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भारत में नशे के चौंकाने वाले आंकड़े लोकसभा में पेश, करोड़ों लोग शराब और गांजे की गिरफ्त मेंस्वास्थ्य
23 जुल॰ 2026, 5:37 pm (96 दिन पहले)· 3

भारत में नशे के चौंकाने वाले आंकड़े लोकसभा में पेश, करोड़ों लोग शराब और गांजे की गिरफ्त में

केंद्र सरकार ने संसद में एम्स के सर्वेक्षण के हवाले से देश में नशे की लत की डराने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक करोड़ों वयस्क और लाखों बच्चे शराब, गांजे और खतरनाक ओपिओइड के जाल में बुरी तरह फंसे हुए हैं।

भारत में नशे की लत किस भयानक और गंभीर स्तर तक पहुंच चुकी है, इसकी असली तस्वीर अब आधिकारिक तौर पर संसद में सामने आ गई है। केंद्र सरकार द्वारा साझा किए गए ताजा और विस्तृत आंकड़ों से पता चलता है कि देश के करोड़ों नागरिक, जिनमें बच्चों की एक बड़ी संख्या भी शामिल है, शराब, गांजे और अन्य खतरनाक नशीले पदार्थों के जाल में बुरी तरह फंसे हुए हैं। यह विस्तृत रिपोर्ट नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के राष्ट्रीय ड्रग निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी) द्वारा पूरे देश में किए गए एक व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण पर आधारित है। इन आंकड़ों ने पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि नशे की यह जानलेवा बीमारी अब केवल पारंपरिक वयस्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने समाज के हर वर्ग और विशेषकर युवा आबादी को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। इस खुलासे ने परिवारों और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली पर पड़ने वाले भारी सामाजिक-आर्थिक बोझ को भी रेखांकित किया है।

शराब और गांजे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने लोकसभा में एक विस्तृत लिखित जवाब के माध्यम से सांसदों के सामने इन चौंकाने वाले आंकड़ों का पूरा ब्यौरा पेश किया। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 18 से 75 वर्ष की विस्तृत आयु के नागरिकों के बीच आज भी शराब सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला नशीला पदार्थ बनी हुई है, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। देश भर में लगभग 15.10 करोड़ वयस्क नियमित रूप से शराब का सेवन कर रहे हैं। हालांकि, निर्भरता की यह समस्या सिर्फ पारंपरिक शराब तक ही सीमित नहीं है। रिपोर्ट बताती है कि 2.90 करोड़ लोग गांजे (कैनाबिस) का लगातार और सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं।

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इसके अलावा, गंभीर नशीले पदार्थों और दवाइयों की लत के आंकड़े और भी अधिक डराने वाले हैं, जो अक्सर अधिक गंभीर शारीरिक निर्भरता की ओर ले जाते हैं। सरकारी जानकारी के मुताबिक, एक परेशान करने वाली संख्या यानी 1.90 करोड़ लोग ओपिओइड की श्रेणी में आने वाले नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, जिनमें कच्ची अफीम, अवैध हेरोइन और अन्य अत्यधिक नशे वाले ओपिओइड शामिल हैं। फार्मास्युटिकल दवाओं के दुरुपयोग का चलन भी एक बड़ी आधुनिक चिंता के रूप में उभरा है, जिसके चलते 1.10 करोड़ नागरिक नींद की गोलियों और मजबूत शांत करने वाली दवाओं (सेडेटिव) के पूरी तरह आदी पाए गए हैं। इसके साथ ही, लगभग 60 लाख लोग आसानी से उपलब्ध होने वाले इनहेलेंट (सूंघकर नशा करने वाले पदार्थ) का इस्तेमाल करते पाए गए हैं ताकि वे कुछ समय के लिए नशे का अनुभव कर सकें। यदि इन सभी नशा करने वालों की संख्या को एक साथ मिला दिया जाए, तो यह आंकड़ा दुनिया के कई बड़े देशों की कुल आबादी को भी आसानी से पीछे छोड़ देता है। हालांकि, अधिकारियों ने समझदारी से यह स्पष्ट किया है कि कई लोग एक ही समय में एक से अधिक तरह के नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, इसलिए इन अलग-अलग आंकड़ों को सीधे जोड़कर कुल संख्या निकालना गणितीय रूप से पूरी तरह सटीक नहीं होगा।

