मौसम में बदलाव आते ही सर्दी, जुकाम, बदन टूटना और हरारत महसूस होना सामान्य माना जाता है। अधिकांश लोग इसे मौसमी उतार-चढ़ाव समझकर घरेलू उपचारों के सहारे छोड़ देते हैं। जब बुखार अप्रत्याशित रूप से काफी तीव्र हो जाए, सिर में असहनीय टीस उठे, आंखों के पिछले हिस्से में खिंचाव व पीड़ा महसूस हो और अत्यधिक कमजोरी के साथ भूख लगना पूरी तरह बंद हो जाए, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह शारीरिक स्थिति सीधे तौर पर डेंगू संक्रमण की ओर इशारा कर सकती है। चूंकि ऐसे शारीरिक लक्षण सामान्य वायरल फीवर या अन्य मौसमी संक्रमणों में भी उभर आते हैं, इसलिए सिर्फ लक्षणों को देखकर निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय मार्गदर्शन की अहमियत समझाई गई है।
चिकित्सीय दृष्टिकोण से, डॉ. हतिंदर जीत सिंह सेठी, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन विभाग, फोर्टिस हॉस्पिटल, मानेसर, गुड़गांव के अनुसार सही वक्त पर विशेषज्ञ की देखरेख में पहुंचना बेहद जरूरी होता है। जब भी बुखार लगातार दो से तीन दिनों से अधिक समय तक बना रहे या शारीरिक दुर्बलता बढ़ने लगे, तो मरीज को बिना किसी देरी के अस्पताल या क्लिनिक जाकर अपनी जांच करानी चाहिए।
जांच के चरण और प्लेटलेट्स की नियमित निगरानी
चिकित्सक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए खून की विशिष्ट जांच करवाने का परामर्श देते हैं। संक्रमण के शुरुआती दिनों में पुष्टि करने के लिए NS1 एंटीजन टेस्ट कराया जाता है। बीमारी के कुछ दिन बीत जाने के उपरांत शरीर में एंटीबॉडी के स्तर को मापने के लिए एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं। इसके साथ ही मरीज के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या और शरीर के भीतर जल स्तर की लगातार निगरानी की जाती है। यदि प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से घटने लगे या डिहाइड्रेशन बढ़ जाए, तो मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। सही समय पर कराई गई जांच बीमारी के स्तर को समझने में बहुत मददगार होती है।
हाइड्रेशन बनाए रखना और दवाओं का सही चयन
इस संक्रमण की अवस्था में भरपूर शारीरिक विश्राम और प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य लाभ के लिए अनिवार्य माना जाता है। केवल साधारण पानी पर निर्भर रहने के बजाय इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। नारियल पानी, ओआरएस (ORS) का घोल और अन्य पोषक तरल पदार्थ लगातार पीने चाहिए, जिससे शरीर में पानी और आवश्यक मिनरल्स की कमी न होने पाए।
बुखार को नियंत्रित करने के मामले में भी सख्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। तापमान को सामान्य करने के लिए डॉक्टर के निर्देशानुसार केवल पैरासिटामोल का उपयोग करना सुरक्षित रहता है। अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से खरीदकर एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन या अन्य दर्द निवारक दवाएं (पेनकिलर्स) बिल्कुल नहीं खानी चाहिए। इन दर्दनिवारक दवाओं के सेवन से आंतरिक रक्तस्राव यानी ब्लीडिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
खतरे के गंभीर संकेत और बुखार उतरने के बाद की सतर्कता
कुछ विशेष शारीरिक लक्षणों के प्रकट होते ही तत्काल इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यदि मरीज की नाक अथवा मसूड़ों से खून रिसने लगे, लगातार उल्टियां हो रही हों, पेट में असहनीय दर्द उठे, सांस लेने में तकलीफ महसूस हो या फिर अत्यधिक कमजोरी, भारी बेचैनी, असामान्य नींद और चक्कर आने लगें, तो फौरन डॉक्टर से संपर्क साधना चाहिए।
अधिकांश मरीज यह मान लेते हैं कि बुखार उतरते ही खतरा टल चुका है, जबकि हकीकत इसके विपरीत हो सकती है। डेंगू में तापमान सामान्य होने के ठीक बाद का समय बेहद नाजुक होता है क्योंकि कई मामलों में इसी चरण के दौरान जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशन) उभरती हैं। बदलते मौसम के बीच किसी भी प्रकार के तीव्र ज्वर और बदन दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सीय सलाह लेना और आवश्यक डायग्नोस्टिक टेस्ट करवाना ही सबसे सुरक्षित मार्ग है।



















