अक्सर लोग हाथ और पैरों में महसूस होने वाली झुनझुनाहट, सुन्नपन या हल्की जलन को थकान समझकर टाल देते हैं। हालांकि, इस तरह के शारीरिक संकेत किसी गहरी स्वास्थ्य समस्या की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव अथवा अनियंत्रित ब्लड शुगर इस प्रकार की संवेदी परेशानियों के मुख्य कारणों में शामिल हैं। यदि प्रारंभिक स्तर पर ही चिकित्सीय परामर्श लेकर इसकी असली वजह की पहचान न की जाए, तो शरीर का तंत्रिका तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से लंबे समय तक रक्त में शर्करा का उच्च स्तर बना रहना नसों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे दैनिक गतिविधियों में गंभीर बाधा आ सकती है।
झुनझुनाहट और सुन्नपन के मुख्य चिकित्सीय कारण
शरीर के छोरों यानी हाथ और पैरों में असामान्य संवेदना उत्पन्न होने के पीछे कई प्रमुख चिकित्सीय परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज विभाग के प्रोफेसर डॉ. निशांत रायजादा के अनुसार, इस समस्या के प्राथमिक कारणों में डायबिटीज, शरीर में विटामिन B12 की कमी और अत्यधिक शराब का सेवन शामिल हैं। विटामिन B12 हमारे तंत्रिका तंत्र के सुचारु और स्वस्थ संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। जब शरीर में इस महत्वपूर्ण विटामिन का स्तर तेजी से गिरता है, तो नसों की कार्यप्रणाली बाधित होने लगती है, जिसके परिणामस्वरूप पहले झुनझुनाहट और आगे चलकर अंग पूरी तरह सुन्न महसूस होने लगते हैं।
डायबिटीज में नसों पर दुष्प्रभाव और उसके चरण
डायबिटीज के मामलों में रक्त शर्करा का स्तर लगातार ऊंचा बने रहने से नसों को पोषण पहुंचाने वाली सूक्ष्म संरचनाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। डॉ. निशांत रायजादा स्पष्ट करते हैं कि इस समस्या की शुरुआत आमतौर पर पैरों की उंगलियों में लगातार जलन के साथ होती है। समय के साथ यह जलन ऊपर की ओर पैरों में फैलती जाती है। धीरे-धीरे प्रभावित हिस्से संवेदनहीन होने लगते हैं और सुन्नपन हावी हो जाता है। यदि स्थिति अधिक बिगड़ जाए, तो यह विकार हाथों की उंगलियों तक भी पहुंच सकता है। यदि किसी व्यक्ति को रात के समय पैरों में अधिक जलन महसूस होती है, तो उसे बिना किसी देरी के योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा, नसों की इस खराबी के कारण मांसपेशियों में अत्यधिक अकड़न भी विकसित हो सकती है।
मांसपेशियों की कमजोरी और अनजाने घावों का जोखिम
शरीर की नसें मांसपेशियों को सक्रिय और कार्यशील बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब नसों में क्षति शुरू होती है, तो मांसपेशियों का सामान्य समन्वय गड़बड़ा जाता है, जिससे उनमें कठोरता, जकड़न और गंभीर कमजोरी आ सकती है। इसके अतिरिक्त, पैरों के सुन्न हो जाने पर एक और बड़ा जोखिम उत्पन्न होता है। संवेदनशीलता समाप्त हो जाने के कारण व्यक्ति को पैरों में लगने वाली छोटी-मोटी चोट, कटने या खरोंच का तुरंत अहसास नहीं हो पाता। लंबे समय तक ध्यान न जाने पर यह छोटी सी चोट गंभीर घाव या अल्सर का रूप ले सकती है। हालांकि मालिश करने से मांसपेशियों को कुछ समय के लिए अस्थायी आराम जरूर मिल सकता है, लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है। स्थायी राहत के लिए सटीक जांच और डॉक्टरी उपचार ही अनिवार्य कदम है।
निवारण, जांच और जीवनशैली में जरूरी बदलाव
हाथ-पैरों में झुनझुनाहट की वास्तविक वजह जानने के लिए विशेषज्ञों द्वारा ब्लड शुगर और विटामिन B12 के स्तर की जांच कराने का सुझाव दिया जाता है। चिकित्सीय आवश्यकता के आधार पर अन्य संबंधित बीमारियों की जांच भी की जा सकती है। यदि यह परेशानी डायबिटीज के कारण उत्पन्न हो रही है, तो सबसे पहला कदम ब्लड शुगर को सख्ती से नियंत्रित करना होना चाहिए। वहीं विटामिन की कमी सामने आने पर डॉक्टर के परामर्श के अनुसार आवश्यक सप्लीमेंट्स अथवा उपचार दिया जाता है। अपनी दिनचर्या में हरी सब्जियां और ताजे फल शामिल करके पौष्टिक खानपान अपनाएं, प्रतिदिन नियमित व्यायाम करें, वजन को संतुलित रखें और समय-समय पर ब्लड शुगर की निगरानी करते रहें। विशेषकर 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को अपनी शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए और शराब के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए।



















