आज के दौर में जब किसी भी वातानुकूलित और आधुनिक अस्पताल की इमारत को देखते ही लोगों के मन में भारी-भरकम बिल का डर सताने लगता है, तब बिहार की राजधानी में एक बिल्कुल अलग पहल शुरू हुई है। पटना में एम्स गोलंबर के पास एक ऐसा नया और पूरी तरह से आधुनिक क्लीनिक खुला है, जो आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है। इस क्लीनिक में प्रीमियम अस्पतालों जैसी सारी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन मरीजों को यहां रजिस्ट्रेशन, डॉक्टर की फीस या दवाओं के लिए एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता है। इस शानदार पहल के पीछे डॉ. रमण किशोर की सोच है, जिन्हें पूरे देश में लोग आदर के साथ 'गांव के डॉक्टर' के नाम से जानते हैं।
गांव के मेडिकल कैंप से लेकर स्थायी क्लीनिक तक का सफर
डॉ. रमण किशोर पिछले कई वर्षों से लगातार दूर-दराज के गांवों में जाकर मेडिकल कैंप लगाते रहे हैं। इन अभियानों के जरिए उन्होंने अब तक 53 हजार से अधिक ऐसे जरूरतमंद मरीजों का बिल्कुल मुफ्त इलाज किया है, जिनकी पहुंच बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं थी। गांवों में मरीजों की जांच करते समय उनके सामने एक बड़ी चुनौती लगातार आ रही थी। उन्हें कई ऐसे मरीज मिलते थे जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और उन्हें लगातार मेडिकल निगरानी और नियमित फॉलो-अप की बहुत जरूरत थी। अस्थाई मेडिकल कैंप के जरिए मरीजों की यह लगातार निगरानी कर पाना संभव नहीं हो पा रहा था। मरीजों की इसी अहम जरूरत को पूरा करने के लिए डॉ. रमण किशोर ने पटना में एक स्थायी क्लीनिक स्थापित करने का फैसला किया। इस नए क्लीनिक के शुरू होने से अब पुराने मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकती है और साथ ही नए मरीजों का भी बेहतर ढंग से इलाज किया जा रहा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और सभी जांच सुविधाएं
गांवों में लगने वाले कैंप में एक बड़ी व्यावहारिक दिक्कत यह थी कि हर विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की पूरी टीम को एक साथ लेकर जाना मुमकिन नहीं होता था। पटना में खुले इस नए क्लीनिक ने इस मुश्किल को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अब इस क्लीनिक में अलग-अलग मेडिकल विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टर एक तय समय पर मरीजों को देखने के लिए उपलब्ध रहते हैं। यहां मरीजों को इलाज के साथ-साथ सभी जरूरी जांच सुविधाएं भी बिल्कुल मुफ्त दी जा रही हैं। क्लीनिक में ब्लड प्रेशर (बीपी), शुगर, हीमोग्लोबिन, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) और ईएनटी जैसी बुनियादी जांच के लिए मरीजों से कोई पैसा नहीं लिया जाता है। इसके अलावा यहां ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, न्यूरो विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ जैसे कई बड़े डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी विशेषज्ञ हफ्ते के अलग-अलग दिनों और समय पर आकर गरीब मरीजों का उसी स्तर का इलाज करते हैं, जैसा कि किसी महंगे कॉर्पोरेट अस्पताल में मिलता है।
क्लीनिक का समय और कोई छिपा हुआ खर्च नहीं
मरीजों के लिए इस क्लीनिक तक पहुंचना बहुत ही आसान है। यह क्लीनिक पटना के एम्स गोलंबर के पास एक शानदार सफेद रंग की इमारत में स्थित है। इमारत के बाहर बहुत बड़े अक्षरों में डॉ. रमण किशोर लिखा हुआ है, जिसे काफी दूर से ही आसानी से देखा जा सकता है। मरीजों की सुविधा के लिए यह क्लीनिक हफ्ते में पांच दिन खोला जाता है। सोमवार से लेकर शुक्रवार तक शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक यहां मरीजों का इलाज किया जाता है। प्रबंधन की तरफ से मरीजों को यह सलाह दी गई है कि वे क्लीनिक आने से पहले एक बार फोन जरूर कर लें। इससे उन्हें यह पता चल जाएगा कि उस दिन किस खास बीमारी के विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों को देखने के लिए मौजूद रहेंगे। डॉ. रमण किशोर ने यह भी साफ कर दिया है कि मरीजों को एसी वाली इमारत देखकर किसी छिपे हुए शुल्क से डरने की जरूरत नहीं है। इस भ्रम को दूर करने के लिए क्लीनिक के मुख्य द्वार पर ही एक बोर्ड लगा दिया गया है, जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि अंदर मिलने वाली सभी सेवाएं पूरी तरह निशुल्क हैं। उनका हमेशा से यही सपना रहा है कि गरीब मरीजों को भी वातानुकूलित चैंबर में पूरे सम्मान के साथ बेहतर इलाज मिले और उन्हें इसके लिए कर्ज न लेना पड़े।
अपनी आमदनी से चलता है इलाज का खर्च
इस बड़े सेवा कार्य के पीछे का आर्थिक प्रबंधन और भी ज्यादा हैरान करने वाला है। डॉ. रमण किशोर पेशे से एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं। वह मरीजों के इलाज के लिए किसी बाहरी डोनेशन या सरकारी फंड पर निर्भर नहीं हैं। इसके बजाय वह अपनी खुद की कमाई का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा गरीब मरीजों के इलाज और उनकी दवाओं पर खर्च कर देते हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में यह अटल संकल्प लिया है कि वह ताउम्र किसी भी मरीज से इलाज के बदले एक रुपया भी नहीं लेंगे। अब तक 53 हजार से ज्यादा लोगों का बिना कोई फीस लिए इलाज कर चुके डॉ. किशोर का कहना है कि उनकी यह निशुल्क सेवा जीवन भर इसी तरह बिना रुके चलती रहेगी।
मां की याद और एक बेटे का अटूट संकल्प
इस पूरे निशुल्क स्वास्थ्य अभियान के पीछे एक बहुत ही भावुक और व्यक्तिगत वजह छिपी है। डॉ. रमण किशोर बताते हैं कि डॉक्टर बनने के पीछे उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां प्रभा देवी रही हैं। उनकी जिंदगी में वह दुखद दिन भी आया जब सही समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण उनकी मां का निधन हो गया था। उसी दिन उन्होंने यह दृढ़ संकल्प लिया था कि इलाज के अभाव में अब किसी और की मां की जान वह नहीं जाने देंगे। इसी मजबूत इरादे ने उन्हें अपने गांव का पहला डॉक्टर बनने की ताकत दी और आज वही संकल्प उन्हें पूरे देश में 'गांव के डॉक्टर' के रूप में पहचान दिला चुका है। उन्होंने अपनी मां की 13वीं पुण्यतिथि के खास मौके पर ही इस निशुल्क क्लीनिक की शुरुआत की है। वह इस क्लीनिक को अपनी मां को समर्पित एक सच्ची श्रद्धांजलि मानते हैं। डॉ. किशोर ने कहा कि मेरी मां ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं और उन्हीं से मुझे यह ताकत मिली है। इसी ताकत के दम पर वह पिछले सात वर्षों से लगातार जरूरतमंद मरीजों की सेवा कर पा रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ प्रयास का असर क्लीनिक खुलने के पहले दिन ही देखने को मिला, जब वहां इलाज की उम्मीद में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।




















