कुल सही नहीं है। एक रेंट एग्रीमेंट पूरी तरह से कानूनी दस्तावेज होता है और उसमें लिखी गई हर एक शर्त का पालन करना दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी होता है। यदि समझौते के पत्र में पहले से ही किराया बढ़ाने का प्रतिशत तय किया जा चुका है, तो उसी तय फार्मूले के आधार पर ही बढ़ोतरी की जा सकती है। बिना किसी पूर्व निर्धारित शर्त के अचानक की गई वृद्धि कानूनी विवाद को जन्म देती है, इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले समझौते की शर्तों को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए।
यदि कोई किराएदार बिना किसी पूर्व सूचना के अपना सारा सामान घर में ही छोड़ देता है और लंबे समय तक उससे कोई संपर्क नहीं हो पाता है, तो मकान मालिक को कानून का सहारा लेना चाहिए। ऐसे संवेदनशील मामलों में मकान मालिक को सीधे तौर पर किराएदार का सामान बाहर फेंकने के बजाय सबसे पहले उसे औपचारिक नोटिस भेजना चाहिए। नोटिस भेजने के बाद भी यदि दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो मकान मालिक अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होता है। इस प्रकार की परिस्थितियों में सिविल कोर्ट के माध्यम से ही कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई पूरी की जाती है, क्योंकि बिना विधिक प्रक्रिया के किसी का सामान हटाना भविष्य में बड़ी मुसीबत बन सकता है।
सिक्योरिटी मनी वापसी और पुलिस वेरिफिकेशन
सुरक्षा निधि यानी सिक्योरिटी मनी वापस न मिलने की स्थिति में किराएदार के पास कानूनी विकल्प खुले रहते हैं। एडवोकेट वंदना सिंह के अनुसार, इस समस्या के समाधान के लिए सिविल कोर्ट में रिकवरी का मुकदमा दायर किया जा सकता है। अदालत की ओर से इस प्रक्रिया में संबंधित पक्ष को औपचारिक नोटिस भेजा जाता है और नियमानुसार सुनवाई पूरी की जाती है। यही कारण है कि पैसों के लेन-देन और सिक्योरिटी मनी से जुड़े विवादों से बचने के लिए रेंट एग्रीमेंट और अन्य सभी जरूरी कागजातों को हमेशा सुरक्षित संभालकर रखना चाहिए।
मकान मालिक के लिए बिना पुलिस सत्यापन के किसी भी नए व्यक्ति को किराए पर रखना एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। फरीदाबाद में देश के विभिन्न राज्यों से छात्र और नौकरीपेशा लोग आकर किराए के कमरों में निवास करते हैं। ऐसी स्थिति में मकान मालिक का यह दायित्व बनता है कि वह किराएदार की पहचान और दस्तावेजों की जांच करने के साथ-साथ नजदीकी थाने में उसका पुलिस वेरिफिकेशन भी अवश्य करवाए। अलफलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक मामले का हवाला देते हुए पुलिस सत्यापन की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया गया है। यदि मकान मालिक शुरुआत से ही सभी कागजी कार्रवाई और पुलिस वेरिफिकेशन का काम पूरा करके रखता है, तो भविष्य में आने वाली तमाम गंभीर परेशानियों से आसानी से बचा जा सकता है।



















