हाल के वर्षों में तंदुरुस्ती और सेहत को लेकर लोगों में जागरूकता उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। शरीर को स्वस्थ और चुस्त बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग कसरत केंद्रों का रुख कर रहे हैं, दौड़ लगा रहे हैं, साइकिल चला रहे हैं या विभिन्न प्रकार के मैदानी खेलों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इस सकारात्मक बदलाव के बीच, व्यायाम करते समय या खेल के मैदान में अचानक दिल की गति रुकने और दिल का दौरा पड़ने की कई घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। इस स्थिति ने आम लोगों के मन में यह चिंता पैदा कर दी है कि क्या शारीरिक मेहनत करना वास्तव में दिल की सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। इस विषय पर चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी कारणों को समझे बिना व्यायाम को जिम्मेदार ठहराना सही दृष्टिकोण नहीं है।
क्या शारीरिक व्यायाम दिल के दौरे की सीधी वजह है
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, नियमित और संतुलित तरीके से की जाने वाली शारीरिक गतिविधियां दिल को मजबूत और स्वस्थ रखने के सबसे प्रभावी साधनों में शामिल हैं। व्यायाम अपने आप में किसी बीमारी का कारण नहीं बनता, बल्कि जटिलता तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता का सही आकलन किए बिना अचानक अत्यधिक श्रम करने लगता है। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति के शरीर में पहले से कोई हृदय रोग बिना किसी लक्षण के मौजूद है, तो भारी शारीरिक श्रम उस छिपी हुई समस्या को गंभीर रूप दे सकता है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच के बुनियादी अंतर को समझना भी बेहद आवश्यक है। जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली रक्त नलिकाओं में किसी प्रकार की रुकावट आ जाती है, तब हार्ट अटैक की स्थिति बनती है। इसके विपरीत, कार्डियक अरेस्ट उस समय होता है जब हृदय की विद्युत प्रणाली यानी पावर सिस्टम में अचानक खराबी आ जाती है, जिससे दिल एकाएक प्रभावी तरीके से रक्त पंप करना पूरी तरह बंद कर देता है। दोनों स्थितियों के कारण और प्रभाव अलग होते हैं, लेकिन दोनों ही आपातकालीन चिकित्सा मांगते हैं।
छिपी हुई शारीरिक कमियां और पारिवारिक इतिहास
कुछ लोगों के दिल की बनावट या उसकी विद्युत प्रणाली में जन्मजात या अनिर्धारित असामान्यताएं हो सकती हैं। सामान्य दिनचर्या के दौरान ऐसी असामान्यताएं किसी भी तरह के लक्षण पैदा नहीं करतीं, जिससे व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ महसूस करता है। हालांकि, जब शरीर को अचानक अत्यधिक परिश्रम की स्थिति में डाला जाता है, तो दिल की धड़कन में खतरनाक उतार-चढ़ाव आ सकता है। जिन परिवारों में कम आयु में ही किसी सदस्य की हृदय रोग से अचानक मृत्यु हुई हो, उन व्यक्तियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को किसी भी गहन वर्कआउट योजना को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से व्यापक परामर्श लेना आवश्यक है।
शारीरिक गतिविधियों के दौरान शरीर कई संकेत देता है जिन्हें कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। यदि वर्कआउट करते समय बिना किसी स्पष्ट कारण के चक्कर आने लगें, बेहोशी जैसी स्थिति बने, सीने में किसी प्रकार का दबाव या बेचैनी महसूस हो, अथवा दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज या अनियमित हो जाए, तो इसे सामान्य थकावट समझने की भूल न करें। ये लक्षण किसी गंभीर अंतर्निहित समस्या की चेतावनी हो सकते हैं।
व्यायाम के समय दिल के दौरे के मुख्य कारक
गहन शारीरिक श्रम के दौरान हृदय की मांसपेशियों को सामान्य से कहीं अधिक रक्त और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यदि किसी व्यक्ति की कोरोनरी धमनियों में पहले से ही वसा या प्लाक जमा हो चुका है और नलिकाएं संकरी हो गई हैं, तो अचानक बढ़ी हुई रक्त की मांग को दिल पूरा नहीं कर पाता। कोरोनरी आर्टरी डिजीज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट संकेत या दर्द महसूस नहीं होते। व्यक्ति खुद को ऊर्जावान और पूरी तरह चुस्त महसूस कर सकता है, लेकिन उसकी रक्त नलिकाओं में रुकावट मौजूद हो सकती है। इसलिए कम उम्र होना या बाहर से फिट दिखना इस बात का पूर्ण प्रमाण नहीं है कि आंतरिक हृदय प्रणाली भी पूरी तरह सुरक्षित है।
अचानक अत्यधिक तीव्रता वाले व्यायाम का खतरा
जो लोग लंबे समय से निष्क्रिय जीवनशैली जी रहे हैं और अचानक बिना किसी तैयारी के भारी वजन उठाने लगते हैं, तेज गति से दौड़ने लगते हैं या उच्च तीव्रता वाले सत्रों में भाग लेने लगते हैं, उनका हृदय इस अचानक आए दबाव को सहन करने में असमर्थ हो सकता है। नियमित गतिविधियों से स्वास्थ्य को बेहतरीन लाभ मिलते हैं, परंतु व्यायाम की शुरुआत हमेशा धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से होनी चाहिए। शरीर की वर्तमान अनुकूलन क्षमता को ध्यान में रखकर ही वर्कआउट की तीव्रता बढ़ाई जानी चाहिए।
उत्तेजक पेय पदार्थ, निकोटीन और धूम्रपान का नकारात्मक प्रभाव
कसरत शुरू करने से पहले कई लोग ऊर्जा बढ़ाने वाले पेय पदार्थों, कैफीन की अत्यधिक मात्रा या उत्तेजक पदार्थों से युक्त प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स का उपयोग करने लगते हैं। इसके साथ ही धूम्रपान और निकोटीन का सेवन दिल की धमनियों और संपूर्ण संवहनी प्रणाली पर अतिरिक्त खिंचाव पैदा करता है। इन तत्वों के अत्यधिक इस्तेमाल से रक्तचाप और हृदय की धड़कन अचानक तीव्र हो सकती है, जो पहले से संवेदनशील दिल के लिए अत्यधिक खतरनाक साबित हो सकती है। प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक संरचना और प्रतिक्रिया देने की क्षमता भिन्न होती है, इसलिए बिना चिकित्सकीय मार्गदर्शन के किसी अन्य व्यक्ति की दिनचर्या या उत्तेजक उत्पादों की नकल करना जानलेवा साबित हो सकता है। डॉ. आशीष जय किशन, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, फोर्टिस, ओखला के अनुसार इन जोखिम कारकों की समय रहते पहचान करना दिल को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है।



















