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मिर्गी के दौरों से पाना है छुटकारा, जानिए डॉक्टर निशांत याग्निक ने क्या बताए हैं बचाव के उपायस्वास्थ्य
23 अक्तू॰ 2026, 6:02 pm (5 दिन पहले)· 2

मिर्गी के दौरों से पाना है छुटकारा, जानिए डॉक्टर निशांत याग्निक ने क्या बताए हैं बचाव के उपाय

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी बिगड़ने से बार-बार दौरे पड़ते हैं। फोर्टिस मानेसर के न्यूरो सर्जरी विशेषज्ञ डॉक्टर निशांत याग्निक ने इसके कारण और रोकथाम के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी है।

मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जिसमें मस्तिष्क के भीतर होने वाली इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में असामान्य बदलाव आ जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को बार-बार दौरे पड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के दौरे के दौरान पीड़ित व्यक्ति कुछ पलों के लिए अपनी सुध-बुध खोकर बेहोश भी हो सकता है, उसके पूरे शरीर में तेज अकड़न पैदा हो सकती है या फिर हाथों और पैरों में अचानक झटके लगने शुरू हो सकते हैं। कुछ विशेष मामलों में मरीज कुछ समय के लिए आसपास की तमाम गतिविधियों से पूरी तरह अनजान और विच्छेदित हो जाता है। समाज में इस बीमारी को लेकर उचित जागरूकता का भारी अभाव है, जिसकी वजह से बहुत से मरीजों को समय रहते सही चिकित्सीय सहायता और उपचार नहीं मिल पाता है। ऐसे में इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए लोग अक्सर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास परामर्श के लिए पहुंचते हैं।

दौरे क्यों आते हैं और क्या है इसके पीछे की वजह

बार-बार दौरे पड़ने की इस समस्या के पीछे कई तरह के चिकित्सीय और बाहरी कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। मरीजों द्वारा अपनी निर्धारित दवाओं का नियमित रूप से सेवन न करना, शरीर में पर्याप्त नींद की भारी कमी होना, अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करना और कुछ संवेदनशील मरीजों के मामले में तेज चमकती हुई रोशनी जैसे ट्रिगर्स दौरे की आवृत्ति को और अधिक बढ़ा सकते हैं। हालांकि यह बात भी ध्यान रखने योग्य है कि हर एक मरीज में दौरे पड़ने के मूल कारण और उनको ट्रिगर करने वाले कारक एक दूसरे से भिन्न हो सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को नियमित रूप से दवाइयां खाने के बावजूद लगातार दौरे पड़ रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करना बेहद आवश्यक हो जाता है। मरीज की वर्तमान स्थिति और मेडिकल जांच की रिपोर्ट्स के आधार पर ही डॉक्टर यह फैसला लेते हैं कि दवा की खुराक में बदलाव करना है या फिर किसी दूसरी दवा की जरूरत है।

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दौरे के समय बरती जाने वाली सावधानियां और प्राथमिक उपचार

यदि किसी व्यक्ति के सामने अचानक किसी को मिर्गी का दौरा पड़ जाए, तो सबसे पहले उसे एक सुरक्षित स्थिति में लिटाना बेहद जरूरी होता है। मरीज के सिर के नीचे कोई भी नरम चीज़ रख देनी चाहिए ताकि उसे चोट न लगे और उसके आसपास मौजूद सभी प्रकार की कठोर तथा नुकीली चीज़ों को तुरंत दूर हटा देना चाहिए। इस संवेदनशील स्थिति के दौरान किसी भी व्यक्ति को कभी भी बलपूर्वक मरीज को कसकर पकड़ना नहीं चाहिए और न ही उसके मुंह के अंदर जबरन कोई चम्मच, वस्तु या उंगलियां डालने की कोशिश करनी चाहिए। मरीज को इस अवस्था में कभी भी जबरदस्ती पानी पिलाने या दवाएं देने का प्रयास नहीं करना चाहिए। यदि दौरा समाप्त होने के बाद भी मरीज होश में नहीं आता है, या फिर लगातार एक के बाद एक दौरे पड़ रहे हैं, या यदि कोई दौरा पांच मिनट से ज्यादा लंबी अवधि तक चल रहा है, अथवा मरीज को सांस लेने में भारी तकलीफ महसूस हो रही है, या फिर यह किसी व्यक्ति को जीवन में पड़ने वाला पहला दौरा है, तो बिना किसी देरी के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या मिर्गी का इलाज संभव है और कैसे होता है प्रबंधन

