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मानसून में सब्जी खरीदते वक्त ये गलती पड़ सकती है भारी, फूड पॉइजनिंग तक का खतरास्वास्थ्य
3 घंटे पहले· 3

मानसून में सब्जी खरीदते वक्त ये गलती पड़ सकती है भारी, फूड पॉइजनिंग तक का खतरा

बारिश के मौसम में बढ़ी नमी की वजह से कुछ खास सब्जियों में बैक्टीरिया और कीड़े तेजी से पनपते हैं, जिससे पेट में इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. जानिए कौन सी सब्जियां मानसून में सावधानी से खानी चाहिए और कौन सी अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं.

पूजा भट्टपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही सेहत के लिए कई छिपे खतरे भी लेकर आता है. इस मौसम में हवा में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है और यही नमी बैक्टीरिया, फंगस और तरह-तरह के सूक्ष्म जीवों के पनपने के लिए एकदम मुफीद माहौल बना देती है. डॉक्टर और सेहत से जुड़े जानकार बार-बार यह सलाह देते हैं कि मानसून में खानपान को लेकर खास सतर्कता बरती जाए, और इसकी सबसे बड़ी वजह है रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाली कुछ सब्जियां, जिन्हें इस मौसम में सीमित मात्रा में खाना या फिलहाल टाल देना ही समझदारी है.

सबसे पहले बात पत्तेदार सब्जियों की. पालक, मेथी, सरसों का साग, बथुआ, चौलाई और पत्तागोभी जैसी सब्जियां बारिश के दिनों में मिट्टी और बारिश के पानी के सीधे संपर्क में रहती हैं. इस वजह से इनकी पत्तियों में कीड़े-मकौड़े और बैक्टीरिया आसानी से चिपक जाते हैं. अगर इन्हें ठीक से धोकर साफ नहीं किया गया तो पेट में इन्फेक्शन, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

फूलगोभी और पत्तागोभी में छिपी नमी का खतरा

फूलगोभी और पत्तागोभी की बनावट ऐसी होती है कि इनमें कई परतें एक के ऊपर एक चढ़ी रहती हैं. इन्हीं परतों के बीच नमी फंसी रह जाती है और कई बार छोटे-छोटे कीड़े भी छिपे रहते हैं जो ऊपर से दिखाई नहीं देते. मानसून में इन सब्जियों के जल्दी खराब होने की आशंका भी सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा रहती है. अगर सफाई में जरा भी कोताही हुई तो शरीर में इन्फेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

मशरूम खरीदते वक्त बरतें अतिरिक्त सावधानी

मशरूम पहले से ही नमी वाले माहौल में उगता है, इसलिए बरसात के दिनों में इसकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका और बढ़ जाती है. बाजार में मिलने वाला मशरूम मानसून में जल्दी खराब हो सकता है, और अगर पुराना या खराब मशरूम खा लिया जाए तो पेट दर्द, उल्टी और पाचन से जुड़ी दिक्कतें सामने आ सकती हैं. इसलिए सलाह दी जाती है कि सिर्फ ताजा और भरोसेमंद जगह से खरीदा गया मशरूम ही इस्तेमाल में लाया जाए.

बैंगन में बाहर से नहीं दिखते अंदर के कीड़े

बरसात में बैंगन में कीड़े लगने की घटनाएं आम हो जाती हैं. दिक्कत यह है कि बाहर से देखने पर बैंगन एकदम ठीक और ताजा नजर आता है, जबकि अंदर कीड़े मौजूद हो सकते हैं. इसलिए बैंगन खरीदते समय और बाद में उसे काटते-पकाते समय दोनों ही वक्त पूरी सावधानी बरतनी जरूरी है.

कच्ची खाई जाने वाली सलाद की सब्जियां भी जोखिम में

खीरा, टमाटर, मूली और गाजर जैसी सब्जियां आमतौर पर सलाद के तौर पर बिना पकाए ही खाई जाती हैं. मानसून में इन पर बैक्टीरिया और मिट्टी की गंदगी जमा होने का खतरा और बढ़ जाता है. अगर इन्हें अच्छी तरह धोए बिना कच्चा खा लिया जाए तो पेट के इन्फेक्शन की आशंका बढ़ सकती है. इसलिए बेहतर यही है कि इन्हें अच्छी तरह से साफ करने के बाद ही खाया जाए, या फिर हल्का पकाकर इस्तेमाल किया जाए.

आखिर मानसून में सब्जियां जल्दी क्यों खराब होती हैं

दरअसल बारिश के मौसम में नमी और तापमान का जो मेल बनता है, वह सूक्ष्म जीवों के पनपने के लिए एकदम अनुकूल वातावरण तैयार कर देता है. खेतों में भरा हुआ पानी, गीली मिट्टी और सब्जियों की ढुलाई के दौरान बढ़ी हुई नमी, इन सबकी वजह से सब्जियां सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा तेजी से दूषित हो सकती हैं. यही वजह है कि मानसून के महीनों में खाने-पीने की चीजों की सफाई और ताजगी पर खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है.

