आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रोबोट की मदद से होने वाले ऑपरेशनों की स्वीकार्यता मरीजों और डॉक्टरों के बीच लगातार मजबूत हो रही है। देश की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की गति सबसे तेज दर्ज की गई है। कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव, छोटे चीरे और ऑपरेशन के बाद अस्पताल से शीघ्र छुट्टी मिलने की सुविधा के चलते मरीज अब पारंपरिक शल्य चिकित्सा के मुकाबले रोबोटिक प्रक्रियाओं को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बदलाव राजधानी क्षेत्र को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के सबसे बड़े हब के रूप में स्थापित कर रहा है।
सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी सम्मेलन में सामने आए आंकड़े
राजधानी में आयोजित सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026 इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र के विस्तार पर विस्तृत आंकड़े साझा किए। सफदरजंग अस्पताल में यूरोलॉजी, रोबोटिक और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख और आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि भारत इस समय रोबोट आधारित शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उनके अनुसार देश 2030 तक इस आधुनिक सर्जिकल विधा में विश्व स्तर पर अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि प्रसव और गर्भावस्था से जुड़े मामलों में रोबोटिक सर्जरी के इस्तेमाल पर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष देना जल्दबाजी होगी।
चार वर्षों में पांच गुना बढ़ा रोबोटिक प्रक्रियाओं का दायरा
मैक्स अस्पताल में मिनिमल एक्सेस, बैरिएट्रिक और रोबोटिक सर्जरी विभाग के प्रमुख तथा सोसाइटी ऑफ़ रोबोटिक सर्जरी इंडिया के आयोजन चेयरमैन डॉ. विवेक बिंदल ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर के 39 चिकित्सा संस्थानों में उन्नत रोबोटिक प्रणालियां काम कर रही हैं। इनमें से 11 अस्पताल ऐसे हैं जहां एक से अधिक रोबोटिक यूनिट्स स्थापित हैं। आंकड़ों के अनुसार 2021 में इस क्षेत्र में जहां कुल 2,257 रोबोटिक ऑपरेशन हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 3,594 और 2023 में 5,024 तक पहुंच गई। इसके बाद 2024 में 7,595 तथा 2025 में यह आंकड़ा 10,937 दर्ज हुआ, जो महज चार वर्षों में लगभग पांच गुना बढ़ोतरी दर्शाता है।
किन बीमारियों के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल
वर्ष 2025 के दौरान दिल्ली-एनसीआर में हुए कुल रोबोटिक ऑपरेशनों में गैर-कैंसर से जुड़ी सामान्य सर्जरी की हिस्सेदारी करीब 33 प्रतिशत रही। इसके बाद मूत्र रोग संबंधी प्रक्रियाओं यानी यूरोलॉजी की हिस्सेदारी 30.2 प्रतिशत, स्त्री रोग संबंधी यानी गायनेकोलॉजी मामलों की 22.1 प्रतिशत और कैंसर से संबंधित सामान्य शल्य चिकित्सा की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त सिर, गर्दन, वक्ष (थोरेसिक) और हृदय से जुड़ी जटिल बीमारियों के उपचार में भी रोबोटिक तकनीक का सफल प्रयोग किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका व्यापक प्रसार हुआ है, जहां 2021 में दर्ज 8,912 मामलों के मुकाबले 2025 में पूरे भारत के भीतर 44,857 रोबोटिक ऑपरेशन पूरे किए गए।
टेलीसर्जरी के जरिए दूरस्थ इलाकों तक विशेषज्ञता की पहुंच
तकनीकी नवाचार का प्रदर्शन करते हुए वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सर्जिकल दल ने करीब 5,000 किलोमीटर दूर चीन के चेंगदू में मौजूद रोबोटिक कंसोल को भारत से रिमोटली नियंत्रित किया। इस सफल प्री-क्लिनिकल परीक्षण ने साबित किया कि टेलीसर्जरी की मदद से भविष्य में छोटे शहरों, टियर-2 और टियर-3 नगरों के मरीजों को भी बड़े महानगरों के शीर्ष विशेषज्ञों की सेवाएं स्थानीय स्तर पर सुलभ कराई जा सकती हैं।



















