बिहार के कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत की बात है, सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पूरा इलाज अब पटना में ही मुमकिन हो गया है। राजधानी के जय प्रभा मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में शुरुआती स्टेज से लेकर एडवांस्ड स्टेज तक के मरीजों को कामयाबी से ठीक किया जा रहा है, जिसके चलते अब मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों या महानगरों का रुख नहीं करना पड़ रहा। अस्पताल में हर महीने औसतन 20 सर्वाइकल कैंसर मरीज पहुंच रहे हैं और पिछले एक साल में करीब 200 मरीजों का सफल इलाज हो चुका है।
इमेज गाइडेड ब्रैकीथेरेपी से मिल रही नई उम्मीद
इस कामयाबी के पीछे इमेज गाइडेड ब्रैकीथेरेपी नाम की आधुनिक तकनीक है। मेदांता में रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. तेजस पंड्या बताते हैं कि सर्वाइकल कैंसर के इलाज में ब्रैकीथेरेपी बेहद कारगर साबित हो रही है। इसमें रेडिएशन छोड़ने वाली मशीन को ट्यूमर के एकदम करीब रखा जाता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं पर सीधा और सटीक असर होता है, जबकि मूत्राशय और मलाशय जैसे आसपास के स्वस्थ अंग सुरक्षित रहते हैं। डॉक्टर इमेजिंग की मदद से हर मरीज की शारीरिक बनावट और बीमारी की स्थिति देखकर अलग से इलाज की योजना तैयार करते हैं, जिससे थेरेपी और भी सुरक्षित तथा असरदार बन जाती है।
करीब 8 हफ्तों में पूरा होता है इलाज
डॉ. पंड्या के मुताबिक रेडिएशन थेरेपी सर्वाइकल कैंसर के इलाज की रीढ़ मानी जाती है और ज्यादातर मरीजों को इसी के जरिए इलाज दिया जाता है। सबसे पहले एक्सटर्नल बीम रेडिएशन थेरेपी यानी ईबीआरटी शुरू की जाती है, जो लगभग 5 से 6 सप्ताह चलती है। इसके बाद ब्रैकीथेरेपी का चरण आता है, जिसमें हफ्ते में एक बार सेशन होता है और कुल मिलाकर 3 से 4 सिटिंग में यह पूरी हो जाती है। इस तरह पूरी प्रक्रिया में करीब 8 हफ्तों का समय लग जाता है।
स्टेज के हिसाब से बदलती है ठीक होने की संभावना
डॉक्टर पंड्या बताते हैं कि अगर मरीज बीमारी की शुरुआती स्टेज में ही अस्पताल पहुंच जाए, तो उसके पूरी तरह ठीक होने की संभावना 90 प्रतिशत तक रहती है। जैसे-जैसे कैंसर की स्टेज आगे बढ़ती जाती है, ठीक होने की दर घटती जाती है, लेकिन स्टेज-3 और स्टेज-4 तक पहुंच चुके मरीजों को भी अगर समय पर सही इलाज मिल जाए, तो 50 से 60 प्रतिशत मामलों में बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। यानी देरी से पहुंचे मरीजों के लिए भी उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं होती।
बच्चेदानी के मुंह के कैंसर के शुरुआती संकेत
सर्वाइकल कैंसर को आम बोलचाल में बच्चेदानी के मुंह का कैंसर भी कहा जाता है। डॉ. पंड्या के अनुसार इसके शुरुआती लक्षणों में बिना किसी वजह के योनि से खून आना, मेनोपॉज हो चुकने के बाद भी रक्तस्राव होना और पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध के बाद ब्लीडिंग होना शामिल है। इनमें से कोई भी लक्षण दिखने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एडवांस स्टेज में शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल सकती है बीमारी
अगर बीमारी बढ़कर शरीर के दूसरे अंगों तक फैल जाए, तो लक्षण भी बदल जाते हैं। मसलन, कैंसर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो खांसी के साथ खून आने लगता है, वहीं हड्डियों तक फैलने पर उस हिस्से में लगातार दर्द बना रहता है। डॉक्टर पंड्या के मुताबिक ये लक्षण बीमारी के एडवांस स्टेज की तरफ इशारा करते हैं और ऐसे में देर बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। उनकी सलाह है कि इनमें से कोई भी लक्षण नजर आते ही तुरंत नजदीकी ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए, क्योंकि बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आती है, इलाज के कामयाब होने की संभावना उतनी ही ज्यादा रहती है। उनका कहना है कि एडवांस स्टेज पर पहुंच चुके मरीजों में भी सही समय पर सही इलाज मिलने से हर 10 में से करीब 6 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
17 जुलाई को मनाया गया ब्रैकीथेरेपी अवेयरनेस डे
हर साल 17 जुलाई को ब्रैकीथेरेपी अवेयरनेस डे मनाया जाता है, क्योंकि सर्वाइकल कैंसर के इलाज में इस तकनीक की भूमिका इतनी अहम मानी जाती है कि कई मामलों में इसके बिना उपचार अधूरा ही समझा जाता है। इसी मौके पर जय प्रभा मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक वर्कशॉप आयोजित की गई, ताकि वे ब्रैकीथेरेपी के फायदे, इससे जुड़ी आधुनिक तकनीकों और मरीजों को मिलने वाले लाभों की जानकारी आपस में साझा कर सकें। इस वर्कशॉप में बिहार समेत कई राज्यों से रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, मेडिकल फिजिसिस्ट, ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ और पीजी छात्र शामिल हुए।



