मिर्गी का पूर्ण उपचार पूरी तरह से संभव है और वास्तविकता यह है कि अधिकांश लोग अपनी सही और नियमित दवाओं के माध्यम से इस समस्या पर आसानी से काबू पा सकते हैं। हालांकि कुछ जटिल मामलों में जब तमाम दवाएं लेने के बावजूद मरीजों के स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं देखा जाता है, तब सर्जिकल प्रक्रियाओं जैसे अन्य वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जा सकता है। सही समय पर दी जाने वाली दवाइयां, नींद की गुणवत्ता में सुधार और अन्य जरूरी चिकित्सीय सहायता की बदौलत इस बीमारी से जुड़े बड़े जोखिमों को काफी हद तक टाला जा सकता है। नियमित तौर पर दवा का सेवन, पर्याप्त विश्राम और कड़े मेडिकल सुपरविजन के जरिए किसी भी तरह की गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है। समय रहते उचित उपचार शुरू करने और अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने से इस बीमारी को ठीक करने में बहुत बड़ी मदद मिलती है।

सवाल-जवाब

मिर्गी की बीमारी क्या होती है?
मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है जिसमें मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में असामान्य बदलाव के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं।
डॉक्टर निशांत याग्निक कहां कार्यरत हैं?
डॉक्टर निशांत याग्निक फोर्टिस मानेसर में वरिष्ठ सलाहकार न्यूरो सर्जरी के रूप में कार्यरत हैं।
दौरे पड़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
दवाएं नियमित रूप से न लेना, पर्याप्त नींद की कमी, शराब का सेवन और तेज चमकती रोशनी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं।
दौरा पड़ने पर मरीज के मुंह में चम्मच क्यों नहीं डालनी चाहिए?
बलपूर्वक मुंह में चम्मच या उंगलियां डालने से मरीज को चोट लग सकती है और स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।
तुरंत डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा लंबा चले, सांस लेने में तकलीफ हो, या यह मरीज का पहला दौरा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या मिर्गी का इलाज संभव है?
हाँ, अधिकांश मामलों में सही दवाओं, अच्छी नींद और उचित मेडिकल सहायता से मिर्गी के दौरों को नियंत्रित किया जा सकता है।
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टिप्पणियाँ 4

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·4 दिन पहले

दौरे के वक्त मुंह में चम्मच या उंगली डालने की बात अक्सर लोग गलत कर बैठते हैं। डॉक्टर साहब ने सही समझाया कि ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

Amit Patel@amit-patel·4 दिन पहले

आयशा जी, बिल्कुल सही कहा आपने। मैंने भी कई लोगों को ऐसा करते देखा है जो कि बहुत खतरनाक है।

Nyra Kaif@nyra-kaif·4 दिन पहले

डॉक्टर साहब ने बचाव के तरीके तो अच्छे बताए हैं, पर सिर्फ नींद पूरी करने और दवा खाने से क्या सबके दौरे रुक जाते हैं? कई बार तमाम सावधानियों के बाद भी दिक्कत बनी रहती है, मामला इतना सीधा नहीं होता।

Ananya Iyer@ananya-iyer·4 दिन पहले

बिल्कुल सही कहा नायरा, स्क्रीन पर न्यूरोलॉजिकल बीमारियां और उनके दौरे तो बस एक झटके में ठीक होते दिखा देते हैं, पर असल ज़िंदगी में डॉक्टर के चक्कर काटने और दवाइयों से भी बात पूरी नहीं बनती।

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