सोनीपत के प्रसिद्ध खानपान केंद्र मुरथल में खुले में कचरा फेंकने और गंदा पानी बहाने वाले ढाबों व होटलों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की अनदेखी करने वाले लगभग 100 निजी और सरकारी प्रतिष्ठानों को चिह्नित कर नोटिस थमाए हैं। नियमों का उल्लंघन जारी रखने वाले संचालकों पर भारी जुर्माना लगाने की भी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी की क्षमता बढ़ाने की परियोजना पर काम शुरू किया गया है, ताकि नेशनल हाईवे 44 पर गंदे पानी के ठहराव से निजात मिल सके।
मुरथल के प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे पर सख्ती
अपने पराठों के लिए मशहूर मुरथल के ढाबों और होटलों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, जिसके कारण यहां भारी मात्रा में ठोस कचरा और अपशिष्ट जल उत्पन्न होता है। कई संचालक इस कचरे को खुले में डाल देते हैं या बिना शोधन के गंदा पानी बाहर बहा देते हैं। इससे आसपास के वातावरण में गंदगी फैलती है और स्थानीय स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती है। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर निगरानी कर 100 ऐसे होटल और ढाबों की सूची तैयार की है, जहां से सबसे ज्यादा वेस्टेज बाहर निकल रहा है। इन सभी संचालकों को निर्धारित नियमों के पालन के लिए चेतावनी भरे नोटिस जारी किए गए हैं।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के तहत जुर्माना लगाने की तैयारी
सोनीपत नगर निगम के कमिश्नर हर्षित कुमार के अनुसार, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के प्रावधानों के अंतर्गत यह कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिन्हित प्रतिष्ठानों को कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था करनी होगी। यदि कोई संचालक खुले में कचरा डालता है या गंदा पानी सड़क और नालियों में छोड़ता पाया गया, तो उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करते हुए जुर्माना ठोका जाएगा। निगम का प्राथमिक लक्ष्य मुरथल क्षेत्र से निकलने वाले कचरे के प्रवाह को नियंत्रित करना और हाईवे के आसपास स्वच्छता के मानकों को दुरुस्त करना है।
एसटीपी की क्षमता 3 एमएलडी से बढ़कर होगी 7.5 एमएलडी
कचरा प्रबंधन के साथ-साथ मुरथल में अपशिष्ट जल शोधन ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान समय में मुरथल स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 3 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है, जो लगातार बढ़ते दबाव के सामने नाकाफी साबित हो रही है। क्षमता कम होने की वजह से कई बार गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सीधे नेशनल हाईवे 44 पर भर जाता है। नगर निगम ने अब इस प्लांट की क्षमता को बढ़ाकर 7.5 एमएलडी करने की योजना बनाई है। क्षमता में इस विस्तार से न केवल गंदे पानी का प्रभावी शोधन सुनिश्चित होगा, बल्कि जल निकासी की रुकावटें भी दूर होंगी।
हाईवे पर जलभराव रुकने से सड़क हादसों में आएगी कमी
नेशनल हाईवे 44 पर गंदे पानी का जमावड़ा वाहन चालकों के लिए लंबे समय से गंभीर खतरे का सबब बना हुआ है। सड़क पर पानी भरने से गाड़ियां फिसलने और अनियंत्रित होने के कारण पहले भी कई बार सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। एसटीपी की क्षमता ढाई गुना से अधिक होने पर सड़क पर पानी भरने की नौबत नहीं आएगी। इससे मार्ग से गुजरने वाले दैनिक यात्रियों और पर्यटकों को सुगम सफर मिलेगा तथा जलभराव के चलते होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम में भारी कमी आएगी।
