बच्चों और किशोरों में तेजी से फैल रहा जहर

इस संसदीय रिपोर्ट का सबसे ज्यादा परेशान करने वाला और दिल तोड़ने वाला पहलू देश के मासूम बच्चों और किशोरों से जुड़ा है। सर्वेक्षण ने ठीक 10 से 17 वर्ष के आयु वर्ग में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के बेहद चिंताजनक रुझान को उजागर किया है। सरकार की कठोर जांच और निष्कर्षों के मुताबिक, विकास के इस बेहद संवेदनशील चरण में 40 लाख नाबालिग सक्रिय रूप से खतरनाक ओपिओइड जैसे ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती, बल्कि 30 लाख अन्य बच्चे और किशोर अक्सर सस्ते घरेलू उत्पादों का उपयोग करते हुए जहरीले इनहेलेंट के जरिए नशा कर रहे हैं। कम उम्र में नशे की इस बढ़ती लत ने सरकार और प्रशासन की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है, जिसके कारण प्रारंभिक हस्तक्षेप रणनीतियों, स्कूल-स्तर के व्यापक जागरूकता अभियानों, विशेष बाल चिकित्सा उपचार और विशेष रूप से युवा नागरिकों के लिए तैयार किए गए व्यापक पुनर्वास कार्यक्रमों पर तत्काल जोर दिया जा रहा है, जिन्हें जीवन भर संभावित स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

नशा मुक्त भारत अभियान का बढ़ता दायरा

नशे के इस बढ़ते राष्ट्रीय संकट से व्यवस्थित रूप से निपटने के लिए सरकार बड़े स्तर पर कई समन्वित कदम उठा रही है, जिनमें प्रमुख 'नशा मुक्त भारत अभियान' (एनएमबीए) सबसे आगे है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2020 को बड़े उत्साह के साथ शुरू किए गए इस व्यापक अभियान को समय के साथ विस्तार दिया गया और अगस्त 2023 तक इसे देश के हर एक जिले में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया। इस चल रही पहल का भौगोलिक और जनसांख्यिकीय दायरा बहुत विशाल है, और शीर्ष अधिकारियों ने गर्व के साथ इसे वर्तमान में विश्व स्तर पर संचालित सबसे बड़े और सबसे व्यापक नशा विरोधी जन जागरूकता आंदोलनों में से एक बताया है।

अपनी शुरुआत से लेकर अब तक, इस एनएमबीए ने नशे के खिलाफ महत्वपूर्ण संदेशों और शैक्षिक सामग्री के साथ 29.68 करोड़ से अधिक नागरिकों तक सफलतापूर्वक अपनी पहुंच बनाई है। इस विशाल जनसंपर्क अभियान में विशेष रूप से सबसे कमजोर वर्गों को लक्षित किया गया, जिसमें 11.43 करोड़ युवाओं और 8.05 करोड़ महिलाओं को सफलतापूर्वक शामिल किया गया। पूरे अभियान की जमीनी गति को एक समर्पित स्वयंसेवक बल द्वारा भारी समर्थन प्राप्त है, जिसमें 1.17 लाख से अधिक जागरूक व्यक्ति स्थानीय हस्तक्षेप की सुविधा के लिए औपचारिक रूप से 'नशा मुक्ति मित्र' के रूप में इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। महत्वपूर्ण चिकित्सा मोर्चे पर, इस पहल ने 28.29 लाख लोगों के सफल उपचार और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास को सीधे तौर पर संभव बनाया है। निवारक शिक्षा भी एक प्रमुख फोकस बनी हुई है, जिसके परिणामस्वरूप देश भर के 21.73 लाख शिक्षण संस्थानों में लक्षित और संवादात्मक जागरूकता कार्यक्रमों का सफल आयोजन हुआ है।

