ऋतु परिवर्तन के दौर में तापमान का उतार-चढ़ाव अक्सर सेहत पर भारी पड़ने लगता है। ऐसे संवेदनशील समय में सर्दी, जुकाम, लगातार खांसी और मौसमी बुखार के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। जब पर्यावरण में बदलाव आता है, तो शरीर पर कई तरह के बाहरी संक्रमण हमला करने की कोशिश करते हैं। इन मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए शरीर की स्वाभाविक रोग प्रतिरोधक क्षमता को चुस्त-दुरुस्त रखना बेहद आवश्यक हो जाता है। इसके लिए किसी महंगे उपचार या दुर्लभ उत्पादों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हर भारतीय घर की रसोई और किचन गार्डन में ऐसी कई साधारण वस्तुएं उपलब्ध हैं जिन्हें नियमित आहार में शामिल कर प्राकृतिक सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकता है।
रसोई और बगीचे की इन पांच चीजों से मजबूत करें सुरक्षा तंत्र
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. विद्या गुप्ता का कहना है कि काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, तुलसी और पुदीना जैसी रोजमर्रा की चीजें हर रसोई में सरलता से मिल जाती हैं। पारंपरिक रूप से ये सभी तत्व सदियों से हमारे खानपान का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। मौसमी उतार-चढ़ाव के दौरान इनका संतुलित और उचित उपयोग शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
इन घरेलू सामग्रियों को जरूरत के मुताबिक नियमित चाय, काढ़े या दैनिक भोजन में शामिल किया जा सकता है। जब आंतरिक रक्षा प्रणाली मजबूत रहती है, तो संक्रामक रोगाणुओं के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए मौसम में आने वाले हर बदलाव के साथ खानपान की आदतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से मजबूत बना रहे।
कच्ची हल्दी और अदरक वाले दूध की खास विधि
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए रसोई में उपलब्ध सामग्रियों से अदरक, कच्ची हल्दी और काली मिर्च का पेय भी झटपट तैयार किया जा सकता है। यह पारम्परिक नुस्खा शरीर को आवश्यक गर्माहट और पोषण देने में सक्षम है।
इसे बनाने की विधि बेहद सरल है
- सबसे पहले एक बर्तन में एक गिलास सादा दूध लें।
- उसमें लगभग आधा इंच ताजा अदरक का टुकड़ा कद्दूकस करके या कूटकर डालें।
- साथ ही लगभग आधा इंच कच्ची हल्दी का टुकड़ा और 3 से 4 साबुत या कुटी हुई काली मिर्च मिलाएं।
- इस पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर अच्छी तरह से उबालें ताकि सभी सामग्रियों के प्राकृतिक गुण दूध में समा जाएं।
- उबलने के बाद इस पेय को गर्मागर्म पिएं।
इस घरेलू पेय को अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने से शरीर को जरूरी पोषण हासिल होता है और मौसमी बदलाव के दौरान संक्रमणों से दूर रहने में सहायता मिलती है।
खानपान, नींद और डॉक्टर से परामर्श का रखें ध्यान
मौसम के बदलते ही जब वायरल बुखार, जुकाम और खांसी का खतरा चारों तरफ मंडराने लगे, तब केवल मसालों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। ऐसे नाजुक दौर में संतुलित पौष्टिक भोजन, भरपूर मात्रा में पानी पीना और पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही आवश्यक है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पूरी जीवनशैली में संतुलन जरूरी है।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि घर में मौजूद इन चीजों का उपयोग सामान्य खानपान और बचाव के उपाय के रूप में ही किया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार की समस्या हो, खांसी लंबे समय तक बनी रहे या किसी प्रकार के गंभीर संक्रमण के लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करना बेहद अनिवार्य है।



















