त्योहारों के मौसम में बाजारों में कई तरह के रंग और गुलाल बिकते दिखाई देते हैं। पर्व की मस्ती और उत्साह अपनी जगह बेहद खास है, परंतु अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहना सबसे प्राथमिक आवश्यकता है। त्योहार की उमंग में की गई जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है। इसलिए खरीदारी करते समय रंगों की अतिरिक्त चमक को उनकी बेहतर गुणवत्ता समझने की भूल बिल्कुल न करें। उत्पादक अक्सर रंगों को अधिक गाढ़ा, चमकदार और सस्ता तैयार करने के उद्देश्य से उनमें कई प्रकार के हानिकारक रसायन मिला देते हैं।
सस्ते और चमकदार रंगों के पीछे जहरीले तत्वों का जाल
नोएडा में मेडिकल कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. रुपाली भारद्वाज के अनुसार, आजकल रंग और गुलाल के उत्पादन में रासायनिक तत्वों का उपयोग इसलिए अत्यधिक बढ़ गया है ताकि लागत कम आए, रंग बेहद गहरा दिखे और उसमें असाधारण चमक पैदा हो सके। जब इन औद्योगिक रसायनों को सामान्य पाउडर में मिलाया जाता है, तो वे सीधे तौर पर विषैले रूप में तब्दील हो जाते हैं। ऐसे मिश्रण त्वचा और शरीर के संपर्क में आते ही भारी शारीरिक नुकसान पहुंचाते हैं।
रंगों में मिलाए जाने वाले प्रमुख हानिकारक रसायन
विभिन्न शेड्स तैयार करने और उनमें खास असर लाने के लिए कई घातक पदार्थों का उपयोग किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित तत्व शामिल हैं
- मरकरी सल्फाइट: इसका प्रयोग गहरा लाल रंग तैयार करने के लिए किया जाता है।
- मेलेकाइट ग्रीन: यह रसायन गहरे हरे रंग को विकसित करने के लिए मिलाया जाता है।
- जंक्शन वॉइलेट: बैंगनी रंग का गहरा शेड तैयार करने के लिए इस रसायन का उपयोग होता है।
- एल्यूमिनियम ब्रोमाइड: सिल्वर या चांदी जैसी चमक देने वाले रंगों में इसे मिलाया जाता है।
- ग्लास पार्टिकल्स: पाउडर में अतिरिक्त चमक और शाइन पैदा करने के लिए कांच के बारीक कण मिलाए जाते हैं।
- लैड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट: यह भारी धातुएं रंगों को स्थायित्व और तीव्र शेड देने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।
शरीर पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभाव
ये जहरीले तत्व शरीर के अलग-अलग अंगों पर अत्यंत विनाशकारी असर डालते हैं। लैड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट और मरकरी सल्फाइड जैसे यौगिक इतने खतरनाक होते हैं कि वे गर्भवती महिलाओं में प्लेसेंटा बैरियर को भी पार कर सकते हैं। इसके चलते गर्भस्थ शिशु और नवजात बच्चों के विकास और स्वास्थ्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
त्वचा पर इन रसायनों के संपर्क से लाल चकत्ते उभर आते हैं और जलने जैसे गहरे निशान बन जाते हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में डर्मेटाइटिस कहा जाता है। इसके अलावा, कांच के बारीक टुकड़े त्वचा की ऊपरी सतह को खुरचकर फाड़ देते हैं, जिससे गहरे घाव हो सकते हैं। आंखों में इन रासायनिक रंगों के जाने से तीव्र जलन, लालिमा और आंखों के भीतर घाव उत्पन्न हो जाते हैं।
ये सभी तत्व कार्सिनोजेनिक प्रकृति के होते हैं, जो लंबे समय में गंभीर रोग पैदा कर सकते हैं। इनके संपर्क में आने से त्वचा अत्यधिक रूखी और बेजान हो जाती है तथा पुरानी एलर्जी भड़क सकती है। जिन व्यक्तियों को पहले से त्वचा, फेफड़े या आंखों से जुड़ी समस्याएं हैं, उनके लिए यह रसायन स्थिति को जानलेवा हद तक बिगाड़ सकते हैं।
खरीदारी के दौरान लेबल जांचने की सावधानी
डॉ. रुपाली बताती हैं कि इन आम रसायनों के अतिरिक्त भी कई अन्य घातक यौगिक हैं जिनका इस्तेमाल आजकल रंग और खुशबूदार गुलाल तैयार करने में धड़ल्ले से किया जा रहा है। बाजार में मौजूद हर उत्पाद के सभी रसायनों को याद रखना भले ही संभव न हो, लेकिन खरीदारी के समय पैकेट पर मुद्रित घटकों की सूची पढ़ना अनिवार्य होना चाहिए।
यदि पैकेट पर इन रासायनिक तत्वों का उल्लेख दिखाई दे, तो ऐसे रंगों को तुरंत अस्वीकार कर देना चाहिए। ग्राहकों को विश्वसनीय ब्रांड्स के अच्छी गुणवत्ता वाले हर्बल गुलाल की ओर रुख करना चाहिए, हालांकि उनके पैकेट पर भी लिखी सामग्री को ध्यानपूर्वक जांच लेना ही समझदारी है।



















