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भारत में 10 में से 8 लोग बीपी और डायबिटीज के मुहाने पर, फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर योगेश कुमार छाबड़ा ने चेतायास्वास्थ्य
13 अग॰ 2026, 12:00 am (58 दिन पहले)· 2

भारत में 10 में से 8 लोग बीपी और डायबिटीज के मुहाने पर, फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर योगेश कुमार छाबड़ा ने चेताया

भारत में 80 प्रतिशत आबादी उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या प्रीडायबिटीज की चपेट में है। फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर योगेश कुमार छाबड़ा के अनुसार यह साइलेंट किलर युवाओं को भी तेजी से शिकार बना रहा है।

भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं और एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी हैं। इनमें उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी स्थितियां प्रमुख हैं, जिन्हें साइलेंट किलर माना जाता है। ये बीमारियां शुरुआत में किसी बड़े या अचानक लक्षण के बिना शरीर के भीतर धीरे धीरे पनपती हैं, लेकिन लंबे समय में अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। अधिकांश मामलों में मरीजों को लंबे समय तक यह अहसास भी नहीं होता कि वे किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की चपेट में आ चुके हैं।

भारत में डायबिटीज और बीपी की भयावह स्थिति

शालीमार बाग स्थित डॉक्टर योगेश कुमार छाबड़ा (नेफ्रोलॉजी यूनिट के प्रमुख और निदेशक, फोर्टिस अस्पताल) का कहना है कि भारत में लगभग 10 में से 8 लोग उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या प्रीडायबिटीज अवस्था से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा अपनी इस बीमारी से पूरी तरह अनजान रहता है। इन बीमारियों के शुरुआती संकेत बेहद सामान्य और हल्के होते हैं, जो दैनिक जीवन में आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच न कराने की स्थिति में मरीज को तब तक पता नहीं चलता जब तक स्थिति गंभीर रूप न ले ले।

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शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है गंभीर असर

उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी बीमारियां इंसान की रोजाना की कार्यप्रणाली पर तुरंत कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती हैं। इसी कारण लोग इनकी रोकथाम या जांच को लेकर लापरवाह बने रहते हैं। हालांकि, खून में शुगर का बढ़ा हुआ स्तर और रक्त वाहिकाओं पर पड़ता अत्यधिक दबाव समय के साथ शरीर की अंदरूनी बनावट को खोखला कर देता है। अगर इन बीमारियों का समय पर परीक्षण और इलाज न किया जाए तो यह शरीर की मुख्य रक्त धमनियों को क्षति पहुंचाती हैं।

समय बीतने के साथ इसका सीधा असर शरीर के सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण अंगों पर दिखाई देता है। अनियंत्रित बीपी और ब्लड शुगर के कारण दिल, गुर्दे (किडनी), मस्तिष्क और आंखों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। चिकित्सीय विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इलाज न मिलने पर मरीजों में हार्ट अटैक (दिल का दौरा), स्ट्रोक, किडनी फेलियर या किडनी की गंभीर बीमारियां और आंखों की रोशनी जाने जैसा बड़ा खतरा पैदा हो जाता है।

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है खतरा

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अब यह बीमारियां केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि युवा वयस्क भी बड़े पैमाने पर इनकी चपेट में आ रहे हैं। आधुनिक दौर की वर्कलाइफ, काम का बढ़ता दबाव और गतिहीन जीवनशैली को युवाओं में इस बीमारी के फैलने की मुख्य वजह माना जा रहा है। चूंकि युवा अक्सर मामूली शारीरिक थकान या सिरदर्द को गंभीरता से नहीं लेते और जब तक कोई स्पष्ट या बड़ा लक्षण सामने नहीं आता तब तक जांच नहीं कराते, इसलिए यह समस्या उनके लिए और भी अधिक खतरनाक साबित हो रही है।

खराब जीवनशैली और अस्वस्थ आदतें बनीं मुख्य कारण

उच्च रक्तचाप और उच्च शुगर दोनों को प्राथमिक रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की श्रेणी में रखा जाता है। जो लोग दैनिक जीवन में शारीरिक व्यायाम नहीं करते, जिनका खान-पान अस्वस्थ और प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर है, जिनका वजन नियंत्रित सीमा से अधिक है, जो लंबे समय तक अत्यधिक तनाव में रहते हैं या जिनकी नींद पूरी नहीं होती है, उन्हें इन बीमारियों का सबसे अधिक जोखिम होता है। इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से धूम्रपान करते हैं या शराब का सेवन करते हैं, उनके लिए यह खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

किन लोगों के लिए नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है

लक्षणों की अनुपस्थिति के कारण बिना चिकित्सकीय टेस्ट के हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का सही आंकलन करना असंभव है। इसलिए विशेषज्ञों द्वारा कुछ विशेष वर्ग के लोगों को नियमित रूप से जांच कराने की सलाह दी जाती है

  • जिन व्यक्तियों की आयु 30 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है।
  • जिनके परिवार में डायबिटीज या उच्च रक्तचाप की मेडिकल हिस्ट्री रही हो।
  • जिनका शरीर का वजन सामान्य से काफी ज्यादा या मोटापे की श्रेणी में आता है।
  • जो लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं और अस्वस्थ जीवनशैली का पालन करते हैं।

बचाव के प्रभावी उपाय और लाइफस्टाइल में बदलाव

इन साइलेंट किलर बीमारियों से बचने और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच कराना सबसे पहला और आवश्यक कदम है। इसके साथ ही, संतुलित और पौष्टिक आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। नियमित रूप से कोई न कोई शारीरिक व्यायाम या वॉक करना, वजन को नियंत्रित रखना तथा मानसिक तनाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करना बेहद जरूरी है। अपनी जीवनशैली में यह सकारात्मक बदलाव लाकर बीपी और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

भारत में कितने लोग हाई बीपी और डायबिटीज के खतरे में हैं?
फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टर योगेश कुमार छाबड़ा के अनुसार भारत में लगभग 10 में से 8 लोग (80%) उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से प्रभावित हैं।
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को साइलेंट किलर क्यों कहा जाता है?
इन बीमारियों के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के या सामान्य होते हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक बीमारी का अहसास नहीं होता और ये अंदर ही अंदर अंगों को नुकसान पहुंचाती हैं।
इन बीमारियों की जांच किसे और किस उम्र में करानी चाहिए?
30 साल से अधिक उम्र के लोगों, पारिवारिक इतिहास वाले व्यक्तियों, अधिक वजन वाले लोगों और अस्वस्थ जीवनशैली जीने वालों को नियमित जांच करानी चाहिए।
बीपी और शुगर अनियंत्रित रहने से शरीर के किन अंगों को नुकसान पहुंचता है?
इलाज न होने पर इससे दिल, गुर्दे (किडनी), दिमाग और आंखों की ब्लड वेसल्स को गंभीर क्षति पहुंचती है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर का जोखिम बढ़ता है।
युवाओं में डायबिटीज और बीपी बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
आधुनिक वर्कलाइफ का तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, कम नींद, अस्वस्थ खान-पान, धूम्रपान और शराब का सेवन युवाओं में इसके मुख्य कारण हैं।
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