भारतीय रसोई में गर्मागर्म पकौड़े, समोसे या पूड़ी बनाने के बाद उन्हें अतिरिक्त तेल से बचाने के लिए किचन पेपर टॉवल या टिश्यू पर निकालने का चलन आम है। अधिकांश घरों में यह माना जाता है कि ऐसा करने से स्नैक्स में मौजूद फालतू चिकनाई हट जाती है और भोजन कुछ हद तक हल्का हो जाता है। लेकिन क्या यह धारणा पूरी तरह सही है? क्या सभी तरह के टिश्यू पेपर खाने की चीज़ों के संपर्क में आने के लिए सुरक्षित होते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब समझना बेहद जरूरी है ताकि स्वाद के साथ सेहत से भी किसी तरह का समझौता न हो।
टिश्यू पेपर असल में कितना तेल सोखता है
इस बात में सच्चाई है कि किचन टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करने से कुछ हद तक चिकनाई कम होती है। इन पेपरों में मौजूद सेल्यूलोज फाइबर तली हुई चीज़ों की ऊपरी सतह पर चिपके हुए अतिरिक्त तेल को अपनी तरफ खींच लेते हैं। जब आप कचौड़ी या पूड़ी को कड़ाही से निकालकर तुरंत पेपर पर रखते हैं, तो बाहरी परत पर तैर रहा कुछ ऑयल उसमें समा जाता है। हालांकि, जो तेल तलने के दौरान भोजन के अंदर गहराई तक जा चुका होता है, उसे यह कागज़ बाहर नहीं खींच सकता। इसका सीधा अर्थ यह है कि टिश्यू केवल ऊपरी परत को साफ करता है, पूरे पकवान को फैट-फ्री नहीं बनाता।
क्या तला हुआ खाना वाकई सेहतमंद हो जाता है
केवल एक पेपर टॉवल पर पकौड़े या समोसे रख देने से वे पोषक तत्वों से भरपूर या पूरी तरह सेहतमंद नहीं बन जाते। इससे भोजन की सतह पर मौजूद थोड़ी सी चिकनाई जरूर कम होती है, लेकिन उस खाद्य पदार्थ की कुल कैलोरी और वसा की मात्रा लगभग उतनी ही बनी रहती है। यदि आप वाकई अपने तली हुई चीज़ों को कम नुकसानदायक बनाना चाहते हैं, तो तलते समय तेल के सही तापमान का ध्यान रखना, अच्छी गुणवत्ता वाली कुकिंग सामग्री चुनना और मात्रा को सीमित रखना अधिक समझदारी भरा कदम है। यह सोचकर बेफिक्र हो जाना गलत है कि टिश्यू पर रखने के बाद आप मनचाही मात्रा में तली हुई चीज़ें खा सकते हैं।
कौन-से टिश्यू का इस्तेमाल करना चाहिए
भोजन के लिए हमेशा केवल खास तौर पर बनाए गए फूड-ग्रेड किचन टिश्यू पेपर या पेपर टॉवल का ही उपयोग करना चाहिए। इन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि ये खाद्य पदार्थों के सीधे संपर्क में आने पर सुरक्षित रहें। इसके विपरीत, चेहरे पर इस्तेमाल होने वाले फेशियल टिश्यू या रंग-बिरंगे सजावटी नैपकिन इस काम के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं माने जाते क्योंकि वे भोजन के लिहाज से डिजाइन नहीं किए गए होते हैं।
अखबार या प्रिंटेड कागज का प्रयोग क्यों है खतरनाक
आज भी कई छोटी दुकानों या घरों में समोसे, कचौड़ी और पकौड़ों को सीधे पुराने अखबार या छपे हुए कागजों पर परोस दिया जाता है, जो कि सेहत के लिहाज से बेहद नुकसानदेह है। जब गर्म खाद्य पदार्थ ऐसे कागजों के संपर्क में आते हैं, तो छपाई में इस्तेमाल होने वाली स्याही और खतरनाक रासायनिक तत्व भोजन में घुल जाते हैं। यही वजह है कि देश के तमाम खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI लोगों को अखबार या प्रिंटेड पेपर पर खाने की चीज़ें रखने से सख्त परहेज करने की सलाह देते हैं।
टिश्यू पर कितनी देर तक भोजन रखना सही है
तले हुए स्नैक्स को किचन टिश्यू पर लगभग तीस सेकंड से लेकर दो मिनट तक रखना ही काफी माना जाता है। इतने समय में ऊपरी सतह का अतिरिक्त तेल आसानी से निकल जाता है। यदि आप इन चीज़ों को बहुत लंबी अवधि तक पेपर पर छोड़ देते हैं, तो अंदर से निकलने वाली भाप के कारण उनकी कुरकुरी बनावट खत्म हो सकती है और कई बार तो कागज़ भी भोजन की सतह से चिपक सकता है।
तेल की मात्रा घटाने के अन्य बेहतर उपाय
यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में बनने वाले स्नैक्स कम से कम तेल अपने अंदर सोखें, तो सिर्फ कागज़ पर निर्भर रहने के बजाय कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखें। हमेशा तेल को एक निश्चित और सही तापमान यानी लगभग 170 से 190 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने के बाद ही उसमें चीज़ें डालें। यदि तेल बहुत ज्यादा ठंडा होगा, तो पकवान जरूरत से ज्यादा चिकनाई पी लेगा। इसके अलावा, कड़ाही से निकालने के बाद स्नैक्स को कुछ देर के लिए किसी मेटल वायर रैक पर रखना भी फालतू तेल को नीचे टपकाने में काफी मददगार साबित होता है।



















