चिकित्सा अनुसंधान और डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश दिल के दौरे सुबह के समय आते हैं। जब व्यक्ति नींद से जागता है, तो उसका खून सबसे गाढ़ा होता है। खासकर सुबह 6 बजे से 8 बजे के बीच दिल का दौरा पड़ने के मामले सबसे अधिक दर्ज किए जाते हैं। इसका मतलब है कि जागने के बाद के शुरुआती 10 मिनट व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। 28 साल का अनुभव रखने वाले एक कार्डियोलॉजिस्ट ने इस बात से पर्दा उठाया है कि आंखें खुलते ही शरीर के भीतर क्या प्रक्रिया चलती है और क्यों तमाम लोग अनजाने में हर सुबह अपने दिल को भारी खतरे में डाल देते हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट मिला ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया है कि जब कोई व्यक्ति सोकर उठता है, तो उसका दिल विश्राम की स्थिति में होता है। दिन की शुरुआत के शुरुआती 10 मिनट कार्डियक घटनाओं के लिहाज से सबसे खतरनाक और जोखिम भरे समय होते हैं। हालांकि, यदि कुछ बुनियादी नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दिन के वे 10 मिनट क्यों होते हैं खतरनाक
जब इंसान सो रहा होता है, तब उसका खून गाढ़ा होने लगता है। पूरी रात शरीर सांस लेने और पसीने के माध्यम से पानी गंवाता रहता है, जिसका व्यक्ति को आभास भी नहीं होता है। इस प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण सुबह के समय रक्त गाढ़ा हो जाता है और रक्त वाहिकाओं के भीतर उसका प्रवाह धीमा पड़ जाता है। इसी समयावधि के दौरान पूरे दिन की तुलना में खून का थक्का जमने की आशंका सबसे अधिक बनी रहती है।
सुबह 6 बजे का समय क्यों माना जाता है संवेदनशील
यह सबसे जोखिम भरी स्थिति बन सकती है जिसमें रक्त गाढ़ा होने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है और अचानक शारीरिक हलचल शुरू हो जाती है। जब खून गाढ़ा होता है, ठीक उसी समय शरीर को नींद से जगाने के लिए कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर तेजी से ऊपर उठने लगता है। इस स्थिति के बनते ही तुरंत ब्लड प्रेशर में उछाल आ जाता है। रक्तचाप बढ़ने की वजह से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं और उन पर दबाव तीव्र गति से बढ़ जाता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा अपने चरम पर पहुंच जाता है।
तमाम लोग अलार्म की आवाज सुनते ही बिस्तर से सीधे खड़े हो जाते हैं। कई लोग बिस्तर से उठते ही फौरन किसी काम में जुट जाते हैं। कुछ लोग बिना समय गंवाए सीधे स्नान करने लगते हैं या फिर खाली पेट कॉफी पीने बैठ जाते हैं। ऐसे तौर-तरीकों के कारण दिल महज 60 सेकंड के भीतर आराम की मुद्रा से सीधे दौड़ने वाली स्थिति में पहुंच जाता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बिल्कुल ठीक नहीं है। इससे हृदय पर अतिरिक्त तनाव पैदा होता है।
सुबह जागने के तुरंत बाद क्या कदम उठाने चाहिए
विशेषज्ञों के अनुसार पहला महत्वपूर्ण कदम यह है कि किसी भी अन्य काम को करने से पहले एक गिलास पानी का सेवन किया जाए। इससे रक्त को पतला होने में मदद मिलती है। पानी का एक गिलास आपके ब्लड सर्कुलेशन को पुनः हाइड्रेट करके उसे सामान्य घनत्व में लाने में सहायता करता है, जिससे क्लॉट बनने का खतरा भी काफी घट जाता है। यह एक बेहद असरदार और उपयोगी आदत है।
दूसरा आवश्यक कदम यह है कि बिस्तर से एकदम झटके से उठकर खड़े न हों। जागने के बाद शुरुआती 2 मिनट के लिए अपने बिस्तर के किनारे पर बैठ जाएं और शरीर को धीरे-धीरे सामान्य होने दें। आपके कार्डियक तंत्र को सोने की अवस्था से सीधे खड़े होने की स्थिति में आने के लिए थोड़ा समय चाहिए होता है। केवल 2 मिनट बिस्तर पर बैठकर फिर उठने से दिल पर पड़ने वाले ऑर्थोस्टैटिक यानी अचानक खड़े होने के तनाव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
तीसरा महत्वपूर्ण कदम यह है कि सुबह खाली पेट कॉफी पीने से पहले कुछ न कुछ जरूर खा लें। सुबह 6 बजे बिना कुछ खाए कॉफी पीने से कोर्टिसोल का स्तर और अधिक बढ़ जाता है, जिससे उस नाज़ुक वक्त में आपके दिल पर और ज्यादा दबाव पड़ता है जब वह सबसे संवेदनशील अवस्था में होता है। इसलिए हमेशा पहले कुछ खाएं और उसके बाद ही कॉफी का सेवन करें। इसके लिए एक केला, कुछ बिस्कुट या कोई भी हल्का-फुल्का खाद्य पदार्थ खाया जा सकता है।
बिस्तर से उठते वक्त किन बातों का रखना चाहिए ध्यान
खून के गाढ़े होने की स्थिति में तेजी से बिस्तर से खड़े हो जाना वह सबसे खतरनाक कार्य है जिसे अधिकांश लोग अनजाने में प्रतिदिन दोहराते हैं। इस जोखिम से बचने के लिए प्रत्येक सुबह तीन विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। सबसे पहले एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। दूसरा, दो मिनट तक बिस्तर के किनारे पर बैठें और उसके बाद ही खड़े हों। तीसरा, सुबह खाली पेट कॉफी पीने से बचें और यदि कॉफी पीनी भी हो तो उससे पहले कुछ ठोस खा लें। इन उपायों से कोर्टिसोल के स्तर को स्थिर रखा जा सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर पूरी तरह नियंत्रण में रहता है।



















