सर्दियों के दिनों में रसोई में मिलने वाला मेथी का साग शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। अक्सर लोग इसे केवल पारंपरिक सब्जी मानकर खाते हैं, लेकिन पोषक तत्वों की दृष्टि से यह संपूर्ण सेहत को दुरुस्त रखने वाला एक शानदार सुपरफूड है। इसमें विटामिन C, विटामिन A, विटामिन K के साथ-साथ फोलेट, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और कॉपर जैसे आवश्यक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद रहते हैं। फोर्टिस, फरीदाबाद की यूनिट हेड डायटीशियन किरण दलाल ने मेथी के पत्तों से मिलने वाले शारीरिक लाभों और इसके इस्तेमाल की बारीकियों पर प्रकाश डाला है।
रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में सहायक
डायबिटीज के मरीजों के लिए मेथी के पत्ते बेहद असरदार भूमिका निभाते हैं। इन हरे पत्तों में घुलनशील फाइबर और विशेष बायो-एक्टिव तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में पहुंचकर कार्बोहाइड्रेट के पचने और अवशोषित होने की गति को धीमा कर देते हैं। इस प्रक्रिया से इंसुलिन की कार्यक्षमता सुधरती है और भोजन के बाद अचानक शुगर लेवल में होने वाली बढ़ोतरी की रोकथाम होती है।
दिल की मजबूती और कोलेस्ट्रॉल में कमी
हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में भी मेथी का योगदान अहम है। इसमें मौजूद सैपोनिन और एंटीऑक्सिडेंट्स रक्त वाहिकाओं में हानिकारक बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के संचय को घटाने का काम करते हैं। इन वसा तत्वों के स्तर में गिरावट आने से हृदय रोगों की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।
पेट की सेहत और वजन पर नियंत्रण
पाचन क्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए मेथी के रेशे मददगार होते हैं। प्रचुर फाइबर सामग्री आंतों की सक्रियता को बेहतर बनाती है, जिससे पेट फूलने यानी ब्लोटिंग और कब्ज की पुरानी परेशानी से राहत मिलती है। इसके अलावा, फाइबर युक्त भोजन आमाशय को अधिक देर तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे अवांछित भूख रुकती है और मोटापा कम करने में आसानी होती है।
खून की कमी और हीमोग्लोबिन सुधार
एनीमिया से जूझ रहे लोगों के लिए मेथी के पत्तों का सेवन बेहद उपयोगी रहता है। इनमें प्राकृतिक आयरन और विटामिन C दोनों एक साथ मौजूद होते हैं। यह संयोजन शरीर में पहुंचकर रक्त निर्माण की गति तेज करता है और हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है।
पकाने और सेवन का सही ढंग
मेथी का पूरा पोषण हासिल करने के लिए पकाने की तकनीक पर ध्यान देना आवश्यक है। ज्यादा तापमान पर उबालने या बहुत देर तक पकाने से इसमें मौजूद गर्मी के प्रति संवेदनशील तत्व जैसे विटामिन C और फोलेट नष्ट हो जाते हैं। इसलिए इसे हल्की भाजी, दाल में मिलाकर, रोटी अथवा पराठे के आटे में गूंथकर, अथवा सूप और स्मूदी के रूप में लेना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, खाते समय थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ना चाहिए, क्योंकि नींबू का विटामिन C वनस्पतियों से प्राप्त नॉन-हीम आयरन के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है।
विशेष सावधानियां
हालांकि मेथी बेहद गुणकारी है, लेकिन कुछ चिकित्सीय स्थितियों में सावधानी बरतनी चाहिए। जो व्यक्ति पहले से मधुमेह की नियमित गोलियां ले रहे हैं या रक्त को पतला करने वाली ब्लड थिनर दवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें अधिक मात्रा में मेथी का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक अथवा डायटिशियन से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

















