भारतीय रसोई में दूध का गिलास सिर्फ सेहत का प्रतीक नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आदत का हिस्सा है। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक ज्यादातर घरों में दूध को ताकत और सेहत से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम वात्स्य ने अपने यू ट्यूब पेज पर शेयर किए एक वीडियो में साफ किया है कि दूध का फायदा हर किसी को एक जैसा नहीं मिलता। उनके मुताबिक दिक्कत दूध के पोषक तत्वों में नहीं है, बल्कि तब शुरू होती है जब शरीर उसे ठीक से पचा नहीं पाता। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि दूध में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं और किन हालात में इसे पीने से परहेज करना चाहिए।
दूध में मौजूद पोषक तत्वों का पूरा हिसाब
डॉक्टर शुभम वात्स्य के मुताबिक दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और विटामिन बी12 जैसे कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। एक कप दूध पीने से शरीर को करीब सात से आठ ग्राम प्रोटीन और 275 ग्राम कैल्शियम मिल सकता है। दूध में मौजूद फास्फोरस, कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों को मजबूती देने का काम करता है, इसलिए इसे हड्डियों की सेहत के लिए अहम माना जाता है। वहीं दूध में पाया जाने वाला विटामिन बी12 खासतौर पर शाकाहारी लोगों के लिए फायदेमंद बताया गया है, क्योंकि यह पोषक तत्व ज्यादातर नॉनवेज खाने की चीजों में ही मिलता है। यानी पोषण के लिहाज से दूध एक भरपूर ड्रिंक है, लेकिन अगर पेट इसे पचा नहीं पा रहा तो यही पोषक तत्व शरीर के लिए फायदे की जगह परेशानी बन सकते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो दूध का पोषण से भरपूर होना इस बात की गारंटी नहीं है कि यह हर शरीर के लिए उतना ही फायदेमंद भी होगा।
इन 4 कंडीशन में दूध पीने से बचने की सलाह
लैक्टोज इनटॉलरेंस: दूध में लैक्टोज नाम की एक नेचुरल शुगर पाई जाती है। जिन लोगों का शरीर इस लैक्टोज को ठीक से पचा नहीं पाता, उन्हें पाचन से जुड़ी दिक्कतें जैसे गैस बनना, पेट फूलना और लूज़ मोशन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
एलर्जी की समस्या: कमजोर इम्यून सिस्टम की वजह से भी कुछ लोगों को दूध से एलर्जी हो जाती है। दूध में मौजूद मुख्य प्रोटीन केसिन और व्हे होते हैं। कुछ लोगों का इम्यून सिस्टम इन दोनों प्रोटीन को शरीर के लिए खतरा मान लेता है, जिसके चलते त्वचा पर चकत्ते, सूजन, पेट दर्द या उल्टी जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
एसिडिटी और रिफ्लक्स की शिकायत: फुल क्रीम दूध कुछ लोगों में पेट से जुड़ी परेशानियों को ट्रिगर कर सकता है। इससे पेट में भारीपन, बार-बार डकार आना, एसिडिटी और रिफ्लक्स जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसलिए जिन लोगों को पहले से यह शिकायत रहती है, उन्हें खासकर रात के समय दूध पीने से बचना चाहिए।
बार-बार एक्ने होने पर: हर बार एक्ने की वजह दूध ही हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ लोगों में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करने पर एक्ने तेजी से बढ़ने लगते हैं। ऐसे लोगों को अपनी डाइट में दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स के असर पर नजर रखनी चाहिए।
क्यों जरूरी है शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना
डॉक्टर शुभम वात्स्य की सलाह का सार यही है कि दूध को लेकर कोई एक नियम सबके लिए लागू नहीं होता। जिस पोषण की वजह से दूध को सेहत के लिए अच्छा माना जाता है, वही पोषण कुछ लोगों के शरीर में उल्टा असर भी दिखा सकता है। इसलिए अगर दूध पीने के बाद पेट में गैस, भारीपन, त्वचा पर चकत्ते या एक्ने जैसी दिक्कतें बार-बार महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय अपने शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है। लैक्टोज इनटॉलरेंस, एलर्जी, एसिडिटी-रिफ्लक्स या एक्ने जैसी किसी भी दिक्कत के बार-बार सामने आने पर दूध की मात्रा घटाने या इसे पूरी तरह बंद करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना ही सही तरीका है, ताकि शरीर को प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की कमी भी न हो।











