शादी से चार हफ्ते पहले चेहरे की चमक बढ़ाएं दूल्हे, इन 5 आसान घरेलू स्किनकेयर आदतों से पाएं निखारसेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के पुनर्वास पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा विस्तृत ब्योरापारंपरिक जर्दे में संतरे के छिलके का नया तड़का, गाजीपुर की छात्राओं ने तैयार की आसान विधिसगाई में दिखना है सबसे जुदा, तो चुनिए मनीष मल्होत्रा के ये शानदार साड़ी डिजाइन्सबिग बॉस 20 में नई कैप्टन उदिति से भिड़ीं माही विज, बर्तनों की सफाई पर अरिशफा और कनिका में भी तकरारपश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी वायदा बाजार में सुस्ती, निवेशकों की नजर आर्थिक आंकड़ों परअमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती के बीच सोने की रफ्तार थमी, जानिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरहवाई सफर होगा महंगा: इंडिगो ने घरेलू और इंटरनेशनल उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ायाएंथ्रोपिक का बड़ा कदम, भारत में ही प्रोसेस होगा क्लॉड एआई का डेटाफ्रांस के कर्ज संकट से यूरो लगातार सातवें दिन पस्त, 0.8450 के स्तर पर टिकी बाजार की नजरें
हेपेटाइटिस की सुरक्षा जांचने के आसान ब्लड टेस्ट और स्क्रीनिंग की पूरी गाइडस्वास्थ्य
5 अक्तू॰ 2026, 1:42 pm (45 मिनट पहले)· 0

हेपेटाइटिस की सुरक्षा जांचने के आसान ब्लड टेस्ट और स्क्रीनिंग की पूरी गाइड

हेपेटाइटिस संक्रमण सालों तक बिना लक्षण लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है। साधारण एंटीबॉडी टेस्ट से जानें कि आपको टीका लगा है या नई खुराक की जरूरत है।

लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C संक्रमण को अक्सर खामोश हमलावर माना जाता है। यह दोनों वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद दशकों तक बिना किसी बड़े लक्षण के चुपचाप लिवर की कोशिकाओं को नष्ट करते रहते हैं। अधिकांश मामलों में लोगों को यह याद नहीं रहता कि बचपन में उन्हें हेपेटाइटिस का टीका लगा था या नहीं। ऐसे में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए साधारण ब्लड सीरोलॉजी टेस्ट करवाकर अपनी सुरक्षा स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

लक्षण दिखने से पहले स्क्रीनिंग क्यों जरूरी है

डॉक्टर निर्देश चौहान, कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी (फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद) के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार हेपेटाइटिस B और C की चिकित्सीय जांच जरूर करानी चाहिए। जब किसी मरीज में पीलिया, लगातार रहने वाली गंभीर थकान या पेट में असामान्य रूप से पानी भरने जैसे स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। कई बार उस चरण तक लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

ये भी पढ़ें

शुरुआती दौर में ही संक्रमण को पकड़ने के लिए रक्त परीक्षण सबसे कारगर उपाय है। हेपेटाइटिस B की उपस्थिति जांचने के लिए HBsAg टेस्ट किया जाता है, जबकि हेपेटाइटिस C की पहचान Anti-HCV जांच के जरिए होती है। एक बार ये टेस्ट समय पर करवा लेने से सही इलाज तुरंत शुरू हो सकता है और लिवर की रक्षा की जा सकती है।

वैक्सीनेशन की स्थिति और एंटीबॉडी का पता लगाने के तरीके

मौजूदा चिकित्सा प्रणाली में केवल हेपेटाइटिस A और B की रोकथाम के लिए टीके बनाए गए हैं, जबकि हेपेटाइटिस C के बचाव के लिए अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। अगर आपको अपने पुराने टीकाकरण की जानकारी नहीं है, तो हेपेटाइटिस B के प्रति अपनी प्रतिरक्षा परखने के लिए Anti-HBs यानी हेपेटाइटिस B सर्फेस एंटीबॉडी परीक्षण करवाया जा सकता है।

