क्या आपने कभी गुड़हल के फूलों की चाय पी है। अगर आपने अभी तक इस अनोखी ड्रिंक को नहीं आजमाया है, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। जिस प्रकार अपराजिता के फूलों से हर्बल टी बनाई जाती है, उसी प्रकार लाल और सफेद रंग के गुड़हल के फूलों से भी स्वादिष्ट और गुणकारी चाय तैयार की जाती है। फरीदाबाद के सेक्टर 37 में रहने वाले अनुराग जैन अपने घर पर नियमित रूप से गुड़हल के फूलों की चाय बनाते हैं। उनका अनुभव है कि इस चाय को बनाने के लिए लाल और सफेद दोनों तरह के फूलों का उपयोग किया जा सकता है, हालांकि वह लाल फूलों को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं।
अनुराग जैन के अनुसार, दोनों ही तरह के फूलों से चाय बनाई जा सकती है और दोनों में अपने-अपने गुण होते हैं, लेकिन दोनों में थोड़ा फर्क भी माना जाता है। लाल गुड़हल का फूल स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, इसलिए वह ज्यादातर लाल फूलों का ही चयन करते हैं। लाल फूलों से बनने वाली चाय का रंग और स्वाद दोनों ही बहुत अच्छे आते हैं, जो पीने वाले को एक अलग अनुभव देते हैं।
चाय बनाने की प्रक्रिया को साझा करते हुए अनुराग जैन बताते हैं कि सबसे पहले पानी को अच्छी तरह से उबालना होता है। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि शुरुआत में पानी के अंदर तुरंत गुड़हल का फूल नहीं डाला जाना चाहिए। पहले पानी को पूरी तरह खौलने देना चाहिए। यदि आप चाय में हल्की सी मिठास पसंद करते हैं, तो उबलते पानी में थोड़ी सी दालचीनी डाली जा सकती है। इसके अलावा, अपने व्यक्तिगत स्वाद के अनुसार इसमें इलायची और अदरक का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इन मसालों के मिलने से चाय का स्वाद पूरी तरह बदल जाता है और यह पीने में और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगने लगती है।
फूलों को पानी में डालने से पहले उनकी साफ-सफाई और गुणवत्ता की जांच करना बेहद आवश्यक है। अनुराग जैन बताते हैं कि वह फूल इस्तेमाल करने से पहले उसकी अच्छी तरह परख करते हैं। गुड़हल के फूल के बीच वाले हिस्से को खास तौर पर देख लेना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसमें कोई कीड़ा या किसी प्रकार की गंदगी तो नहीं है। फूल को अच्छी तरह साफ करने के बाद ही उसकी पंखुड़ियों और पुंकेसर वाले हिस्से को उबलते पानी में डाला जाता है। फूलों को बिना जांचे सीधे पानी में डालने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि हमेशा साफ और शुद्ध फूलों से ही सेहतमंद चाय तैयार होती है।
जब पानी में फूल डाल दिए जाते हैं, तब उसे दो से चार उबाल आने तक पकाया जाता है। जैसे-जैसे पानी में उबाल आता है, गुड़हल का फूल अपना प्राकृतिक रंग पानी में छोड़ने लगता है। धीरे-धीरे पानी का रंग बदलने लगता है और देखते ही देखते चाय तैयार होने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इस चाय को बनाने के लिए फूलों को बहुत ज्यादा देर तक उबालने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। चाय में पानी और फूलों की मात्रा को हर व्यक्ति अपने स्वाद और पसंद के हिसाब से तय कर सकता है।
अगर घर में आंवला उपलब्ध है, तो उसका उपयोग भी इस चाय को बनाते समय किया जा सकता है। पानी उबलते वक्त ही उसमें आंवला मिलाया जा सकता है। यदि आंवला घर पर मौजूद न हो, तो चाय पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद उसमें थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ा जा सकता है। नींबू मिलाने से इस हर्बल ड्रिंक का स्वाद पूरी तरह अलग और बेहतरीन हो जाता है। खट्टेपन या मिठास की मात्रा को अपनी पसंद के अनुसार कम या ज्यादा रखा जा सकता है।
अनुराग जैन का कहना है कि वह गुड़हल के फूलों की इस चाय को बनाकर जरूर पीते हैं, लेकिन इसका सेवन रोज नहीं करते हैं। वह कभी-कभी ही इस खास चाय को बनाते हैं। इस ड्रिंक को तैयार करने के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि आपके पास घर पर ताजे और साफ गुड़हल के फूल उपलब्ध होने चाहिए। यदि फूल आसानी से मिल जाएं, तो इसे घर पर ही चुटकियों में तैयार किया जा सकता है। गुड़हल के फूलों से बनने वाली यह चाय आम दूध वाली चाय से काफी अलग होती है और इसका अपना एक अलग मजा है।
यदि आप भी इस देसी ड्रिंक को आजमाने की सोच रहे हैं, तो इसकी शुरुआत हमेशा कम मात्रा से ही करें। पहली बार जब आप इसे बनाएं, तो इसका स्वाद चकने के बाद ही इसमें मीठे या खट्टेपन को बढ़ाएं। बाजार से इस चाय के लिए फूल लाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सजावटी फूलों की जगह हमेशा खाने योग्य और बिना किसी रसायन वाले फूलों का ही चयन करें। किसी भी विशेष स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे या नियमित रूप से दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों को इस तरह की किसी भी नई चीज को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले किसी विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।



