डिजिटल ऐप और नए पुनर्वास केंद्रों का विस्तार

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय यह अच्छी तरह समझता है कि केवल जन जागरूकता फैलाना ही गहरी शारीरिक लत को प्रभावी ढंग से ठीक करने के लिए काफी नहीं है, इसलिए वे प्रभावी उपचार के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का सक्रिय रूप से विस्तार कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मदद चाहने वाले व्यक्ति बिना किसी परेशानी के आसानी से इसे खोज सकें, मंत्रालय ने हाल ही में एनएमबीए 2.0 मोबाइल ऐप पेश किया है। यह एक ऐसा डिजिटल टूल है जिसे विशेष रूप से उपयोगकर्ताओं को उनके सबसे नजदीकी और सत्यापित नशामुक्ति केंद्र तक तुरंत पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

जमीनी स्तर पर, वास्तविक उपचार क्षमता को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। 2024-25 की वित्तीय अवधि के दौरान, सरकार ने उच्च मांग वाले क्षेत्रों में सेवा देने के लिए 55 बिल्कुल नए जिला-स्तरीय नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी। यह महत्वपूर्ण विस्तार 2025-26 की अवधि में 21 अतिरिक्त केंद्रों की औपचारिक शुरुआत के साथ सुचारू रूप से जारी रहा, जिससे विभिन्न पहले से वंचित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पुनर्वास और डिटॉक्स सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है।

इसके साथ ही, जटिल प्रशासनिक बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर किया जा रहा है ताकि अग्रिम पंक्ति में काम कर रही संस्थाओं तक संसाधनों के प्रवाह को तेज किया जा सके। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ड्रग मांग न्यूनीकरण कार्ययोजना (एनएपीडीडीआर) और अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई) जैसी प्रमुख योजनाओं को लागू करने में सहायक गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिए अनुदान जारी करने की प्रक्रिया को सक्रिय रूप से आसान बना दिया है। एक बिल्कुल नई और सरल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को आधिकारिक रूप से लागू करके, मंत्रालय का स्पष्ट उद्देश्य नौकरशाही कागजी कार्रवाई को काफी कम करना, महत्वपूर्ण फंड के वितरण में तेजी लाना और यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्वास सेवाएं उन लोगों तक तेजी से पहुंचें जिन्हें इसकी सख्त जरूरत है। सरकार की यह रणनीति स्पष्ट रूप से इस बात को रेखांकित करती है कि इस गहरी सामाजिक बुराई से निपटने के लिए सिर्फ कानून ही नहीं, बल्कि सक्रिय जनभागीदारी, समय पर चिकित्सा और निरंतर पुनर्वास प्रयासों की आवश्यकता है।

सवाल-जवाब

भारत में कितने लोग शराब का सेवन करते हैं?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 18 से 75 वर्ष की आयु के लगभग 15.10 करोड़ वयस्क नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं।
युवाओं में कौन से नशे की लत सबसे ज्यादा पाई गई है?
सर्वेक्षण के मुताबिक 10 से 17 वर्ष की उम्र के 40 लाख बच्चे ओपिओइड और 30 लाख बच्चे इनहेलेंट (सूंघने वाले पदार्थ) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
'नशा मुक्त भारत अभियान' (NMBA) कब शुरू हुआ था?
यह विशाल अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था और अगस्त 2023 तक इसे देश के सभी जिलों में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया।
नशामुक्ति केंद्र खोजने के लिए सरकार ने कौन सा ऐप लॉन्च किया है?
सरकार ने 'एनएमबीए 2.0' मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसकी मदद से लोग आसानी से अपने सबसे नजदीकी नशामुक्ति केंद्र का पता लगा सकते हैं।
यह सर्वेक्षण किस संस्था द्वारा किया गया था?
यह राष्ट्रीय सर्वेक्षण नई दिल्ली स्थित एम्स के राष्ट्रीय ड्रग निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी) द्वारा आयोजित किया गया था।
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