इस जांच में एंटीबॉडी के स्तर का मूल्यांकन किया जाता है

  • टाइटर 10 mIU/mL या अधिक: इस परिणाम का सीधा अर्थ है कि आपके शरीर में वायरस से लड़ने के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षात्मक एंटीबॉडी सक्रिय हैं। आप हेपेटाइटिस B संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित और प्रतिरक्षित हैं।
  • टाइटर 10 mIU/mL से कम: इसका मतलब है कि शरीर में सुरक्षा का अभाव है और संक्रमण का जोखिम बना हुआ है। यदि सक्रिय संक्रमण जांचने वाला HBsAg टेस्ट भी निगेटिव आता है, तो आपको शून्य, एक और छह महीने के अंतराल वाली तीन खुराकों का प्राथमिक टीका चक्र पूरा करना चाहिए अथवा चिकित्सक के परामर्श से बूस्टर डोज लेनी चाहिए।

प्राकृतिक संक्रमण और टीके से बनी एंटीबॉडी में अंतर

शरीर में एंटीबॉडी की मौजूदगी के बाद यह सवाल उठता है कि यह सुरक्षा टीके से मिली है या पुराने संक्रमण से। यदि किसी व्यक्ति की Anti-HBs रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो स्थिति स्पष्ट करने के लिए Anti-HBc Total जांच की जाती है।

अगर Anti-HBc Total रिपोर्ट निगेटिव आती है, तो यह दर्शाता है कि सुरक्षात्मक एंटीबॉडी केवल वैक्सीन के जरिए बनी हैं। इसके विपरीत, यदि Anti-HBc Total पॉजिटिव निकलता है, तो इसका अर्थ है कि व्यक्ति पहले कभी इस वायरस से संक्रमित हुआ था और शरीर ने उस पुराने ठीक हो चुके संक्रमण के जवाब में एंटीबॉडी विकसित की हैं।

टीकाकरण रिकॉर्ड न होने पर क्या करें

भारत में हेपेटाइटिस B के टीके को वर्ष 2007 से 2008 के दौरान राष्ट्रीय सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम यानी UIP में चरणबद्ध तरीके से जोड़ा गया था। यदि आपका जन्म 2007 से पहले हुआ है और परिवार के पास बचपन के टीकाकरण की कोई लिखित पर्ची या डायरी उपलब्ध नहीं है, तो संदेह में रहने के बजाय Anti-HBs ब्लड सीरोलॉजी जांच करवाना ही अपनी वास्तविक स्थिति जानने का सबसे सटीक और प्रमाणित रास्ता है।

सवाल-जवाब

हेपेटाइटिस B और C को साइलेंट किलर क्यों कहा जाता है?
यह वायरस बिना किसी स्पष्ट लक्षण के दशकों तक चुपचाप लिवर को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
हेपेटाइटिस की जांच के लिए कौन से ब्लड टेस्ट किए जाते हैं?
हेपेटाइटिस B की पहचान के लिए HBsAg और हेपेटाइटिस C के लिए Anti-HCV ब्लड टेस्ट किया जाता है।
क्या हेपेटाइटिस C का टीका उपलब्ध है?
नहीं, वर्तमान में केवल हेपेटाइटिस A और B के टीके उपलब्ध हैं, हेपेटाइटिस C का कोई टीका नहीं है।
Anti-HBs टेस्ट में सुरक्षित टाइटर कितना होना चाहिए?
Anti-HBs टाइटर 10 mIU/mL या उससे अधिक होने पर व्यक्ति हेपेटाइटिस B से सुरक्षित माना जाता है।
यदि एंटीबॉडी टाइटर 10 mIU/mL से कम हो तो क्या करना चाहिए?
ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह से 0, 1 और 6 महीने के शेड्यूल पर तीन खुराकों का प्राथमिक टीका या बूस्टर डोज लगवाना चाहिए।
भारत में हेपेटाइटिस B का टीका राष्ट्रीय कार्यक्रम में कब शामिल हुआ?
भारत में इस वैक्सीन को 2007-2008 के आसपास राष्ट्रीय सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp