क्या आपको जमीन पर पालथी मारकर बैठने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है? सीढ़ियों पर चढ़ते या उतरते वक्त घुटनों में तकलीफ महसूस होती है? दफ्तर में लंबे वक्त तक कुर्सी पर बैठने के बाद जब आप खड़े होते हैं, तो क्या पूरा शरीर अकड़ा हुआ महसूस होता है या जूते के फीते बांधने के लिए नीचे झुकना किसी चुनौती से कम नहीं लगता है? यदि रोजमर्रा के इन साधारण कामों को करने में आपको अचानक असहजता या परेशानी का अनुभव होने लगा है, तो इसे महज उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, थकान या फिर शारीरिक व्यायाम की कमी मानकर कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
हमारे शरीर की तरफ से मिलने वाली ये छोटी-छोटी परेशानियां दरअसल आने वाली बड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। राजधानी दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक कंसलटेंट डॉ. यश गुलाटी का कहना है कि पालथी मारकर जमीन पर बैठने, सीढ़ियां तय करने या शरीर को किसी भी दिशा में मोड़ने के दौरान होने वाली दिक्कतें अक्सर जोड़ों के भीतर आ रहे शुरुआती बदलावों की ओर इशारा करती हैं। वक्त बीतने के साथ यदि जोड़ों में घिसाव लगातार बढ़ता जाए, तो दर्द और जकड़न की तीव्रता भी और अधिक बढ़ सकती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक, आज के समय में जोड़ों की समस्याएं केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। चालीस से पचास वर्ष की उम्र के तमाम लोग भी अब घुटनों के दर्द, पीठ की जकड़न और शरीर का लचीलापन घटने जैसी गंभीर शिकायतों से जूझते हुए नजर आ रहे हैं। इस उम्र के लोगों में इन तकलीफों का तेजी से बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि हमारी जीवनशैली जोड़ों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
जोड़ों की समस्याओं के पीछे छिपी मुख्य वजहें
लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना, रोजाना की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों की भारी कमी होना, शरीर का लगातार बढ़ता हुआ वजन, बैठने या उठने का गलत पोस्चर और मांसपेशियों का कमजोर होना जैसी कई ऐसी वजहें हैं जो हमारे जोड़ों पर अतिरिक्त और अनावश्यक दबाव बनाती हैं। हड्डियों और जोड़ों के बीच होने वाला प्राकृतिक घिसाव भी कभी रातोंरात शुरू नहीं होता है। इसके शुरुआती लक्षण बेहद धीमी रफ्तार से सामने आते हैं और ज्यादातर लोग इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज करते रहते हैं।
जब जोड़ों के अंदर की सुरक्षात्मक परत कमजोर होने लगती है, तो शरीर अपने खास तरीकों से हमें चेतावनी देना शुरू कर देता है। इन संकेतों को समय रहते भांप लेना ही भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचने का सबसे अचूक उपाय माना जाता है।
जोड़ों में खराबी के 6 अहम शुरुआती लक्षण
यदि आप अपने शरीर में नीचे बताए गए छह में से किसी भी लक्षण को महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाने की जरूरत है
1. पालथी या उकड़ूं बैठने में परेशानी: अगर जमीन पर पालथी मारकर बैठते वक्त घुटनों में किसी प्रकार का खिंचाव, तेज दर्द या भारीपन महसूस होता है या फिर कुछ देर बैठने के बाद उठने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
2. सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में दर्द: सीढ़ियों का इस्तेमाल करते समय यानी चढ़ते या उतरते वक्त यदि घुटनों पर सामान्य से कहीं अधिक दबाव महसूस हो, या फिर किसी तरह की चुभन और दर्द का अहसास हो, तो यह जोड़ों की खराबी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। खासकर तब जब यह समस्या बार-बार दोहराई जाने लगे।
