जापान में लोग बढ़ती उम्र के बाद भी बेहद फिट, चुस्त और ऊर्जावान बने रहते हैं। वहां 100 साल की उम्र पार करने के बाद भी लोग सक्रिय जीवन जीते हैं और मोटापे या उससे जुड़ी बीमारियों के शिकार बहुत कम होते हैं। जापानी लोगों की इस अद्भुत दीर्घायु और फिटनेस का सबसे बड़ा राज उनकी रोजाना की अनुशासित दिनचर्या है। प्रसिद्ध डॉक्टर सलीम ज़ैदी ने जापान की इस पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी 5 ऐसी सुबह की आदतों के बारे में बताया है, जिन्हें अपनाकर वजन को आसानी से नियंत्रित रखा जा सकता है और शरीर को बीमारियों से बचाया जा सकता है।
सुबह की शुरुआत में स्क्रीन से दूरी और गहरी सांस
जापानी लोग सुबह नींद खुलते ही अपना मोबाइल या स्मार्टफोन देखने के बजाय गहरी सांस लेने से दिन की शुरुआत करते हैं। उठते ही डिजिटल स्क्रीन पर नोटिफिकेशन देखने से मस्तिष्क पर अचानक तनाव पड़ता है। सुबह शांत मन से गहरी और लंबी सांसें लेने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है और शरीर में हॉर्मोन का संतुलन बेहतर बनता है। यह आसान अभ्यास शरीर में कोर्टिसोल नाम के तनाव हॉर्मोन को बढ़ने से रोकता है, जिससे पूरा दिन मानसिक शांति और ताजगी बनी रहती है।
खाली पेट गुनगुने पानी का सेवन और कैफीन से बचाव
रात भर की नींद के बाद शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो जाता है। जापानी जीवनशैली में सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म यानी गुनगुना पानी पीने का नियम है। गुनगुना पानी पीने से पाचन तंत्र और आंतरिक अंग धीरे-धीरे सक्रिय होते हैं। यदि सुबह उठते ही खाली पेट चाय या कॉफी पी ली जाए, तो डिहाइड्रेटेड शरीर में कोर्टिसोल का स्तर तेजी से बढ़ सकता है और पेट में एसिडिटी हो सकती है। इसलिए पहले एक गिलास गुनगुना पानी पीकर शरीर को हाइड्रेट किया जाता है, जिसके बाद चाय या कॉफी का सेवन सुरक्षित रहता है।
सुबह की धूप से बायोलॉजिकल क्लॉक को सेट करना
सुबह की ताजी धूप में कुछ समय बिताना शरीर के जैविक तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद होता है। सुबह की धूप लेने से शरीर की आंतरिक घड़ी यानी सर्कैडियन रिदम सही तरीके से सेट होती है। इससे शरीर में कोर्टिसोल का स्तर संतुलित रहता है, जिससे दिन के समय प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है और रात में गहरी व अच्छी नींद आती है। सही समय पर बेहतर नींद मिलने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुचारू रूप से काम करता है और वजन बढ़ने की समस्या नहीं होती।
'हारा' यानी पेट से सांस लेने की विशेष तकनीक
जापान में पेट को 'हारा' कहा जाता है और वहां की जीवनशैली में पेट को संपूर्ण स्वास्थ्य का केंद्र माना गया है। यह सिद्धांत आयुर्वेद से भी मेल खाता है, जहां पेट और पाचन को हर बीमारी की मुख्य वजह या समाधान माना जाता है। पेट से सांस लेने के लिए एक हाथ अपने पेट पर रखें और नाक से गहरी सांस लें। सांस खींचते समय इस बात का ध्यान रखना होता है कि पेट बाहर की तरफ फूले, न कि छाती। इस प्रक्रिया को प्रतिदिन लगभग 5 मिनट तक दोहराएं। यह धीमी और गहरी श्वसन क्रिया शरीर को आराम पहुंचाती है और तनाव से जुड़े हॉर्मोन को नियंत्रित करती है।
20 से 25 मिनट की मॉर्निंग वॉक से मेटाबॉलिज्म तेज
रोजाना सुबह 20 से 25 मिनट की सैर करना जापानी लोगों की दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा है। सुबह वॉक करने से शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी तेज हो जाता है, जिससे शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी तेजी से बर्न होती है। 20 से 25 मिनट की यह हल्की शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रण में रखने के साथ-साथ जोड़ों को स्वस्थ रखती है, जिससे लोग वृद्धावस्था में भी बिना किसी परेशानी के सक्रिय और फिट बने रहते हैं।



















