बिहार के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल यानी एलएनजेपी में तीन डॉक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई गड़बड़ियों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन तीनों चिकित्सकों को अलग-अलग वजहों से शो-कॉज़ नोटिस थमाया है और सात दिन के भीतर जवाब मांगा है।
7 जुलाई का निरीक्षण बना वजह
दरअसल स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार 7 जुलाई को एलएनजेपी अस्पताल पहुंचे थे और वहां की व्यवस्थाओं को करीब से परखा था। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली, डॉक्टरों की मौजूदगी और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में कई खामियां पकड़ में आईं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
किस डॉक्टर पर क्या आरोप
स्वास्थ्य विभाग की जांच में तीनों डॉक्टरों पर अलग-अलग तरह की लापरवाही के आरोप लगे हैं। डॉ. श्याम किशोर पर आरोप है कि वे अस्पताल आने वाले मरीजों को इलाज के लिए अपने निजी क्लिनिक भेज देते थे, जो सरकारी सेवा में रहते हुए गंभीर अनियमितता मानी जाती है। वहीं डॉ. राजकिशोर रौशन निरीक्षण के वक्त अस्पताल में मौजूद ही नहीं मिले, यानी वे बिना बताए अपनी ड्यूटी से गायब पाए गए। तीसरे डॉक्टर, डॉ. अमरनाथ प्रसाद पर आरोप है कि वे वार्ड का राउंड नियमित रूप से नहीं लेते थे और भर्ती मरीजों की निगरानी ठीक ढंग से नहीं करते थे, जिससे मरीजों के इलाज में देरी और जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है।
सात दिन में देना होगा जवाब
स्वास्थ्य विभाग ने तीनों डॉक्टरों को भेजे नोटिस में साफ कहा है कि उन्हें सात दिनों के अंदर अपनी सफाई देनी होगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी डॉक्टर का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो नियमों के मुताबिक उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाब के आधार पर तय होगा कि किसी डॉक्टर पर क्या कदम उठाया जाए।
सरकारी अस्पतालों में सख्ती जारी
यह कोई पहला मौका नहीं है जब निशांत कुमार के निरीक्षण के बाद किसी अस्पताल में कार्रवाई हुई हो। स्वास्थ्य मंत्री लगातार राज्य के सरकारी अस्पतालों का औचक दौरा कर रहे हैं और गड़बड़ी मिलने पर तुरंत एक्शन ले रहे हैं। सरकार का कहना है कि मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मुहैया कराना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति, मरीजों को निजी क्लिनिक भेजने या वार्ड की निगरानी में लापरवाही जैसी शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस तरह की सख्ती से सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही बढ़ेगी और आम मरीजों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।




















