गर्मी हो या सर्दी, ज्यादातर लोग अब घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलते, लेकिन धूप से बचने के लिए ट्यूब में जो क्रीम लगी है, क्या वह अब भी उतनी ही असरदार है जितनी पहले दिन थी? यही वो सवाल है जिसे बहुत कम लोग पूछते हैं. महीनों तक एक ही सनस्क्रीन इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर लोग सिर्फ पैकेट पर छपी एक्सपायरी डेट देखकर आश्वस्त हो जाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि कई बार तय तारीख आने से पहले ही प्रोडक्ट बेअसर हो चुका होता है. ऐसी सनस्क्रीन चेहरे पर लगाने से न सिर्फ धूप से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती, बल्कि कुछ मामलों में यह त्वचा पर जलन या रिएक्शन का कारण भी बन सकती है. यही वजह है कि सिर्फ सनस्क्रीन खरीद लेना काफी नहीं है, बल्कि यह जांचना भी उतना ही जरूरी है कि जो ट्यूब हफ्तों से इस्तेमाल हो रही है, वह आज भी उतनी भरोसेमंद है या नहीं. डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. निरुपमा परवंदा ने हाल ही में इस बारे में जानकारी दी कि सनस्क्रीन रोज लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह पहचानना भी है कि वह अब भी इस्तेमाल के लायक है या नहीं. उनके मुताबिक कुछ आसान संकेत हैं, जिन्हें पहचानकर कोई भी तुरंत समझ सकता है कि उसकी सनस्क्रीन बदलने का वक्त आ गया है.
एक्सपायरी सिर्फ डेट तक सीमित नहीं
आमतौर पर लोग मानते हैं कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स लंबे समय तक खराब नहीं होते, लेकिन सनस्क्रीन के मामले में यह धारणा हमेशा सही नहीं बैठती. सनस्क्रीन में मौजूद एक्टिव इंग्रीडिएंट्स ही असल में त्वचा को यूवीए और यूवीबी किरणों से बचाने का काम करते हैं. समय बीतने के साथ या क्रीम को गलत ढंग से रखने पर यही तत्व कमजोर पड़ने लगते हैं. इसका असर यह होता है कि सनस्क्रीन धीरे-धीरे अपनी सुरक्षा क्षमता खोने लगती है, भले ही देखने में क्रीम बिल्कुल सामान्य लगे. इसीलिए सिर्फ तारीख पर भरोसा करने की बजाय क्रीम की मौजूदा हालत को भी परखना जरूरी हो जाता है. कई बार लोग यह सोचकर तसल्ली कर लेते हैं कि ट्यूब अभी आधी भरी है, इसलिए कुछ हफ्ते और चल जाएगी, जबकि अंदर मौजूद फॉर्मूला पहले ही अपनी ताकत खो चुका होता है.
ये 4 संकेत दिखें तो समझ जाइए, बदलने का वक्त आ गया
डॉ. परवंदा के अनुसार चार साफ संकेत बताते हैं कि सनस्क्रीन अब चेहरे पर लगाने लायक नहीं बची है.
- रंग बदल जाना: अगर पहले सफेद या हल्के रंग की दिखने वाली सनस्क्रीन अब पीली, भूरी या किसी और रंग की नजर आने लगे, तो इसे मामूली बदलाव समझकर नजरअंदाज न करें. रंग में यह फर्क बताता है कि प्रोडक्ट की क्वालिटी प्रभावित हो चुकी है और ऐसी क्रीम इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
- अजीब गंध आना: नई सनस्क्रीन की एक तय, सामान्य खुशबू होती है. अगर ट्यूब खोलते ही तेज, खट्टी या अटपटी गंध महसूस हो, तो यह प्रोडक्ट के खराब होने का सीधा संकेत है. ऐसी हालत में उसे चेहरे पर लगाने के बजाय तुरंत बदल देना ही समझदारी है.
- क्रीम का अलग-अलग लेयर में दिखना: अगर ट्यूब के अंदर तेल और क्रीम अलग-अलग नजर आ रहे हैं और बार-बार हिलाने पर भी दोनों ठीक से मिल नहीं पा रहे, तो यह प्रोडक्ट की स्थिरता खत्म होने का इशारा है. ऐसी सनस्क्रीन त्वचा पर बराबर असर नहीं दिखा पाती.
- बनावट का सूखा या दानेदार हो जाना: अगर क्रीम की टेक्सचर बदलकर दानेदार, फ्लेकी या बेहद रूखी हो गई है, तो इसे बिल्कुल इस्तेमाल न करें. ऐसी क्रीम त्वचा पर समान रूप से नहीं फैलती, जिससे सुरक्षा भी अधूरी रह जाती है.
डॉ. परवंदा के मुताबिक ये चारों संकेत आम तौर पर साफ नजर आते हैं, बशर्ते हर बार ट्यूब खोलने से पहले उन्हें ध्यान से परखा जाए.
गलत तरीके से रखी सनस्क्रीन भी जल्दी खराब होती है
डॉ. निरुपमा परवंदा बताती हैं कि सनस्क्रीन को कहां और कैसे रखा गया है, इसका सीधा असर उसकी गुणवत्ता पर पड़ता है. कई लोगों की आदत होती है कि वे ट्यूब को कार के डैशबोर्ड पर, खिड़की के पास या ऐसी किसी जगह रख देते हैं जहां घंटों धूप पड़ती रहती है. लगातार तेज तापमान और गर्मी सनस्क्रीन के एक्टिव तत्वों को कमजोर कर देती है, जिससे प्रोडक्ट अपनी क्षमता जल्दी खोने लगता है. अगर यात्रा पर निकल रहे हैं, तो कोशिश करें कि सनस्क्रीन को सीधी धूप में रखने के बजाय बैग के अंदर रखें. घर पर भी इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखना बेहतर माना जाता है, ताकि क्रीम लंबे समय तक अपनी असल गुणवत्ता बनाए रख सके. गर्म और नम मौसम में यह सावधानी और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव फॉर्मूले को तेजी से बिगाड़ सकता है.
सिर्फ एक्सपायरी डेट देखकर भरोसा न करें
कई बार पैकेट पर छपी तारीख अभी बाकी होती है, लेकिन गलत तरीके से रखे जाने की वजह से सनस्क्रीन पहले ही बेअसर हो चुकी होती है. इसीलिए हर बार लगाने से पहले क्रीम की बनावट, रंग और गंध पर एक नजर डाल लेना बेहद जरूरी है. यह छोटी-सी आदत त्वचा को नुकसान से बचा सकती है. जब क्रीम की खुशबू और टेक्सचर बिल्कुल पहले जैसे लगें, रंग में कोई बदलाव न हो और एक्सपायरी डेट भी बाकी हो, तभी उस सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे धूप से मिलने वाली सुरक्षा पूरी और भरोसेमंद रहती है.
सही सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की सुरक्षा के लिए जरूरी
स्किन एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि कोई भी अच्छी सनस्क्रीन तभी फायदा पहुंचाती है जब वह सही हालत में हो. एक बार खराब हो चुकी सनस्क्रीन न सिर्फ अपेक्षित सुरक्षा देने में नाकाम रहती है, बल्कि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में जलन या एलर्जी जैसी दिक्कत भी पैदा कर सकती है. यही वजह है कि सनस्क्रीन खरीदना जितना जरूरी है, समय-समय पर उसकी हालत जांचना भी उतना ही जरूरी माना जाता है. इसलिए अगली बार सनस्क्रीन की ट्यूब उठाने से पहले उसकी बनावट, रंग, गंध और एक्सपायरी डेट, चारों पर एक नजर जरूर डाल लें.











