सावन के पवित्र महीने की शुरुआत होते ही देश भर से लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकल पड़े हैं। कांवड़ में गंगाजल भरकर कई किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा तय करना आस्था का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, कंक्रीट की सडकों पर कई किलोमीटर लगातार चलने के कारण श्रद्धालुओं के पैरों में दर्दनाक छाले पड़ जाते हैं और पैरों में भारी सूजन आ जाती है। शारीरिक थकावट और पैरों की तकलीफ से कई यात्रियों का स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है। इस स्थिति से निपटने और यात्रा को सुगम बनाने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर मनोज वाभले ने तीन बेहद महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सलाह साझा की हैं, जिन्हें अपनाकर कांवड़ यात्री बिना किसी बड़ी शारीरिक परेशानी के अपनी यात्रा पूरी कर सकते हैं।
सही जूतों और मोजों का चुनाव करें
पैदल यात्रा के दौरान पैरों की सुरक्षा सबसे पहला कदम है। डॉक्टर मनोज वाभले के अनुसार, कांवड़ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को चप्पल या हवाई चप्पल पहनकर पैदल चलने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। नंगे पैर या चप्पलों में लगातार चलने से पैरों की त्वचा पर सीधा दबाव पड़ता है, जिससे घर्षण के कारण बहुत तेजी से छाले बन जाते हैं। इसकी जगह यात्रियों को अच्छी गुणवत्ता वाले सूती मोजे और आरामदायक जूते पहनकर ही सफर करना चाहिए। सही नाप के स्पॉन्जी जूते पैरों को सडकों की कठोरता से बचाते हैं, जबकि मोजे पसीने को सोखकर घर्षण को कम करते हैं। इस आसान उपाय से पैरों में छालों की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।
विश्राम के समय पैरों की सिकाई और मालिश
लंबा सफर तय करने के बाद जब यात्री रास्ते में ठहरते हैं, तो उन्हें अपने पैरों की देखभाल के लिए कुछ समय जरूर निकालना चाहिए। डॉक्टर मनोज वाभले का सुझाव है कि विश्राम स्थल पर पहुंचते ही यात्रियों को कम से कम 10 मिनट तक अपने पैरों की ठंडे या गर्म पानी से अच्छे से सिकाई करनी चाहिए। पानी से सिकाई करने से पैरों की मांसपेशियों को तुरंत राहत मिलती है और रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे दिनभर की सूजन और जकड़न दूर हो जाती है। सिकाई के बाद पैरों पर बाम लगाया जा सकता है या फिर हल्के हाथों से तेल की मालिश की जा सकती है। यदि चलने में अत्यधिक दर्द महसूस हो रहा हो तो डॉक्टर की सलाह से आवश्यकतानुसार दर्द निवारक दवा या पेन किलर की खुराक भी ली जा सकती है।
खानपान का विशेष ध्यान रखें और पर्याप्त पानी पीएं
शारीरिक सहनशक्ति बनाए रखने के लिए सही आहार और जल स्तर का होना बहुत जरूरी है। कांवड़ यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह के समय अपनी यात्रा शुरू करने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो। यात्रा के दौरान केवल सादा, सुपाच्य और स्वादिष्ट भोजन ही ग्रहण करें। अत्यधिक तेल, मिर्च और मसालेदार खाने से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए, क्योंकि भारी भोजन से पाचन तंत्र पर असर पड़ता है और शरीर में सुस्ती व थकावट जल्दी आती है। यदि कांवड़िए इन तीनों बातों पर अमल करते हैं, तो उनके पैरों के पुराने छाले भी जल्दी ठीक हो जाएंगे, सूजन खत्म होगी और वे बिना किसी बड़ी थकावट के कई किलोमीटर का सफर आसानी से पूरा कर सकेंगे।



















