डिजिटल गैजेट्स के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण आजकल कम उम्र में ही लोगों को चश्मा चढ़ना एक सामान्य समस्या बन गया है। स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने लगातार कई घंटे बिताने से आँखों की मांसपेशियों पर भारी दबाव पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप आँखों में सूखापन, धुंधलापन और विज़न कमजोर होने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि, अपनी दैनिक जीवनशैली में कुछ पारंपरिक योगासनों और प्राणायाम को शामिल करके न केवल आँखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जा सकता है, बल्कि चश्मे के बढ़ते नंबर पर भी प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकती है।
स्क्रीन के दुष्प्रभावों से आँखों का बचाव
दिनभर स्क्रीन की तेज रोशनी को लगातार देखते रहने से आँखों की पुतलियाँ और ऑप्टिक नसों में खिंचाव पैदा होता है। जब हम लंबे समय तक एक ही दूरी पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आँखों की प्राकृतिक मूवमेंट कम हो जाती है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से विशेष नेत्र अभ्यास करने से आँखों के आसपास रक्त का प्रवाह बढ़ता है और मांसपेशियों की लचक वापस लौटती है। पाँच ऐसे आसान और असरदार योगासन हैं जो दृष्टि में सुधार लाने में बेहद सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
त्राटक क्रिया से बढ़ाएं ध्यान और रोशनी
त्राटक क्रिया को आँखों की क्षमता बढ़ाने के लिए सबसे प्राचीन और शक्तिशाली तरीकों में गिना जाता है। इस अभ्यास को करने के लिए किसी शांत कमरे में बैठें और अपनी आँखों के ठीक सामने मोमबत्ती की लौ या दीवार पर एक काले बिंदु को स्थापित करें। अब बिना पलकें झपकाए उस बिंदु पर निरंतर ध्यान केंद्रित करें। जब तक आँखों से प्राकृतिक रूप से पानी न बहने लगे, तब तक ध्यान बनाए रखें। इसके पश्चात धीरे से आँखें बंद कर लें। यह क्रिया एकाग्रता को मजबूत करती है, ऑप्टिक नसों को शक्ति प्रदान करती है और दृष्टि को पैना बनाती है।
पाल्मिंग तकनीक से थकावट को करें दूर
लगातार काम करने के बाद आँखों को तुरंत आराम देने के लिए पाल्मिंग एक बेहद प्रभावी माध्यम है। इसे करने के लिए आराम से बैठ जाएं और अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें ताकि उनमें गर्मी पैदा हो जाए। इसके बाद अपनी बंद आँखों पर हथेलियों को कटोरी की तरह ढंककर रखें, ध्यान रहे कि बाहर की रोशनी अंदर न जाने पाए। यह अभ्यास आँखों में रक्त के प्रवाह को प्रोत्साहित करता है और स्क्रीन तनाव से तुरंत राहत दिलाता है।
आई रोटेशन से मांसपेशियों को दें मजबूती
आँखों की पुतलियों का व्यायाम उनकी लचक बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। आई रोटेशन करने के लिए अपनी गर्दन और सिर को बिल्कुल स्थिर रखें। केवल अपनी आँखों की पुतलियों को धीरे-धीरे ऊपर और नीचे, फिर दाएं और बाएं घुमाएं। इसके बाद पुतलियों को वृत्ताकार दिशा में क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाएं। यह अभ्यास ढीली पड़ चुकी नेत्र मांसपेशियों को पुनः टोन करता है।
सर्वांगासन से मस्तिष्क और आँखों में बढ़ाएं ब्लड फ्लो
सर्वांगासन एक संपूर्ण शारीरिक आसन है जो आँखों के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेटकर अपने पैरों और कमर को ऊपर की ओर उठाएं, जिससे शरीर का संतुलन कंधों पर आ जाए। इस स्थिति से शरीर में रक्त का प्रवाह विपरीत दिशा यानी सिर और आँखों की ओर तेजी से होता है। इससे आँखों की नसों को गहराई से पोषण प्राप्त होता है।
अनुलोम विलोम प्राणायाम से ऑक्सीजन आपूर्ति में सुधार
प्राणायाम न केवल मानसिक तनाव दूर करता है बल्कि आँखों की सेहत के लिए भी आवश्यक है। अनुलोम विलोम करने के लिए सुखासन में बैठें और एक नथुने से गहरी सांस लेकर दूसरे से छोड़ें। इस प्रक्रिया को रोजाना 10 से 15 मिनट तक दोहराएं। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, जो आँखों की बारीक नसों की कार्यप्रणाली को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।



















