स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब अपनी नियमित थाली में पारंपरिक और कुदरती चीजों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी कड़ी में मोरिंगा यानी सहजन ने विशेष पहचान बनाई है। पेड़ की फलियां, हरी पत्तियां और यहां तक कि इसके बीज भी अलग-अलग तरह से काम में लिए जाते हैं। खानपान में साग-सब्जी की तरह शामिल की जाने वाली इसकी पत्तियां शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने का माध्यम बनती हैं।
पोषक तत्वों का प्राकृतिक मेल
सहजन के पत्तों में विटामिन्स, प्रोटीन्स और कई तरह के मिनरल्स की मौजूदगी पाई जाती है। शरीर के लिए उपयोगी कैल्शियम, पोटैशियम और आयरन के साथ-साथ इसमें विटामिन A, विटामिन C और विटामिन E भी मौजूद रहते हैं। इन तत्वों की मौजूदगी से यह दैनिक खानपान को संतुलित बनाने में मददगार साबित होता है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सहजन पर निर्भर रहकर पोषण की सारी जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। किसी भी गुणकारी खाद्य पदार्थ का अनियंत्रित उपयोग कुछ स्थितियों में नुकसानदेह भी हो सकता है, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों में विशेषज्ञ परामर्श जरूरी रहता है।
ऑक्सीडेटिव तनाव और कमजोरी पर प्रभाव
इस वनस्पति के भीतर एंटीऑक्सीडेंट यौगिक मौजूद रहते हैं, जो शरीर को आंतरिक ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने का काम करते हैं। जब इसे पौष्टिक रूटीन का अंग बनाया जाता है, तो यह शारीरिक दुर्बलता कम करने में सहायता कर सकता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर किस्म की सुस्ती या थकान का पक्का समाधान सहजन ही नहीं है, फिर भी नियमित भोजन के रूप में इसका समावेश शारीरिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
डायबिटीज के संदर्भ में चिकित्सीय राय
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया में पांच साल का अनुभव रखने वाली चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी बताती हैं कि मोरिंगा रक्त में शुगर के स्तर को संभालने में सहायता प्रदान करता है। उनका कहना है कि हर मरीज की शारीरिक स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए इसे डायबिटीज का अकेला और अचूक इलाज मानना उचित नहीं है। शुगर से जूझ रहे व्यक्तियों को अपने डॉक्टर की निगरानी, नियमित खानपान और निर्धारित दवाओं के तालमेल पर ही मुख्य ध्यान देना चाहिए।
त्वचा, बालों की देखभाल और अन्य शारीरिक लाभ
सहजन के बीजों से निकाला गया तेल सौंदर्य प्रसाधनों में काफी पसंद किया जाता है। त्वचा की कोमलता बरकरार रखने और उसमें प्राकृतिक नमी बनाए रखने के लिए इस तेल को विभिन्न कॉस्मेटिक उत्पादों में मिलाया जाता है। बालों में भी इसका इस्तेमाल होता है, मगर बालों के झड़ने अथवा डैंड्रफ की समस्या में इसे बहुत संभालकर आजमाने की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त फलियों और पत्तियों में फाइबर की प्रचुर मात्रा होने से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है। साथ ही इसके सूजनरोधी गुण शरीर की सूजन, जोड़ों में होने वाली तकलीफ, दिल की कार्यप्रणाली और लिवर को स्वस्थ रखने में भी उपयोगी पाए गए हैं।
किसानों के लिए मुनाफे की नई राह
यह पेड़ सिर्फ स्वास्थ्य लाभ तक सीमित न रहकर कृषि क्षेत्र में भी बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। बलिया जैसे इलाकों में इसकी पैदावार बहुत सरलता से हो जाती है। बाजार में सहजन की फलियों, हरी पत्तियों और इसके बीजों की स्वतंत्र मांग है और सबके अलग-अलग दाम मिलते हैं। इन हिस्सों से तैयार होने वाले पाउडर, तेल और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ दिला सकते हैं। जिन घरों में खुली जमीन हो, वहां यह पेड़ हरियाली फैलाने के साथ ताजी सब्जी का प्रबंध भी करता है।



















