रातभर के लंबे विश्राम के बाद मानव शरीर को नई ऊर्जा के साथ सक्रिय होने के लिए संतुलित पोषण की जरूरत पड़ती है। सुबह का पहला आहार शरीर के तंत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्राथमिक ईंधन का कार्य करता है। जब सुबह पौष्टिक आहार ग्रहण किया जाता है, तो कार्यक्षमता और मानसिक एकाग्रता में स्वतः सुधार दिखाई देता है। स्कूली बच्चों, कॉलेज विद्यार्थियों और कामकाजी लोगों के लिए सुबह का भोजन मानसिक एवं शारीरिक गतिविधियों को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। इसके विपरीत, सुबह की हड़बड़ाहट, समय का अभाव या केवल जीभ के स्वाद को प्राथमिकता देने के कारण खान-पान में कई ऐसी चूक हो जाती हैं जो दिनभर की कार्यक्षमता को गिरा देती हैं।
नाश्ता छोड़ने की भूल और उसका शारीरिक असर
अनेक लोग वजन घटाने के भ्रम अथवा सुबह की व्यस्तता का बहाना बनाकर पहला भोजन पूरी तरह छोड़ देते हैं और सीधे दोपहर के भोजन पर निर्भर रहते हैं। बिना कुछ खाए लंबा समय बिताने से शरीर में कमजोरी, सुस्ती, चक्कर आना और किसी कार्य पर ध्यान केंद्रित करने में गंभीर परेशानी होने लगती है। विशेष रूप से जिन व्यक्तियों की दिनचर्या में अत्यधिक मानसिक एकाग्रता या शारीरिक श्रम शामिल होता है, उनके लिए सुबह पेट खाली रखना सेहत के साथ समझौता करने जैसा है। यदि सुबह विस्तृत भोजन पकाने का अवसर न मिले, तो पोहा, उपमा, ओट्स, उबले अंडे, दही अथवा मौसमी ताजे फल जैसे त्वरित और सुपाच्य विकल्पों को अपनाकर शरीर को ऊर्जावान रखा जा सकता है।
मीठे खाद्य पदार्थों से तात्कालिक फुर्ती और बाद में भारी गिरावट
बाजार में मिलने वाले कई तरह के बिस्कुट, पेस्ट्री, डोनट्स और मीठे पेय पदार्थों में रिफाइंड चीनी की अत्यधिक मात्रा छिपी होती है। बहुत से लोग सुबह जल्दी में इन्हीं डिब्बाबंद मीठी चीजों का सेवन कर लेते हैं। यद्यपि अतिरिक्त शर्करा से युक्त आहार शुरू में फौरी तौर पर फुर्ती का आभास कराता है, परंतु यह ऊर्जा शरीर को लंबे समय तक तृप्त नहीं रख पाती। कुछ ही पलों में सुस्ती हावी होने लगती है और पुनः भूख सताने लगती है। अपने पहले आहार में शर्करा से भरी चीजों के स्थान पर ताजे फल, साबुत अनाज और रेशेदार खाद्य पदार्थों का चयन करना स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक लाभदायक निर्णय है।
केवल कार्बोहाइड्रेट लेने की कमी और प्रोटीन का संतुलन
सुबह के भोजन में अक्सर देखा जाता है कि लोग केवल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर चीजों को ही प्राथमिकता देते हैं। बिना प्रोटीन वाला भोजन करने से पेट बहुत देर तक संतुष्ट नहीं रहता और कुछ ही देर में दोबारा भूख लग जाती है। एक संतुलित आहार के भीतर प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण घटक होता है क्योंकि यह तृप्ति का अहसास लंबे समय तक बनाए रखता है। अपने नाश्ते को संतुलित बनाने के लिए उसमें उबले अंडे, पनीर, दही, गाय या भैंस का दूध, दालें, अंकुरित मूंग या काले चने जैसे समृद्ध प्रोटीन स्रोतों को शामिल करना चाहिए। इस प्रकार का भोजन शरीर को दिनभर स्थिर गति से ऊर्जा प्रदान करता है।
खाली पेट चाय की लत और पाचन तंत्र की परेशानियां
भारतीय घरों में सुबह उठते ही सबसे पहले चाय पीने का व्यापक चलन है, जहां कई लोग भोजन का एक निवाला मुंह में डाले बिना ही एक या दो कप तेज चाय पी लेते हैं। खाली पेट चाय की चुस्कियां लेने से पेट के भीतर एसिडिटी, सीने में जलन और गैस बनने की समस्या अचानक बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से ही उदर संबंधी विकार या पाचन की कमजोरी रहती है, उनके लिए खाली पेट चाय पीना स्थिति को और अधिक बिगाड़ देता है। इस परेशानी से बचने के लिए आवश्यक है कि चाय पीने से पहले या उसके साथ कोई हल्का, पौष्टिक आहार अवश्य ग्रहण किया जाए।



