3. सुबह या लंबे समय तक बैठने के बाद अकड़न: सुबह नींद से जागने के बाद घुटनों या शरीर के अन्य जोड़ों में भारी जकड़न महसूस होना और काफी देर तक चलने-फिरने के बाद ही राहत मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि जोड़ स्वस्थ नहीं हैं। इसके अलावा, लंबे वक्त तक एक ही अवस्था में बैठने के बाद अचानक उठते वक्त होने वाली अकड़न को भी बिल्कुल हल्के में न लें।
4. शरीर का लचीलापन कम होना: पहले जिस आसानी के साथ आप जमीन पर नीचे झुक जाते थे, अपने पैरों को मोड़ लेते थे या शरीर को घुमा लेते थे, यदि अब वैसा करने में कठिनाई आ रही है, तो यह लचीलेपन में आई कमी को दर्शाता है। अपने पैरों को पूरी तरह सीधा करने में होने वाली दिक्कत भी एक महत्वपूर्ण लक्षण है जिसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
5. जोड़ों के आसपास सूजन: पैदल चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने या फिर थोड़ा भी शारीरिक श्रम करने के तुरंत बाद यदि घुटनों या अन्य जोड़ों के इर्द-गिर्द हल्की सूजन या उभार दिखाई दे, तो इसके मूल कारणों का पता लगाना आवश्यक है। बार-बार उभरने वाली इस सूजन को केवल सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज करने की भूल न करें।
6. जोड़ों से कट-कट या घिसने जैसी आवाज आना: उठते-बैठते वक्त, सीढ़ियां चढ़ते समय या सामान्य चाल चलते वक्त यदि आपके घुटनों से क्लिकिंग की आवाज, कट-कट की आवाज या फिर हड्डियों के आपस में घिसने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं, तो यह भी एक चेतावनी हो सकती है। हालांकि केवल आवाज आने का यह मतलब कतई नहीं है कि आपको कोई गंभीर बीमारी हो गई है, लेकिन यदि इस आवाज के साथ लगातार दर्द, सूजन या अकड़न भी बनी हुई है, तो किसी योग्य चिकित्सक से तुरंत परामर्श करना बुद्धिमानी होगी।
क्या हर जोड़ों के दर्द का अंतिम इलाज सर्जरी है?
जोड़ों में जरा सा भी दर्द शुरू होते ही तमाम लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि अब उनका एकमात्र इलाज सिर्फ सर्जरी यानी ऑपरेशन ही बचा है। यही खौफ उन्हें डॉक्टर के पास जाने से रोकता है और वे दर्द सहते रहते हैं। लेकिन डॉ. यश गुलाटी के अनुसार, यदि इस समस्या की पहचान शुरुआती दौर में ही कर ली जाए, तो अधिकांश मामलों में बिना किसी सर्जरी के भी स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित और सामान्य किया जा सकता है।
चिकित्सक की सलाह के आधार पर की जाने वाली फिजियोथेरेपी, मांसपेशियों और जोड़ों को मजबूती प्रदान करने वाली विशेष एक्सरसाइज, शरीर के बढ़ते वजन को नियंत्रण में रखना और अपनी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाना बेहद मददगार साबित हो सकता है। हालांकि कौन सा व्यायाम आपके लिए सबसे ज्यादा मुफीद रहेगा, यह पूरी तरह से आपकी समस्या की असली वजह और जोड़ों की वर्तमान स्थिति पर निर्भर करता है, जिसे डॉक्टर ही तय कर सकते हैं.
दर्द को लगातार सहते रहना किसी भी सूरत में समझदारी नहीं है। जोड़ों से जुड़ी किसी भी प्रकार की तकलीफ में सबसे बड़ी और खतरनाक गलती यह होती है कि व्यक्ति दर्द के अपने आप ठीक होने या फिर इसके और ज्यादा बढ़ने का इंतजार करता रहता है। यदि पालथी लगाकर बैठना, सीढ़ियां तय करना, लंबे समय तक बैठने के बाद उठना या फिर नीचे की तरफ झुकना आपके लिए पहले के मुकाबले कठिन हो गया है और यह दिक्कत लगातार बनी हुई है, तो बिना देर किए किसी अनुभवी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से मिलकर सलाह लेनी चाहिए।
समय पर सही मेडिकल जांच और उसकी उचित देखभाल से इस समस्या को और अधिक गंभीर होने से रोकने में काफी मदद मिलती है। हमारे शरीर की तरफ से मिलने वाले इन छोटे-छोटे संकेतों को गहराई से समझना और जरूरत पड़ने पर बिना किसी देरी के समय पर सही कदम उठाना ही लंबे वक्त तक अपने जोड़ों को पूर्ण रूप से स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने की सबसे बेहतरीन रणनीति है।



















