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बारिश के दिनों में पालक और पत्तागोभी क्यों बढ़ा सकते हैं बीमारी का खतरा? मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल की डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह से समझें सही डाइट प्लानस्वास्थ्य
7 अग॰ 2026, 10:36 am (82 दिन पहले)· 2

बारिश के दिनों में पालक और पत्तागोभी क्यों बढ़ा सकते हैं बीमारी का खतरा? मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल की डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह से समझें सही डाइट प्लान

मानसून के दौरान पत्तेदार सब्जियों में मिट्टी के परजीवी और कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं। मिर्जापुर की डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह ने बारिश में पालक, पत्तागोभी और सूरन से परहेज करने तथा बेल वाली सब्जियों को आहार में शामिल करने की सलाह दी है।

बरसात का मौसम आते ही वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याओं का खतरा भी तेजी से उभरने लगता है। इस मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी पेट के संक्रमण और कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित मंडलीय अस्पताल की वरिष्ठ डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह का कहना है कि बारिश के दिनों में हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन शरीर के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे समय में आहार में सही बदलाव करके और कुछ खास सब्जियों से दूरी बनाकर संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पत्तेदार सब्जियों में क्यों बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

बारिश के मौसम में पत्तेदार सब्जियों जैसे पत्तागोभी, पालक और चौराई का सेवन करने से बचना चाहिए। डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह के मुताबिक, जो सब्जियां जमीन के बिल्कुल करीब उगती हैं और जिनका सीधा संपर्क मिट्टी से होता है, उनमें कीटाणु और सूक्ष्म जीवों के पनपने की संभावना सबसे अधिक होती है। जब बारिश की बूंदें मिट्टी पर गिरती हैं, तो मिट्टी में मौजूद कई तरह के परजीवी और जीवाणु सब्जियों की पत्तियों और परतों में चिपक जाते हैं।

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बाजार से लाकर इन पत्तेदार सब्जियों को नल के पानी से कितनी भी अच्छी तरह धो लिया जाए, फिर भी उनके भीतर छुपे हुए छोटे कीटाणु पूरी तरह से नष्ट नहीं हो पाते। इसी वजह से मानसून के दौरान हरी पत्तेदार सब्जियों से दूरी बनाए रखना ही सेहत के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा, धनिया जैसी हरी पत्तियों से तैयार की जाने वाली चटनी का सेवन भी इस मौसम में बेहद सतर्कता के साथ करना चाहिए। यदि किसी ने अपने घर के बगीचे या गमलों में भी पत्तेदार सब्जियां उगाई हैं, तो भी उन्हें इस्तेमाल करते समय स्वच्छता और धुलाई का बहुत ही बारीक ध्यान रखना आवश्यक है।

मिट्टी के परजीवी और शरीर में पोषक तत्वों की कमी

बरसात के दिनों में मिट्टी में पाए जाने वाले विभिन्न परजीवी वातावरण की नमी के कारण अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। भोजन की तैयारी या सब्जियों की सफाई के दौरान ये परजीवी बहुत ही आसानी से खाद्य पदार्थों के संपर्क में आ सकते हैं। जब ये परजीवी दूषित भोजन के माध्यम से मानव शरीर के भीतर प्रवेश करते हैं, तो पाचन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

डॉ. ज्योति सिंह ने स्पष्ट किया कि शरीर में पहुंचे ये परजीवी आंतों में जमा होकर जरूरी पोषक तत्वों के अवशोषण को बाधित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप शरीर में पोषण की कमी हो जाती है और व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। लगातार ऐसे संक्रमण के संपर्क में रहने से व्यक्ति कमजोरी, पेट दर्द और पाचन से जुड़ी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ सकता है।

आहार में शामिल करें बेल पर उगने वाली सुरक्षित सब्जियां

डाइटीशियन के अनुसार, मानसून के समय सभी प्रकार की सब्जियों का त्याग करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। इस मौसम में ऐसी सब्जियों का चुनाव करना चाहिए जो जमीन की सतह से ऊपर, हवा में या बेल के सहारे उगती हैं। ऐसी सब्जियों का मिट्टी से सीधा संपर्क नहीं होता, जिससे उन पर कीटाणुओं और परजीवियों के जमा होने का जोखिम काफी कम रहता है।

बारिश के दिनों में लौकी, नेनुआ, भिंडी और करेला जैसी सब्जियों को अपनी दैनिक डाइट का हिस्सा बनाना बेहद लाभदायक होता है। ये सब्जियां पचाने में आसान होती हैं और शरीर को आवश्यक विटामिंस तथा खनिज प्रदान करती हैं। बेल पर उगने के कारण इन सब्जियों में स्वच्छता बनाए रखना आसान होता है और इन्हें पकाना भी सुरक्षित रहता है।

पारंपरिक व्यंजन और सूरन से परहेज की सलाह

मानसून में अक्सर बाजारों में ताजी सब्जियों की उपलब्धता कम हो जाती है, जिसके कारण कई लोग अपने दैनिक भोजन में बदलाव तलाशते हैं। डॉ. ज्योति सिंह बताती हैं कि इस दौरान पारंपरिक भारतीय व्यंजनों को भोजन का मुख्य हिस्सा बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, चने या विभिन्न दालों की सब्जी, बेसन से बने गट्टे की सब्जी और भाप में तैयार कोफ्ते जैसे विकल्प इस मौसम में पौष्टिक और सुरक्षित रहते हैं।

दूसरी ओर, सब्जियों की कमी होने पर कई लोग सूरन यानी जिमीकंद जैसी कंदमूल सब्जियों का उपयोग बढ़ा देते हैं। डाइटीशियन ने चेतावनी दी है कि सूरन पूरी तरह जमीन के नीचे उगता है और मिट्टी के लगातार संपर्क में रहता है। इसलिए बारिश के दिनों में सूरन में भी परजीवियों का संक्रमण होने की बहुत अधिक संभावना रहती है। यदि कोई व्यक्ति सूरन का सेवन कर भी रहा है, तो उसे छीलने और काटने के बाद अत्यधिक सावधानीपूर्वक साफ करना चाहिए। हालांकि सब्जियों को काटने के बाद बार-बार धोने से उनके कुछ घुलनशील पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, इसलिए सामान्य नियम यही है कि सब्जियों को हमेशा काटने से पहले ही अच्छी तरह धो लेना चाहिए।

सब्जियों की धुलाई, पकाने की विधि और हाथों की सफाई

सब्जियों के सही चयन के साथ-साथ उनकी धुलाई और पकाने के तरीके पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। सब्जियों को साफ करते समय सादे पानी के बजाय गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक या सिरका मिलाकर धोना एक प्रभावी तरीका है। इससे सब्जियों की सतह पर चिपके कीटाणु आसानी से निकल जाते हैं। फिर भी, सब्जियों को अच्छे से धोना और तेज आंच पर सही तरीके से पकाना ही संक्रमण से बचने का सबसे पक्का उपाय है।

डाइटीशियन डॉ. ज्योति सिंह ने रसोई और व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी विशेष जोर दिया है। सब्जियां काटने से पहले और खाना पकाने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना अनिवार्य है। अक्सर गंदे हाथों के जरिए ही परजीवी और बैक्टीरिया सब्जियों तथा पके हुए भोजन तक पहुंच जाते हैं। इसलिए भोजन की तैयारी से लेकर परोसने तक स्वच्छता के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करके ही मानसून में बीमारियों से बचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

बारिश के मौसम में पालक और पत्तागोभी खाने से क्यों बचना चाहिए?
पत्तागोभी और पालक जमीन के संपर्क में उगती हैं। मानसून में मिट्टी के परजीवी और कीटाणु पत्तियों पर जमा हो जाते हैं, जो सामान्य धोने से भी पूरी तरह साफ नहीं होते।
मानसून में कौन सी सब्जियां खाना सेहत के लिए सुरक्षित है?
बेल पर या जमीन से ऊपर उगने वाली सब्जियां जैसे लौकी, नेनुआ, भिंडी और करेला मानसून में खाने के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती हैं।
सब्जियों को धोने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए?
सब्जियों को काटने से पहले पानी में थोड़ा नमक या सिरका मिलाकर अच्छी तरह धोना चाहिए और फिर तेज आंच पर पकाकर खाना चाहिए।
क्या बारिश में सूरन (जिमीकंद) का सेवन किया जा सकता है?
सूरन जमीन के नीचे उगता है और मिट्टी के सीधे संपर्क में रहता है, इसलिए बारिश में इससे परहेज करने की सलाह दी जाती है।
सब्जियों की कमी होने पर आहार में क्या विकल्प शामिल किए जा सकते हैं?
हरी सब्जियों की जगह चने या दाल की सब्जी, बेसन-गट्टे की सब्जी और कोफ्ते जैसे पारंपरिक व्यंजनों को आहार में शामिल किया जा सकता है।
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