कौन सी सब्जियां मानसून में अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं

हर सब्जी से परहेज करने की जरूरत नहीं है. लौकी, तोरी, तुरई, परवल, कद्दू, करेला और भिंडी जैसी ताजी सब्जियां मानसून के दौरान अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं. हालांकि इनके साथ भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन्हें अच्छी तरह धोकर और अच्छी तरह पकाकर ही खाया जाए, तभी इनसे जुड़ा जोखिम कम रहता है.

इसका आप पर असर

यह खबर सीधे आपकी सेहत और रोजाना की रसोई से जुड़ी है.

  • आम लोगों के लिए: पालक, मेथी, फूलगोभी, पत्तागोभी, मशरूम, बैंगन और सलाद में खाई जाने वाली सब्जियां खरीदते और बनाते वक्त इस मौसम में अतिरिक्त सफाई और अच्छी तरह पकाने की जरूरत है, वरना पेट इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है.
  • घर के बजट पर असर: लौकी, तोरी, तुरई, परवल, कद्दू, करेला और भिंडी जैसी अपेक्षाकृत सुरक्षित सब्जियों को प्राथमिकता देकर परिवार डॉक्टर के खर्च और बीमारी की छुट्टी से बच सकता है.

सवाल-जवाब

मानसून में कौन सी सब्जियों से परहेज करना चाहिए?
पालक, मेथी, सरसों, बथुआ, चौलाई, पत्तागोभी, फूलगोभी, मशरूम और बैंगन जैसी सब्जियों का सेवन इस मौसम में सीमित मात्रा में करने या सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
पत्तेदार सब्जियां मानसून में खतरनाक क्यों मानी जाती हैं?
बारिश के पानी और मिट्टी के सीधे संपर्क में आने से इनमें कीड़े-मकौड़े और बैक्टीरिया आसानी से जमा हो जाते हैं, जिससे पेट संबंधी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.
फूलगोभी और पत्तागोभी में क्या दिक्कत होती है?
इनकी कई परतों के बीच नमी और छोटे कीड़े छिपे रह सकते हैं, जो ठीक से साफ न करने पर संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं.
मशरूम खाने से पहले क्या ध्यान रखें?
मानसून में मशरूम जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए सिर्फ ताजा और भरोसेमंद जगह से खरीदा गया मशरूम ही खाना चाहिए क्योंकि खराब मशरूम से उल्टी और पेट दर्द हो सकता है.
बैंगन में कीड़े का पता कैसे चलेगा जब वह बाहर से ठीक दिखे?
बैंगन बाहर से ठीक दिखने पर भी अंदर कीड़े हो सकते हैं, इसलिए इसे खरीदते और काटते वक्त ध्यान से जांचना जरूरी है.
क्या सलाद में खाई जाने वाली सब्जियां भी असुरक्षित हैं?
खीरा, टमाटर, मूली और गाजर जैसी सब्जियों पर मानसून में बैक्टीरिया और गंदगी जमा होने का खतरा रहता है, इसलिए इन्हें अच्छी तरह धोकर या हल्का पकाकर खाना बेहतर है.
मानसून में कौन सी सब्जियां अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं?
लौकी, तोरी, तुरई, परवल, कद्दू, करेला और भिंडी जैसी ताजी सब्जियां अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती हैं, बशर्ते इन्हें अच्छी तरह धोकर और पकाकर खाया जाए.
मानसून में सब्जियां जल्दी खराब क्यों होती हैं?
बारिश में नमी और तापमान का मेल सूक्ष्म जीवों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है, और खेतों का पानी, गीली मिट्टी व ढुलाई के दौरान बढ़ी नमी सब्जियों को जल्दी दूषित कर देती है.
पूजा भट्ट
लेखक के बारे मेंपूजा भट्टहेल्थ संवाददाता लखनऊ
विशेषज्ञताहेल्थ समाचार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा रिपोर्टिंग, वेलनेस, फ़िटनेस, पोषण, स्वास्थ्य नीति, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, मानसिक स्वास्थ्य

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो चिकित्सा ख़बरों, वेलनेस, स्वास्थ्य नीति, फ़िटनेस और सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट को कवर करती हैं। वे अहम स्वास्थ्य घटनाक्रमों और उभरते चिकित्सा रुझानों पर रिपोर्ट करती हैं।

पूजा भट्ट एक हेल्थ संवाददाता हैं जो हेल्थकेयर पत्रकारिता — चिकित्सा ख़बरों, सार्वजनिक स्वास्थ्य अपडेट, वेलनेस रुझानों, अस्पताल व स्वास्थ्य तंत्र की रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य नीति — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे ब्रेकिंग हेल्थ स्टोरी, रोग जागरूकता, चिकित्सा अनुसंधान, फ़िटनेस, पोषण और हेल्थकेयर तकनीक की प्रगति कवर करती हैं। सटीकता और स्पष्टता पर मज़बूत ज़ोर के साथ पूजा ऐसी जानकारीपूर्ण रिपोर्टिंग देती हैं जो पाठकों को जटिल चिकित्सा विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करती है। उनकी कवरेज में सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल, हेल्थकेयर तक पहुँच, निवारक देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और चिकित्सा में उभरते नवाचार शामिल हैं।

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