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अब गुजरात के हर बच्चे की सेहत का पूरा हिसाब एक 'हेल्थ पासपोर्ट' में, जन्म से 18 साल तक का रिकॉर्ड रहेगा साथस्वास्थ्य
2 जुल॰ 2026, 3:39 pm (45 दिन पहले)· 3

अब गुजरात के हर बच्चे की सेहत का पूरा हिसाब एक 'हेल्थ पासपोर्ट' में, जन्म से 18 साल तक का रिकॉर्ड रहेगा साथ

गुजरात सरकार ने राज्य के हर बच्चे के लिए 'हेल्थ पासपोर्ट' बनाने की योजना शुरू की है, जिसमें जन्म से 18 साल तक की पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक ही दस्तावेज में दर्ज रहेगी। हर साल करीब 1.89 करोड़ बच्चों की जांच 992 मोबाइल हेल्थ टीमों के जरिए होगी।

गुजरात सरकार अब राज्य के हर बच्चे के लिए एक ‘हेल्थ पासपोर्ट’ तैयार करने जा रही है, जिसमें जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक की पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक ही जगह मिल जाएगी। इस दस्तावेज में बच्चे की स्वास्थ्य जांच, पोषण की स्थिति और अलग-अलग बीमारियों से जुड़ा पूरा ब्योरा दर्ज होगा। सरकार का मकसद बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित बनाना और परिवारों के लिए इसे आसान बनाना है।

अमित शाह ने किया योजना का शुभारंभ

यह पहल स्कूल हेल्थ राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी SH-RBSK के तहत शुरू की गई है। इस राज्यव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत 27 जून 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में की थी। सरकार के मुताबिक यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ बचपन, स्वस्थ भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है।

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हर साल 1.89 करोड़ बच्चों की जांच, 992 मोबाइल टीमें जुटीं

गुजरात में हर साल करीब 1.89 करोड़ बच्चों यानी 0 से 18 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इस बड़े काम के लिए राज्य में 992 मोबाइल हेल्थ टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें आंगनवाड़ी, स्कूल, मदरसा, गुरुकुल और विशेष स्कूलों तक खुद पहुंचकर बच्चों की जांच करेंगी। अभी तक इन जांचों का रिकॉर्ड सिर्फ डिजिटल पोर्टल पर ही रहता था और माता-पिता के पास बच्चे की सेहत से जुड़ी जानकारी का कोई आसान कागज़ी दस्तावेज नहीं होता था। नया हेल्थ पासपोर्ट इसी कमी को पूरा करेगा और पूरी स्वास्थ्य जानकारी एक जगह उपलब्ध कराएगा।

बनवाने की प्रक्रिया आसान, कोई अतिरिक्त कागज नहीं चाहिए

सरकार ने हेल्थ पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया बेहद सरल रखी है। अभिभावकों को इसके लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। मोबाइल हेल्थ टीम बच्चे की जांच करेगी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उसका डेटा दर्ज करेगी, जिसके बाद उसी जगह बच्चे को हेल्थ पासपोर्ट थमा दिया जाएगा।

हर साल होगा रिन्युअल, जिम्मेदारी अलग-अलग तय

हेल्थ पासपोर्ट को हर साल अपडेट भी किया जाएगा। 5 साल तक के बच्चों और स्कूल न जाने वाले बच्चों के हेल्थ पासपोर्ट का नवीनीकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी PHC के मेडिकल ऑफिसर करेंगे। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों के हेल्थ पासपोर्ट का रिन्युअल संबंधित स्कूल के प्राचार्य के जिम्मे होगा।

पासपोर्ट में दर्ज होगी बच्चे की पूरी स्वास्थ्य यात्रा

हेल्थ पासपोर्ट में बच्चे की जन्म से लेकर 18 साल तक की पूरी स्वास्थ्य यात्रा दर्ज रहेगी। इसमें बच्चे का नाम, आयु और अन्य सामान्य जानकारी के साथ-साथ उम्र के हिसाब से हुई हर स्वास्थ्य जांच का रिकॉर्ड होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी SH-RBSK के तहत चिन्हित 4 प्रमुख श्रेणियों, जिन्हें 4D कहा जाता है, का पूरा ब्योरा भी इसमें शामिल होगा। इनमें जन्मजात विकार, बीमारियां, पोषण की कमी और विकास में देरी या दिव्यांगता जैसी स्थितियां आती हैं। इसके साथ ही बच्चे की शारीरिक और मानसिक वृद्धि, पोषण का स्तर, रेफरल सेवाओं का रिकॉर्ड, स्वास्थ्य व पोषण से जुड़े सुझाव, स्वस्थ जीवनशैली की सलाह और इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी हेल्थ पासपोर्ट का हिस्सा होंगे।

डिजिटल पोर्टल से जुड़ा रहेगा हर रिकॉर्ड, खोने पर भी टेंशन नहीं

इस योजना की खास बात यह है कि हेल्थ पासपोर्ट की एक फिजिकल कॉपी अभिभावकों के पास रहेगी, जबकि उसका पूरा रिकॉर्ड SH-RBSK के डिजिटल पोर्टल से जुड़ा रहेगा। अगर किसी वजह से हेल्थ पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो मोबाइल हेल्थ टीम के जरिए नया पासपोर्ट आसानी से दोबारा हासिल किया जा सकेगा। राज्य सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद सिर्फ मेडिकल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि माता-पिता को बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल में सक्रिय भागीदार बनाना भी है।

सवाल-जवाब

गुजरात का हेल्थ पासपोर्ट किसके लिए है?
यह जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक के हर बच्चे के लिए बनाया जाएगा।
यह योजना कब और किसने शुरू की?
इसे 27 जून 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में शुरू किया था।
हर साल कितने बच्चों की जांच होगी?
गुजरात में हर साल करीब 1.89 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी।
इसके लिए कितनी मोबाइल टीमें लगाई गई हैं?
इस काम के लिए 992 मोबाइल हेल्थ टीमों को तैनात किया गया है।
हेल्थ पासपोर्ट बनवाने के लिए क्या दस्तावेज चाहिए?
अभिभावकों को कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देना होगा, जांच और डेटा एंट्री के बाद वहीं पासपोर्ट दे दिया जाएगा।
हेल्थ पासपोर्ट का रिन्युअल कौन करेगा?
5 साल तक के और स्कूल न जाने वाले बच्चों का रिन्युअल PHC का मेडिकल ऑफिसर करेगा, जबकि स्कूल जाने वाले बच्चों का रिन्युअल स्कूल के प्राचार्य करेंगे।
अगर हेल्थ पासपोर्ट खो जाए तो क्या होगा?
मोबाइल हेल्थ टीम के जरिए नया हेल्थ पासपोर्ट आसानी से दोबारा बनवाया जा सकता है।
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