मासिक धर्म यानी पीरियड्स के दौरान अक्सर महिलाएं और लड़कियां जिम जाने या किसी भी तरह की एक्सरसाइज करने से बचती हैं। समाज में फैली इस धारणा के पीछे मुख्य कारण पेट दर्द, अत्यधिक थकान और शरीर में कमजोरी बढ़ने का डर होता है। हालांकि अगर कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है और शरीर इजाजत देता है, तो इन दिनों में हल्की से मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधियां जारी रखी जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्कआउट का चयन और उसकी तीव्रता शारीरिक क्षमता तथा सहूलियत के हिसाब से तय की जानी चाहिए।
शरीर के संकेतों को समझना और वर्कआउट का समय तय करना
गाजियाबाद स्थित ट्रैप गॉड एरिना जिम की ट्रेनर मिलन चपराना का मानना है कि पीरियड्स की वजह से अपनी फिटनेस दिनचर्या को पूरी तरह रोक देना जरूरी नहीं है। इन दिनों में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का हल्का या मध्यम वर्कआउट करना शरीर को एक्टिव रखने के लिए पर्याप्त होता है। हालांकि एक्सरसाइज शुरू करने से ठीक पहले अपनी शारीरिक स्थिति का आकलन करना बहुत जरूरी है। पीरियड्स के शुरुआती दिनों में पेट में ऐंठन, मांसपेशियों में खिंचाव, सुस्ती और थकान अधिक महसूस हो सकती है। ऐसे समय में शरीर द्वारा मिलने वाले संकेतों को नजरअंदाज करके जबरदस्ती कसरत करना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
सही कसरत का चुनाव और वजन की सीमा
पीरियड्स के दौरान भारी एक्सरसाइज के बजाय वॉक करना, हल्की स्ट्रेचिंग करना और कम वजन के साथ एक्सरसाइज करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है। जो महिलाएं आम दिनों में हैवी वेट ट्रेनिंग करती हैं, उन्हें इन दिनों अपने वजन और ट्रेनिंग की तीव्रता में कटौती करनी चाहिए। फिटनेस एक्सपर्ट के अनुसार, अपनी सामान्य क्षमता की तुलना में लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक ही वजन उठाकर कसरत की जानी चाहिए, बशर्ते शरीर पूरी तरह सहज महसूस कर रहा हो।
शरीर के हिस्सों के हिसाब से वर्कआउट का चुनाव करना भी फायदेमंद रहता है। उदाहरण के लिए, अपर बॉडी की हल्की कसरत जैसे चेस्ट, बाइसेप्स और ट्राइसेप्स की ट्रेनिंग आसानी से की जा सकती है। इसके विपरीत, अगर लोअर बॉडी की कसरत करने से पेट या कमर के निचले हिस्से में दर्द और असहजता बढ़ती है, तो लोअर बॉडी वर्कआउट को कुछ दिनों के लिए टाल देना ही बेहतर होता है। इसके अलावा अत्यधिक भारी वजन उठाने और हाई इंटेंसिटी वर्कआउट से इन दिनों दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
पोषण, डिहाइड्रेशन से बचाव और आराम की जरूरत
मासिक धर्म के दौरान केवल एक्सरसाइज के तरीकों में बदलाव करना ही काफी नहीं है, बल्कि सही खानपान पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए दैनिक आहार में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और हेल्दी फैट को संतुलित मात्रा में शामिल किया जाना चाहिए। घर का बना सादा, पौष्टिक और संतुलित भोजन लेना सबसे उत्तम रहता है, जबकि अत्यधिक मसालेदार, तला-भुना और जंक फूड खाने से परहेज करना चाहिए।
वर्कआउट करने वाली महिलाओं को अपने शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखनी चाहिए। पानी पीने की जरूरत हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, मौसम और कसरत के स्तर के आधार पर अलग हो सकती है। अगर कभी कसरत के दौरान अत्यधिक थकान या कमजोरी महसूस हो, तो कसरत जारी रखने के बजाय शरीर को आराम देना और पर्याप्त नींद लेना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्टेरॉयड के खतरों से सावधान और डॉक्टरी परामर्श के नियम
फिटनेस ट्रेनर मिलन चपराना ने जिम में इस्तेमाल किए जाने वाले स्टेरॉयड को लेकर भी सख्त चेतावनी जारी की है। उनके अनुसार, किसी भी विशेषज्ञ की सलाह के बिना स्टेरॉयड का सेवन सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। शरीर में प्रोटीन की आपूर्ति के लिए किसी शॉर्टकट के बजाय संतुलित और प्राकृतिक खानपान पर भरोसा करना चाहिए।
पीरियड्स के दौरान हर महिला का शारीरिक अनुभव एक जैसा नहीं होता है। यदि वर्कआउट करते समय अचानक तेज दर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना या असामान्य कमजोरी महसूस होने लगे, तो तुरंत एक्सरसाइज रोककर आराम करना चाहिए। यदि दर्द या असहजता की समस्या लगातार बनी रहती है या गंभीर रूप लेती है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करके सलाह लेनी चाहिए।


















